James · chapter 1 · verse 25
James 1:25 in Hindi
पर जो व्यक्ति स्वतंत्राता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
Par jo vyakti svatantraataa kee siddh vyavasthaa par dhyaan karataa rahataa hai, vah apane kaam mem isaliye aasheesh paaegaa ki sunakar naheem, par vaisaa hee kaam karataa hai.
James 1:25 in English
- King James Version (KJV)
- But whoso looketh into the perfect law of liberty, and continueth [therein], he being not a forgetful hearer, but a doer of the work, this man shall be blessed in his deed.
- World English Bible (WEB)
- But he who looks into the perfect law of freedom and continues, not being a hearer who forgets but a doer of the work, this man will be blessed in what he does.
- American Standard Version (ASV)
- But he that looketh into the perfect law, the [law] of liberty, and [so] continueth, being not a hearer that forgetteth but a doer that worketh, this man shall be blessed in his doing.
- Bible in Basic English (BBE)
- But he who goes on looking into the true law which makes him free, being not a hearer without memory but a doer putting it into effect, this man will have a blessing on his acts.
- Darby Translation (DBY)
- But he that fixes his view on [the] perfect law, that of liberty, and abides in [it], being not a forgetful hearer but a doer of [the] work, he shall be blessed in his doing.
- Webster's Bible (WBS)
- But he who looketh into the perfect law of liberty, and continueth [in it] , he being not a forgetful hearer, but a doer of the work, this man shall be blessed in his deed.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he who did look into the perfect law — that of liberty, and did continue there, this one — not a forgetful hearer becoming, but a doer of work — this one shall be happy in his doing.
Read in context
- 23क्योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो, और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
- 24इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
- 25पर जो व्यक्ति स्वतंत्राता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
- 26यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
- 27हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों ओर विधवाओं के क्लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्कलंक रखें।।
Cross references
- Luke 11:28 लूका 11:28उस ने कहा, हां; परन्तु धन्य वे हैं, जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।।
- John 13:17 यूहन्ना 13:17तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्य हो।
- 2 Corinthians 3:17–18 2 कुरिन्थियों 3:17–18प्रभु तो आत्मा है: और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्वतंत्राता है। परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं।।
- 1 Peter 2:16 1 पतरस 2:16और अपने आप को स्वतंत्रा जानो पर अपनी इस स्वतंत्राता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझकर चलो।
- Luke 6:47–49 लूका 6:47–49जो कोई मेरे पास आता है, और मेरी बातें सुनकर उन्हें मानता है, मैं तुम्हें बताता हूं कि वह किस के समान है? वह उस मनुष्य के समान है, जिस ने घर बनाते समय भूमि गहरी खोदकर चट्टान की नेव डाली, और जब बाढ़ आई तो धारा उस घर पर लगी, परन्तु उसे हिला न सकी; क्योंकि वह पक्का बना था। परन्तु जो सुनकर नहीं मानता, वह उस मनुष्य के समान है, जिस ने मिट्टी पर बिना नेव का घर बनाया। जब उस पर धारा लगी, तो वह तुरन्त गिर पड़ा, और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।।
- Galatians 5:1 गलातियों 5:1मसीह ने स्वतंत्राता के लिये हमें स्वतंत्रा किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्व के जूए में फिर से न जुतो।।
- James 2:12 याकूब 2:12तुम उन लोगों की नाई वचन बोलो, और काम भी करो, जिन का न्याय स्वतंत्राता की व्यवस्था के अनुसार होगा।
- John 8:31–32 यूहन्ना 8:31–32तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्रा करेगा।
- 1 Corinthians 15:58 1 कुरिन्थियों 15:58सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।।
- 1 Timothy 4:16 1 तीमुथियुस 4:16इन बातों पर स्थिर रह, क्योंकि यदि ऐसा करता रहेगा, तो तू अपने, और अपने सुननेवालों के लिये भी उद्धार का कारण होगा।।
- Psalm 119:96–105 भजन संहिता 119:96–105जितनी बातें पूरी जान पड़ती हैं, उन सब को तो मैं ने अधूरी पाया है, परन्तु तेरी आज्ञा का विस्तार बड़ा है।। अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।। तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।
- James 1:23–24 याकूब 1:23–24क्योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो, और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
Original words (Greek)
- But · G1161δέ dé
- looketh · G3879παρακύπτω parakýptō
- into · G1519εἰς eis
- perfect · G5046τέλειος téleios
- law · G3551νόμος nómos
- liberty · G1657ἐλευθερία eleuthería
- and · G2532καί kaí
- continueth · G3887παραμένω paraménō
- he · G3778οὗτος hoûtos
- being · G1096γίνομαι gínomai
- not · G3756οὐ ou
- forgetful · G1953ἐπιλησμονή epilēsmonḗ
- hearer · G202ἀκροατής akroatḗs
- but · G235ἀλλά allá
- doer · G4163ποιητής poiētḗs
- work · G2041ἔργον érgon
- man · G3778οὗτος hoûtos
- be · G2071ἔσομαι ésomai
- blessed · G3107μακάριος makários
- in · G1722ἐν en
- his · G846αὐτός autós
- deed · G4162ποίησις poíēsis