Jeremiah · chapter 2 · verse 18
Jeremiah 2:18 in Hindi
और अब तुझे मिस्र के मार्ग से क्या लाभ है कि तू सीहोर का जल पीए? अथवा अश्शूर के मार्ग से भी तुझे क्या लाभ कि तू महानद का जल पीए?
Aur ab tujhe misr ke maarg se kyaa laabh hai ki too seehor kaa jal peee? Athavaa ashshoor ke maarg se bhee tujhe kyaa laabh ki too mahaanad kaa jal peee?
Jeremiah 2:18 in English
- King James Version (KJV)
- And now what hast thou to do in the way of Egypt, to drink the waters of Sihor? or what hast thou to do in the way of Assyria, to drink the waters of the river?
- World English Bible (WEB)
- Now what do you gain by going to Egypt, to drink the waters of the Shihor? Or why do you go on the way to Assyria, to drink the waters of the River?
- American Standard Version (ASV)
- And now what hast thou to do in the way to Egypt, to drink the waters of the Shihor? or what hast thou to do in the way to Assyria, to drink the waters of the River?
- Bible in Basic English (BBE)
- And now, what have you to do on the way to Egypt, to get your drink from the waters of the Nile? or what have you to do on the way to Assyria, to get your drink from the waters of the River?
- Darby Translation (DBY)
- And now, what hast thou to do with the way of Egypt, to drink the waters of Shihor? And what hast thou to do with the way of Assyria, to drink the waters of the River?
- Webster's Bible (WBS)
- And now what hast thou to do in the way of Egypt, to drink the waters of Sihor? or what hast thou to do in the way of Assyria, to drink the waters of the river?
- Young's Literal Translation (YLT)
- And now, what — to thee in the way of Egypt, To drink the waters of Sihor? And what — to thee in the way of Asshur, To drink the waters of the River?
Read in context
- 16और नोप और तहपत्हेस के निवासी भी तेरे देश की उपज चट कर गए हैं।
- 17क्या यह तेरी ही करनी का फल नहीं, जो तू ने अपने परमेश्वर यहोवा को छोड़ दिया जो तुझे मार्ग में लिए चला?
- 18और अब तुझे मिस्र के मार्ग से क्या लाभ है कि तू सीहोर का जल पीए? अथवा अश्शूर के मार्ग से भी तुझे क्या लाभ कि तू महानद का जल पीए?
- 19तेरी बुराई ही तेरी ताड़ना करेगी, और तेरा भटक जाना तुझे उलाहना देगा। जान ले और देख कि अपने परमेश्वर यहोवा को त्यागना, यह बुरी और कड़वी बात है; तुझे मेरा भय ही नहीं रहा, प्रभु सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
- 20क्योंकि बहुत समय पहिले मैं ने तेरा जूआ तोड़ डाला और तेरे बन्धन खोल दिए; परन्तु तू ने कहा, मैं सेवा न करूंगी। और सब ऊंचे-ऊंचे टीलों पर और सब हरे पेड़ों के नीचे तू व्यभिचारिण का सा काम करती रही।
Cross references
- Joshua 13:3 यहोशू 13:3(मि के आगे शीहोर से लेकर उत्तर की ओर एक्रोन के सिवाने तक जो कनानियों का भाग गिना जाता है; और पलििितशयों के पांचों सरदार, अर्थात् अज्जा, अशदोद, अशकलोन, गत, और एक्रोन के लोग), और दक्खिनी ओर अव्वी भी,
- Isaiah 31:1 यशायाह 31:1हाय उन पर जो सहायता पाने के लिये मि को जाते हैं और घोड़ों का आसरा करते हैं; जो रथों पर भरोसा रखते क्योंकि वे बहुत हैं, और सवारों पर, क्योंकि वे अति बलवान हैं, पर इस्राएल के पवित्रा की ओर दृष्टि नहीं करते और न यहोवा की खोज करते हैं!
- Hosea 7:11 होशे 7:11एप्रैम एक भोली पण्डुकी के समान हो गया है जिस के कुछ बुद्धि नहीं; वे मिस्त्रियों की दोहाई देते, और अश्शूर को चले जाते हैं।
- Jeremiah 2:36 यिर्मयाह 2:36तू क्यों नया मार्ग पकड़ने के लिये इतनी डांवाडोल फिरती है? जैसे अश्शूरियों से तू लज्जित हुई वैसे ही मिस्रियों से भी होगी।
- Ezekiel 17:15 यहेजकेल 17:15तौभी इस ने घोड़े और बड़ी सेना मांगने को अपने दूत मिस्र में भेजकर उस से बलवा किया। क्या वह फूले फलेगा? क्या ऐसे कामों का करनेवाला बचेगा? क्या वह अपनी वाचा तोड़ने पर भी बच जाएगा?
- Hosea 5:13 होशे 5:13जब एप्रैम ने अपना रोग, और यहूदा ने अपना घाव देखा, तब एप्रैम अश्शूर के पास गया, और यारेब राजा को कहला भेजा। परन्तु न वह तुम्हें चंगा कर सकता और न तुम्हार घाव अच्छा कर सकता है।
- Isaiah 30:1–7 यशायाह 30:1–7यहोवा की यह वाणी है, हाय उन बलवा करनेवाले लड़कों पर जो युक्ति तो करते परन्तु मेरी ओर से नहीं; वाचा तो बान्धते परन्तु मेरे आत्मा के सिखाये नहीं; और इस प्रकार पाप पर पाप बढ़ाते हैं। वे मुझ से बिन पूछे मि को जाते हैं कि फिरौन की रक्षा में रहे और मि की छाया में शरण लें। इसलिये फिरौन का शरणस्थान तुम्हारी लज्जा का, और मि की छाया में शरण लेना तुम्हारी निन्दा का कारण होगा। उसके हाकिम सोअन में आए तो हैं और उसके दूत अब हानेस में पहुंचे हैं। वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिस से उनका कुछ लाभ न होगा, जो सहायता और लाभ के बदले लज्जा और नामधराई का कारण होगी।। दक्खिन देश के पशुओं के विषय भारी वचन। वे अपनी धन सम्पति को जवान गदहों की पीठ पर, और अपने खजानों को ऊंटों के कूबड़ों पर लादे हुए, संकट और सकेती के देश में होकर, जहां सिंह और सिंहनी, नाग और उड़नेवाले तेज विषधर सर्प रहते हैं, उन लोगों के पास जा रहे हैं जिन से उनको लाभ न होगा। क्योंकि मि की सहायता व्यर्थ और निकम्मी है, इस कारण मैं ने उसको बैठी रहनेवाली रहब कहा है।।
- 2 Chronicles 28:20–21 2 इतिहास 28:20–21तब अश्शूर का राजा तिलगतपिलनेसेर उसके विरूद्ध आया, और उसको कष्ट दिया; दृढ़ नहीं किया। आहाज ने तो यहोवा के भवन और राजभवन और हाकिमों के घरों में से धन निकालकर अश्शूर के राजा को दिया, परन्तु इससे उसकी कुछ सहायता न हुई।
- 2 Kings 16:7–9 2 राजा 16:7–9और आहाज ने दूत भेजकर अश्शूर के राजा तिग्लत्पिलेसेर के पास कहला भेजा कि मुझे अपना दास, वरन बेटा जानकर चढ़ाई कर, और मुझे अराम के राजा और इस्राएल के राजा के हाथ से बचा जो मेरे विरूद्ध उठे हैं। और आहाज ने यहोवा के भवन में और राजभवन के भणडारों में जितना सोना- चान्दी मिला उसे अश्शूर के राजा के पास भेंट करके भेज दिया। उसकी मानकर अश्शूर के राजा ने दमिश्क पर चढ़ाई की, और उसे लेकर उसके लोगों को बन्धुआ करके, कीर को ले गया, और रसीन को मार डाला।
- Jeremiah 37:5–10 यिर्मयाह 37:5–10उस समय फिरौन की सेना चढ़ाई के लिये मिस्र से निकली; तब कसदी जो यरूशलेम को घेरे हुए थे, उसका समाचार सुनकर यरूश्लेम के पास से चले गए। तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, यहुदा के जिस राजा ने तुम को प्रार्थना करने के लिये मेरे पास भेजा है, उस से यों कहो, कि देख, फिरौन की जो सेना तुम्हारी सहायता के लिये निकली है वह अपने देश मिस्र में लौट जाएगी। और कसदी फिर वापिस आकर इस नगर से लड़ेंगे; वे इसको ले लेंगे और फूंक देंगे। यहोवा यों कहता है, यह कहकर तुम अपने अपने मन में धोखा न खाओ कि कसदी हमारे पास से निश्चय चले गए हैं; क्योंकि वे नहीं चले गए। क्योंकि यदि तुम ने कसदियों की सारी सेना को जो तुम से लड़ती है, ऐसा मार भी लिया होता कि उन में से केवल घायल लोग रह जाते, तौभी वे अपने अपने तम्बू में से उठकर इस नगर को फूंक देते।
- Lamentations 4:17 विलापगीत 4:17हमारी आंखें व्यर्थ ही सहायता की बाट जोहते जोहते रह गई हैं, हम लगातार एक ऐसी जाति की ओर ताकते रहे जो बचा नहीं सकी।