Leviticus · chapter 21 · verse 18
Leviticus 21:18 in Hindi
कोई क्यों न हो जिस में दोष हो वह समीप न आए, चाहे वह अन्धा हो, चाहे लंगड़ा, चाहे नकचपटा हो, चाहे उसके कुछ अधिक अंग हो,
Koee kyom na ho jis mem dosh ho vah sameep na aae, chaahe vah andhaa ho, chaahe langadaa, chaahe nakachapataa ho, chaahe usake kuchh adhik ang ho,
Leviticus 21:18 in English
- King James Version (KJV)
- For whatsoever man [he be] that hath a blemish, he shall not approach: a blind man, or a lame, or he that hath a flat nose, or any thing superfluous,
- World English Bible (WEB)
- For whatever man he is that has a defect, he shall not draw near: a blind man, or a lame, or he who has a flat nose, or any deformity,
- American Standard Version (ASV)
- For whatsoever man he be that hath a blemish, he shall not approach: a blind man, or a lame, or he that hath a flat nose, or anything superfluous,
- Bible in Basic English (BBE)
- For any man whose body is damaged may not come near: one who is blind, or has not the use of his legs, or one who has a broken nose or any unnatural growth,
- Darby Translation (DBY)
- for whatever man hath a defect, he shall not approach: a blind man, or a lame, or he that hath a flat nose, or one limb longer than the other,
- Webster's Bible (WBS)
- For whatever man [he may be] that hath a blemish, he shall not approach: a blind man, or a lame, or he that hath a flat nose, or any thing superfluous,
- Young's Literal Translation (YLT)
- for no man in whom [is] blemish doth draw near — a man blind, or lame or dwarfed, or enlarged,
Read in context
- 16फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
- 17हारून से कह, कि तेरे वंश की पीढ़ी पीढ़ी में जिस किसी के कोई भी दोष हों वह अपने परमेश्वर का भोजन चढ़ाने के लिये समीप न आए।
- 18कोई क्यों न हो जिस में दोष हो वह समीप न आए, चाहे वह अन्धा हो, चाहे लंगड़ा, चाहे नकचपटा हो, चाहे उसके कुछ अधिक अंग हो,
- 19वा उसका पांव, वा हाथ टूटा हो,
- 20वा वह कुबड़ा, वा बौना हो, वा उसकी आंख में दोष हो, वा उस मनुष्य के चाईं वा खजुली हो, वा उसके अंड पिचके हों;
Cross references
- 1 Timothy 3:2–3 1 तीमुथियुस 3:2–3सो चाहिए, कि अध्यक्ष निर्दोष, और एक ही पत्नी का पति, संयमी, सुशील, सभ्य, पहुनाई करनेवाला, और सिखाने में निपुण हो। पियक्कड़ या मारपीट करनेवाला न हो; बरन कोमल हो, और न झगड़ालू, और न लोभी हो।
- Leviticus 22:19–25 लैव्यव्यवस्था 22:19–25तो अपने निमित्त ग्रहणयोग्य ठहरने के लिये बैलों वा भेड़ों वा बकरियों में से निर्दोष नर चढ़ाया जाए। जिस में कोई भी दोष हो उसे न चढ़ाना; क्योंकि वह तुम्हारे निमित्त ग्रहणयोग्य न ठहरेगा। और जो कोई बैलों वा भेड़- बकरियों में से विशेष वस्तु संकल्प करने के लिये वा स्वेच्छाबलि के लिये यहोवा को मेलबलि चढ़ाए, तो ग्रहण होने के लिये अवश्य है कि वह निर्दोष हो, उस में कोई भी दोष न हो। जो अन्धा वा अंग का टूटा वा लूला हो, वा उस में रसौली वा खौरा वा खुजली हो, ऐसों को यहोवा के लिये न चढ़ाना, उनको वेदी पर यहोवा के लिये हव्य न चढ़ाना। जिस किसी बैल वा भेड़ वा बकरे का कोई अंग अधिक वा कम हो उसको स्वेच्छाबलि कि लिये चढ़ा सकते हो, परन्तु मन्नत पूरी करने के लिये वह ग्रहण न होगा। जिसके अंड दबे वा कुचले वा टूटे वा कट गए हों उसको यहोवा के लिये न चढ़ाना, और अपने देश में भी ऐसा काम न करना। फिर इन में से किसी को तुम अपने परमेश्वर का भोजन जानकर किसी परदेशी से लेकर न चढ़ाओ; क्योंकि उन में उनका बिगाड़ वर्तमान है, उन में दोष है, इसलिये वे तुम्हारे निमित्त ग्रहण न होंगे।।
- Matthew 23:19 मत्ती 23:19हे अन्धों, कौन बड़ा है, भेंट या वेदी: जिस से भेंट पवित्रा होता है?
- Titus 1:10 तीतुस 1:10क्योंकि बहुत से लोग निरंकुश बकवादी और धोखा देनेवाले हैं; विशेष करके खतनावालों में से।
- Isaiah 56:10 यशायाह 56:10उसके पहरूए अन्धे हैं, वे सब के सब अज्ञानी हैं, वे सब के सब गूंगे कुत्ते हैं जो भूंक नहीं सकते; वे स्वप्न देखनेवाले और लेटे रहकर सोते रहना चाहते हैं।
- Titus 1:7 तीतुस 1:7क्योंकि अध्यक्ष को परमेश्वर का भण्डारी होने के कारण निर्दोष होना चाहिए; न हठी, न क्रोधी, न पियक्कड़, न मारपीट करनेवाला, और न नीच कमाई का लोभी।
- Matthew 23:16–17 मत्ती 23:16–17हे अन्धे अगुवों, तुम पर हाय, जो कहते हो कि यदि कोई मन्दिर की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु यदि कोई मन्दिर के सोने की सौगन्ध खाए तो उस से बन्ध जाएगा। हे मूर्खो, और अन्धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्दिर जिस से सोना पवित्रा होता है?
- 1 Timothy 3:7 1 तीमुथियुस 3:7और बाहरवालों में भी उसका सुनाम हो ऐसा न हो कि निन्दित होकर शैतान के फंदे में फंस जाए।