Micah · chapter 7 · verse 1
Micah 7:1 in Hindi
हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जल के समान हो गया हूं जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, वा रही हुठ दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नही रहा।
Haay mujh par! Kyonki maim us jal ke samaan ho gayaa hoom jo dhoopakaal ke phal todane par, vaa rahee huth daakh beenane ke samay ke ant mem aa jaae, mujhe to pakkee anjeerom kee laalasaa thee, parantu khaane ke liye koee guchchhaa nahee rahaa.
Micah 7:1 in English
- King James Version (KJV)
- Woe is me! for I am as when they have gathered the summer fruits, as the grapegleanings of the vintage: [there is] no cluster to eat: my soul desired the firstripe fruit.
- World English Bible (WEB)
- Misery is mine! Indeed, I am like one who gathers the summer fruits, as gleanings of the vineyard. There is no cluster of grapes to eat. My soul desires to eat the early fig.
- American Standard Version (ASV)
- Woe is me! for I am as when they have gathered the summer fruits, as the grape gleanings of the vintage: there is no cluster to eat; my soul desireth the first-ripe fig.
- Bible in Basic English (BBE)
- Sorrow is mine! for I am as when they have got in the summer fruits, like the last of the grapes: there is nothing for food, not even an early fig for my desire.
- Darby Translation (DBY)
- Woe is me! for I am as when they have gathered the summer-fruits, as the grape-gleanings of the vintage. There is no cluster to eat; there is no early fruit [which] my soul desired.
- Webster's Bible (WBS)
- Woe is me! for I am as when they have gathered the summer fruits, as the grape-gleanings of the vintage: [there is] no cluster to eat: my soul desired the first ripe fruit.
- Young's Literal Translation (YLT)
- My woe [is] to me, for I have been As gatherings of summer-fruit, As gleanings of harvest, There is no cluster to eat, The first-ripe fruit desired hath my soul.
Read in context
- 1हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जल के समान हो गया हूं जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, वा रही हुठ दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नही रहा।
- 2भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा नहीं जन नहीं रहा; वे सब के सब हत्या के लिये घात लगाते, और जाल लगाकर अपने अपने भाई का आहेर करते हैं।
- 3वे अपने दोनों हाथों से मन लगाकर बुराई करते हैं; हाकिम घूस मांगता, और न्यायी घूस लेने को तैयार रहता है, और रईस अपने मन की दुष्टता वर्णन करता है; इसी प्रकार से वे सब मिलकर जालसाजी करते हैं।
Cross references
- Isaiah 28:4 यशायाह 28:4और उनकी भड़कीली सुन्दरता का मुर्झानेवाला फूल जो अति उपजाऊ तराई के सिरे पर है, वह ग्रीष्मकाल से पहिले पके अंजीर के समान होगा, जिसे देखनेवाला देखते ही हाथ में ले और निगल जाए।।
- Hosea 9:10 होशे 9:10मैं ने इस्राएल को ऐसा पाया जैसे कोई जंगल में दाख पाए; और तुमहारे पुरखाओं पर ऐसे दृष्टि की जैसे अंजीर के पहिले फलों पर दृष्टि की जाती है। परन्तु उन्हों ने पोर के बाल के पास जाकर अपने तई लज्जा का कारण होने के लिये अर्पण कर दिया, और जिस पर मोहित हो गए थे, वे उसी के समान घिनौने हो गए।
- Isaiah 24:13 यशायाह 24:13क्योंकि पृथ्वी पर देश देश के लोगों में ऐसा होगा जैसा कि जलपाइयों के झाड़ने के समय, वा दाख तोड़ने के बाद कोई कोई फल रह जाते हैं।।
- Isaiah 17:6 यशायाह 17:6तौभी जैसे जलपाई वृक्ष के झाड़ते समय कुछ फल रह जाते हैं, अर्थात् फुनगी पर दो- तीन फल, और फलवन्त डालियों में कहीं कहीं चार- पांच फल रह जाते हैं, वैसे ही उन में सिला बिनाई होगी, इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।।
- Isaiah 24:16 यशायाह 24:16पृथ्वी की छोर से हमें ऐसे गीत की ध्वनि सुन पड़ती है, कि धर्मी की महिमा और बड़ाई हो। परन्तु मैं ने कहा, हाय, हाय! मैं नाश हो गया, नाश! क्योंकि विश्वासघाती विश्वासघात करते, वे बड़ा ही विश्वासघात करते हैं।।
- Isaiah 6:5 यशायाह 6:5तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठवाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठवाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है!
- Psalm 120:5 भजन संहिता 120:5हाय, हाय, क्योंकि मुझे मेशेक में परदेशी होकर रहना पड़ा और केदार के तम्बुओं में बसना पड़ा है!
- Jeremiah 45:3 यिर्मयाह 45:3हे बारूक, तू ने कहा, हाय मुझ पर! क्योंकि यहोवा ने मुझे दु:ख पर दु:ख दिया है; मैं कराहते कराहते थक गया और मुझे कुछ चैन नहीं मिलता।
- Jeremiah 15:10 यिर्मयाह 15:10हे मेरी माता, मुझ पर हाय, कि तू ने मुझ ऐसे मनुष्य को उत्पन्न किया जो संसार भर से झगड़ा और वादविवाद करनेवाला ठहरा है! न तो मैं ने व्याज के लिये रूपये दिए, और न किसी से उधार लिए हैं, तौभी लोग मुझे कोसते हैं।
- Jeremiah 4:31 यिर्मयाह 4:31क्योंकि मैं ने ज़च्चा का शब्द, पहिलौठा जनती हुई स्त्री की सी चिल्लाहट सुनी है, यह सिरयोन की बेटी का शब्द है, जो हांफती और हाथ फैलाए हुए यों कहती है, हाय मुझ पर, मैं हत्यारों के हाथ पड़कर मूर्छित हो चली हूँ।