Exodus · chapter 15 · verse 17
Exodus 15:17 in Hindi
तू उन्हें पहुचाकर अपने निज भागवाले पहाड़ पर बसाएगा, यह वही स्थान है, हे यहोवा जिसे तू ने अपने निवास के लिये बनाया, और वही पवित्रास्थान है जिसे, हे प्रभु, तू ने आप स्थिर किया है।।
Too unhem pahuchaakar apane nij bhaagavaale pahaad par basaaegaa, yah vahee sthaan hai, he yahovaa jise too ne apane nivaas ke liye banaayaa, aur vahee pavitraasthaan hai jise, he prabhu, too ne aap sthir kiyaa hai..
Exodus 15:17 in English
- King James Version (KJV)
- Thou shalt bring them in, and plant them in the mountain of thine inheritance, [in] the place, O LORD, [which] thou hast made for thee to dwell in, [in] the Sanctuary, O Lord, [which] thy hands have established.
- World English Bible (WEB)
- You will bring them in, and plant them in the mountain of your inheritance, the place, LORD, which you have made for yourself to dwell in: the sanctuary, Lord, which your hands have established.
- American Standard Version (ASV)
- Thou wilt bring them in, and plant them in the mountain of thine inheritance, The place, O Jehovah, which thou hast made for thee to dwell in, The sanctuary, O Lord, which thy hands have established.
- Bible in Basic English (BBE)
- You will take them in, planting them in the mountain of your heritage, the place, O Lord, where you have made your house, the holy place, O Lord, the building of your hands.
- Darby Translation (DBY)
- Thou shalt bring them in, and plant them in the mountain of thine inheritance, The place that thou, Jehovah, hast made thy dwelling, The Sanctuary, Lord, that thy hands have prepared.
- Webster's Bible (WBS)
- Thou shalt bring them in, and plant them in the mountain of thy inheritance, [in] the place, O LORD, [which] thou hast made for thee to dwell in; [in] the sanctuary, O LORD. [which] thy hands have established.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Thou dost bring them in, And dost plant them In a mountain of Thine inheritance, A fixed place for Thy dwelling Thou hast made, O Jehovah; A sanctuary, O Lord, Thy hands have established;
Read in context
- 15एदोम के अधिपति व्याकुल होंगे; मोआब के पहलवान थरथरा उठेंगे; सब कनान निवासियों के मन पिघल जाएंगें।।
- 16उन में डर और घबराहट समा जाएगा; तेरी बांह के प्रताप से वे पत्थर की नाई अबोल होंगे, जब तक, हे यहोवा, तेरी प्रजा के लोग निकल न जाएं, जब तक तेरी प्रजा के लोग जिनको तू ने मोल लिया है पार न निकल जाएं।।
- 17तू उन्हें पहुचाकर अपने निज भागवाले पहाड़ पर बसाएगा, यह वही स्थान है, हे यहोवा जिसे तू ने अपने निवास के लिये बनाया, और वही पवित्रास्थान है जिसे, हे प्रभु, तू ने आप स्थिर किया है।।
- 18यहोवा सदा सर्वदा राज्य करता रहेगा।।
- 19यह गीत गाने का कारण यह है, कि फिरौन के घोड़े रथों और सवारों समेत समुद्र के बीच में चले गए, और यहोवा उनके ऊपर समुद्र का जल लौटा ले आया; परन्तु इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर होकर चले गए।
Cross references
- Psalm 44:2 भजन संहिता 44:2तू ने अपने हाथ से जातियों को निकाल दिया, और इनको बसाया; तू ने देश देश के लोगों को दु:ख दिया, और इनको चारों ओर फैला दिया;
- Psalm 80:8 भजन संहिता 80:8तू मि से एक दाखलता ले आया; और अन्यजातियों को निकालकर उसे लगा दिया।
- Psalm 78:54–55 भजन संहिता 78:54–55और उस ने उनको अपने पवित्रा देश के सिवाने तक, इसी पहाड़ी देश में पहुंचाया, जो उस ने अपने दहिने हाथ से प्राप्त किया था। उस ने उनके साम्हने से अन्यजातियों को भगा दिया; और उनकी भूमि को डोरी से माप मापकर बांट दिया; और इस्त्राएल के गोत्रों को उनके डेरों में बसाया।।
- Jeremiah 32:41 यिर्मयाह 32:41मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ उनका भला करता रहूंगा, और सचमुच उन्हें इस देश में अपने सारे मन ओर प्राण से बसा दूंगा।
- Psalm 78:68–69 भजन संहिता 78:68–69परन्तु यहूदा ही के गोत्रा को, और अपने प्रिय सिरयोन पर्वत को चुन लिया। उस ने अपने पवित्रास्थान को बहुत ऊंचा बना दिया, और पृथ्वी के समान स्थिर बनाया, जिसकी नेव उस ने सदा के लिये डाली है।
- Jeremiah 31:23 यिर्मयाह 31:23इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है: जब मैं यहूदी बंधुओं को उनके देश के नगरों में लौटाऊंगा, तब उन में यह आशीर्वाद फिर दिया जाएगा: हे धर्मभरे वासस्थान, हे पवित्र पर्वत, यहोवा तुझे आशीष दे!
- Isaiah 5:1–4 यशायाह 5:1–4अब मैं अपने प्रिय के लिये और उसकी दाख की बारी के विषय में गीत गाऊंगा: एक अति उपजाऊ टीले पर मेरे प्रिय की एक दाख की बरी थी। उस ने उसकी मिट्टी खोदी और उसके पत्थर बीनकर उस में उत्तम जाति की एक दाखलता लगाई; उसके बीच में उस ने एक गुम्मट बनाया, और दाखरस के लिये एक कुण्ड भी खोदा; तब उस ने दाख की आशा की, परन्तु उस में निकम्मी दाखें ही लगीं।। अब हे यरूशलेम के निवासियों और हे यहूदा के मनुष्यों, मेरे और मेरी दाख की बारी के बीच न्याय करो। मेरी दाख की बारी के लिये और क्या करना रह गया जो मैं ने उसके लिये न किया हो? फिर क्या कारण है कि जब मैं ने दाख की आशा की तब उस में निकम्मी दाखें लगीं?
- Psalm 132:13–14 भजन संहिता 132:13–14क्योंकि यहोवा ने सिरयोन को अपनाया है, और उसे अपने निवास के लिये चाहा है।। यह तो युग युग के लिये मेरा विश्रामस्थान हैं; यहीं मैं रहूंगा, क्योंकि मैं ने इसका चाहा है।
- Jeremiah 2:21 यिर्मयाह 2:21मैं ने तो तुझे उत्तम जाति की दाखलता और उत्तम बीज करके लगाया था, फिर तू क्यों मेरे लिये जंगली दाखलता बन गई?