Ezekiel · chapter 36 · verse 30
Ezekiel 36:30 in Hindi
मैं वृक्षों के फल और खेत की उपज बढ़ाऊंगा, कि जातियों में अकाल के कारण फिर तुम्हारी नामधराई न होगी।
Maim vrukshom ke phal aur khet kee upaj badhaaoongaa, ki jaatiyom mem akaal ke kaaran phir tumhaaree naamadharaaee na hogee.
Ezekiel 36:30 in English
- King James Version (KJV)
- And I will multiply the fruit of the tree, and the increase of the field, that ye shall receive no more reproach of famine among the heathen.
- World English Bible (WEB)
- I will multiply the fruit of the tree and the increase of the field, that you may receive no more the reproach of famine among the nations.
- American Standard Version (ASV)
- And I will multiply the fruit of the tree, and the increase of the field, that ye may receive no more the reproach of famine among the nations.
- Bible in Basic English (BBE)
- And I will make the tree give more fruit and the field fuller produce, and no longer will you be shamed among the nations for need of food.
- Darby Translation (DBY)
- And I will multiply the fruit of the trees and the increase of the field, so that ye may receive no more the reproach of famine among the nations.
- Webster's Bible (WBS)
- And I will multiply the fruit of the tree, and the increase of the field, that ye shall receive no more reproach of famine among the heathen.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And I have multiplied the fruit of the tree, And the increase of the field, So that ye receive not any more a reproach of famine among nations.
Read in context
- 28तुम उस देश में बसोगे जो मैं ने तुम्हारे पितरों को दिया था; और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा।
- 29और मैं तुम को तुम्हारी सारी अशुद्धता से छुड़ाऊंगा, और अन्न उपजने की आज्ञा देकर, उसे बढ़ाऊंगा और तुम्हारे बीच अकाल न डालूंगा।
- 30मैं वृक्षों के फल और खेत की उपज बढ़ाऊंगा, कि जातियों में अकाल के कारण फिर तुम्हारी नामधराई न होगी।
- 31तब तुम अपने बुरे चालचलन और अपने कामों को जो अच्छे नहीं थे, स्मरण करके अपने अधर्म और घिनौने कामों के कारण अपने आप से घृणा करोगे।
- 32परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, तुम जान जो कि मैं इसको तुम्हारे निमित्त नहीं करता। हे इस्राएल के घराने अपने चालचलन के विषय में लज्जित हो और तुम्हारा मुख काला हो जाए।
Cross references
- Ezekiel 34:27 यहेजकेल 34:27और मैदान के वृक्ष फलेंगे और भूमि अपनी उपज उपजाएगी, और वे अपने देश में निडर रहेंगे; जब मैं उनके जूए को तोड़ कर उन लोगों के हाथ से छुड़ाऊंगा, जो उन से सेवा कराते हैं, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।
- Joel 2:26 योएल 2:26तुम पेट भरकर खाओगे, और तृप्त होगे, और अपने परमेश्वर यहोवा के नाम की स्तुति करोगे, जिस ने तुम्हारे लिये आश्चर्य के काम किए हैं। और मेरी प्रजा की आशा फिर कभी न टूटेगी।
- Deuteronomy 29:23–28 व्यवस्थाविवरण 29:23–28और यह भी देखकर कि इसकी सब भूमि गन्धक और लोन से भर गई है, और यहां तक जल गई है कि इस में न कुछ बोया जाता, और न कुछ जम सकता, और न घास उगती है, वरन सदोम और अमोरा, अदमा और सबोयीम के समान हो गया है जिन्हें यहोवा ने अपने कोप और जलजलाहट में उलट दिया था; और सब जातियों के लोग पूछेंगे, कि यहोवा ने इस देश से ऐसा क्यों किया? और इस बड़े कोप के भड़कने का क्या कारण है? तब लोग यह उत्तर देंगे, कि उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने जो वाचा उनके साथ मि देश से निकालने के समय बान्धी थी उसको उन्हों ने तोड़ा है। और पराए देवताओं की उपासना की है जिन्हें वे पहिले नहीं जानते थे, और यहोवा ने उनको नहीं दिया था; इसलिये यहोवा का कोप इस देश पर भड़क उठा है, कि पुस्तक मे लिखे हुए सब शाप इस पर आ पडें; और यहोवा ने कोप, और जलजलाहट, और बड़ा ही क्रोध करके उन्हें उनके देश में से उखाड़ कर दूसरे देश में फेंक दिया, जैसा कि आज प्रगट है।।
- Joel 2:17 योएल 2:17याजक जो यहोवा के टहलुए हैं, वे आंगल और वेदी के बीच में रो रोकर कहें, हे यहोवा अपनी प्रजा पर तरस खा; और अपने निज भाग की नामधराई न होने दे; न अन्यजातियां उसकी उपमा देने पाएं। जाति जाति के लोग आपस में क्यां कहने पाएं, कि उनका परमेश्वर कहां रहा?
- Leviticus 26:4 लैव्यव्यवस्था 26:4तो मैं तुम्हारे लिये समय समय पर मेंह बरसाऊंगा, तथा भूमि अपनी उपज उपजाएगी, और मैदान के वृक्ष अपने अपने फल दिया करेंगे;