Romans · chapter 13 · verse 5
Romans 13:5 in Hindi
इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है।
Isaliye adheen rahanaa na keval us krodh se parantu dar se avashy hai, varan vivek bhee yahee gavaahee detaa hai.
Romans 13:5 in English
- King James Version (KJV)
- Wherefore [ye] must needs be subject, not only for wrath, but also for conscience sake.
- World English Bible (WEB)
- Therefore you need to be in subjection, not only because of the wrath, but also for conscience’ sake.
- American Standard Version (ASV)
- Wherefore [ye] must needs be in subjection, not only because of the wrath, but also for conscience’ sake.
- Bible in Basic English (BBE)
- So put yourselves under the authority, not for fear of wrath, but because you have the knowledge of what is right.
- Darby Translation (DBY)
- Wherefore it is necessary to be subject, not only on account of wrath, but also on account of conscience.
- Webster's Bible (WBS)
- Wherefore [ye] must needs be subject, not only for wrath, but also for conscience sake.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Wherefore it is necessary to be subject, not only because of the wrath, but also because of the conscience,
Read in context
- 3क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी;
- 4क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करनेवाले को दण्ड दे।
- 5इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है।
- 6इसलिये कर भी दो, क्योंकि परमशॆवर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं।
- 7इसलिये हर एक का हक्क चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।।
Cross references
- Acts 24:16 प्रेरितों के काम 24:16इस से मैं आप भी यतन करता हूं, कि परमेश्वर की, और मनुष्यों की ओर मेरा विवेक सदा निर्दोष रहे।
- Ecclesiastes 8:2 सभोपदेशक 8:2मैं तुझे सम्मति देता हूं कि परमेश्वर की शपथ के कारण राजा की आज्ञा मान।
- 1 Peter 2:19 1 पतरस 2:19क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार करके अन्याय से दुख उठाता हुआ क्लेश सहता है, तो यह सुहावना है।
- Titus 3:1–2 तीतुस 3:1–2लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्छे काम के लिये तैयार रह। किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें।
- 1 Samuel 24:5–6 1 शमूएल 24:5–6इसके पीछे दाऊद शाऊल के बागे की छोर काटने से पछताया। और अपने जनों से कहने लगा, यहोवा न करे कि मैं अपने प्रभु से जो यहोवा का अभिषिक्त है ऐसा काम करूं, कि उस पर हाथ चलाऊं, क्योंकि वह यहोवा का अभिषिक्त है।
- 1 Peter 2:13–15 1 पतरस 2:13–15प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। और हाकिमों के, क्योंकि वे कुकर्मियों को दण्ड देने और सुकर्मियों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्द कर दो।
- Hebrews 13:18 इब्रानियों 13:18हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं।
- 1 Peter 3:16 1 पतरस 3:16और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में वे जो तुम्हारे मसीही अच्छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्जित हों।