Daniel · chapter 5 · verse 15
Daniel 5:15 in Hindi
देख, अभी पण्डित और तन्त्री लोग मेरे साम्हने इसलिये लाए गए थे कि यह लिखा हुआ पढ़ें और उसका अर्थ मुझे बताएं, परन्तु वे उस बात का अर्थ न समझा सके।
Dekh, abhee pandit aur tantree log mere saamhane isaliye laae gae the ki yah likhaa huaa padhem aur usakaa arth mujhe bataaem, parantu ve us baat kaa arth na samajhaa sake.
Daniel 5:15 in English
- King James Version (KJV)
- And now the wise [men], the astrologers, have been brought in before me, that they should read this writing, and make known unto me the interpretation thereof: but they could not shew the interpretation of the thing:
- World English Bible (WEB)
- Now the wise men, the enchanters, have been brought in before me, that they should read this writing, and make known to me its interpretation; but they could not show the interpretation of the thing.
- American Standard Version (ASV)
- And now the wise men, the enchanters, have been brought in before me, that they should read this writing, and make known unto me the interpretation thereof; but they could not show the interpretation of the thing.
- Bible in Basic English (BBE)
- And now the wise men, the users of secret arts, have been sent in before me for the purpose of reading this writing and making clear to me the sense of it: but they are not able to make clear the sense of the thing:
- Darby Translation (DBY)
- And now the wise men, the magicians, have been brought in before me, that they should read this writing, and make known unto me the interpretation thereof; but they could not shew the interpretation of the thing.
- Webster's Bible (WBS)
- And now the wise [men] , the astrologers, have been brought in before me, that they should read this writing, and make known to me the interpretation of it, but they could not show the interpretation of the thing:
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And now, caused to come up before me have been the wise men, the enchanters, that this writing they may read, and its interpretation to cause me to know: and they are not able to shew the interpretation of the thing:
Read in context
- 13तब दानिरयेल राजा के साम्हने भीतर बुलाया गया। राजा दानिरयेल से पूछने लगा, क्या तू वही दानिरयेल है जो मेरे पिता नबूकदनेस्सर राजा के यहूदा देश से लाए हुए यहूदी बंधुओं में से है?
- 14मैं ने तेरे विषय में सुना है कि ईश्वर की आत्मा तुझ में रहती है; और प्रकाश, प्रवीणता और उत्तम बुद्धि तुझ में पाई जाती है।
- 15देख, अभी पण्डित और तन्त्री लोग मेरे साम्हने इसलिये लाए गए थे कि यह लिखा हुआ पढ़ें और उसका अर्थ मुझे बताएं, परन्तु वे उस बात का अर्थ न समझा सके।
- 16परन्तु मैं ने तेरे विषय में सुना है कि दानिरयेल भेद खोल सकता और सन्देह दूर कर सकता है। इसलिये अब यदि तू उस लिखे हुए को पढ़ सके और उसका अर्थ भी मुझे समझा सके, तो तुझे बैंजनी रंग का वस्त्रा, और तेरे गले में सोने की कण्ठमाला पहिनाई जाएगी, और राज्य में तीसरा तू ही प्रभुता करेगा।।
- 17दानिरयेल ने राजा से कहा, अपने दान अपने ही पास रख; और जो बदला तू देना चाहता है, वह दूसरे को दे; वह लिखी हुई बात मैं राजा को पढ़ सुनाऊंगा, और उसका अर्थ भी तुझे समझाऊंगा।
Cross references
- Daniel 5:7–8 दानिय्येल 5:7–8तब राजा ने ऊंचे शब्द से पुकारकर तन्त्रियों, कसदियों और और होनहार बतानेवालों को हाजिर करवाने की आज्ञा दी। जब बाबुल के पण्डित पास आए, तब राज उन से कहने लगा, जो कोई वह लिखा हुआ पढ़कर उसका अर्थ मुझे समझाए उसे बैंजनी रंग का वस्त्रा और उसके गले में सोने की कण्ठमाला पहिनाई जाएगी; और मेरे राज्य में तीसरा वही प्रभुता करेगा। तब राजा के सब पण्डित लोग भीतर आए, परन्तु उस लिखे हुए को न पढ़ सके और न राजा को उसका अर्थ समझा सके।
- Isaiah 47:12 यशायाह 47:12अपने तन्त्रा मन्त्रा और बहुत से टोनहों को, जिनका तू ने बाल्यावस्था ही से अभ्यास किया है उपयोग में ला, सम्भव है तू उन से लाभ उठा सके या उनके बल से स्थिर रह सके।
- Isaiah 29:10–12 यशायाह 29:10–12यहोवा ने तुम को भारी नींद में डाल दिया है और उस ने तुम्हारी नबीरूपी आंखों को बन्द कर दिया है और तुम्हारे दर्शीरूपी सिरों पर पर्दा डाला है। इसलिये सारे दर्शन तुम्हारे लिये एक लपेटी और मुहर की हुई पुस्तक की बातों के समान हैं, जिसे कोई पढ़े- लिखे मनुष्य को यह कहकर दे, इसे पढ़, और वह कहे, मैं नहीं पढ़ सकता क्योंकि इस पर मुहर की हुई है। तब वही पुस्तक अनपढ़े को यह कहकर दी जाए, इसे पढ़, और वह कहे, मैं तो अनपढ़ हूं।।
- Daniel 2:3–11 दानिय्येल 2:3–11तब राजा ने उन से कहा, मैं ने एक स्वप्न देखा है, और मेरा मन व्याकुल है कि स्वपन को कैसे समझूं। कसदियों ने, राजा से अरामी भाषा में कहा, हे राजा, तू चिरंजीव रहे! अपने दासों को स्वप्न बता, और हम उसका फल बताएंगे। राजा ने कसदियों को उत्तर दिया, मैं यह आज्ञा दे चुका हूं कि यदि तुम फल समेत स्वप्न को न बताओगे तो तुम टुकड़े टुकड़े किए जाओगे, और तुम्हारे घर फुंकवा दिए जाएंगे। और यदि तुम फल समेत स्वप्न को बता दो तो मुझ से भांति भांति के दान और भारी प्रतिष्ठा पाओगे। इसलिये तुम मुझे फल समेत स्वप्न बाताओ। उन्होंने दूसरी बार कहा, हे राजा स्वप्न तेरे दासों को बताया जाए, और हम उसका फल समझा देंगे। राजा ने उत्तर दिया, मैं निश्चय जानता हूं कि तुम यह देख कर, कि राजा के मुंह से आज्ञा निकल चुकी है, समय बढ़ाना चाहते हो। इसलिये यदि तुम मुझे स्वप्न न बताओ तो तुम्हारे लिये एक ही आज्ञा है। क्योंकि तुम ने गोष्ठी की होगी कि जब तक समय न बदले, तब तक हम राजा के साम्हने झूठी और गपशप की बातें कहा करेंगे। इसलिये तुम मुझे स्वप्न को बताओ, तब मैं जानूंगा कि तुम उसका फल भी समझा सकते हो। कसदियों ने राजा से कहा, पृथ्वी भर में ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो राजा के मन की बात बता सके; और न कोई ऐसा राजा, वा प्रधान, वा हाकिम कभी हुआ है जिसने किसी ज्योतिषी वा तन्त्री, वा कसदी से ऐसी बात पूछी हो। जो बात राजा पूछता है, वह अनोखी है, और देवताओं को छोड़ कर जिनका निवास मनुष्यों के संग नहीं है, और कोई दूसरा नहीं, जो राजा को यह बता सके॥
Original words (Hebrew)
- now · H3705כְּעַן kᵉʻan
- wise · H2445חַכִּים chakkîym
- astrologers · H826אַשָּׁף ʼashshâph
- brought · H5954עֲלַל ʻălal
- before · H6925קֳדָם qŏdâm
- read · H7123קְרָא qᵉrâʼ
- this · H1836דֵּן dên
- writing · H3792כְּתָב kᵉthâb
- known · H3046יְדַע yᵉdaʻ
- interpretation · H6591פְּשַׁר pᵉshar
- could · H3546כְּהַל kᵉhal
- not · H3809לָא lâʼ
- shew · H2324חֲוָא chăvâʼ
- interpretation · H6591פְּשַׁר pᵉshar
- thing · H4406מִלָּה millâh