2 Corinthians · chapter 1 · verse 8
2 Corinthians 1:8 in Hindi
हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी समर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
He bhaaiyom, ham naheem chaahate ki tum hamaare us klesh se anajaan raho, jo aasiyaa mem ham par padaa, ki aise bhaaree bojh se dab gae the, jo hamaaree samarth se baahar thaa, yahaam tak ki ham jeevan se bhee haath dho baithe the.
2 Corinthians 1:8 in English
- King James Version (KJV)
- For we would not, brethren, have you ignorant of our trouble which came to us in Asia, that we were pressed out of measure, above strength, insomuch that we despaired even of life:
- World English Bible (WEB)
- For we don’t desire to have you uninformed, brothers, concerning our affliction which happened to us in Asia: that we were weighed down exceedingly, beyond our power, so much that we despaired even of life.
- American Standard Version (ASV)
- For we would not have you ignorant, brethren, concerning our affliction which befell [us] in Asia, that we were weighed down exceedingly, beyond our power, insomuch that we despaired even of life:
- Bible in Basic English (BBE)
- For it is our desire that you may not be without knowledge of our trouble which came on us in Asia, that the weight of it was very great, more than our power, so that it seemed that we had no hope even of life:
- Darby Translation (DBY)
- For we do not wish you to be ignorant, brethren, as to our tribulation which happened [to us] in Asia, that we were excessively pressed beyond [our] power, so as to despair even of living.
- Webster's Bible (WBS)
- For we would not, brethren, have you ignorant of our trouble which came to us in Asia, that we were pressed out of measure, above strength, so that we despaired even of life:
- Young's Literal Translation (YLT)
- For we do not wish you to be ignorant, brethren, of our tribulation that happened to us in Asia, that we were exceedingly burdened above [our] power, so that we despaired even of life;
Read in context
- 6यदि हम क्लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।
- 7और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्ति के भी सहभागी हो।
- 8हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी समर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।
- 9बरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, बरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।
- 10उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।
Cross references
- 2 Corinthians 4:7–12 2 कुरिन्थियों 4:7–12परन्तु महारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, बरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।
- 1 Corinthians 15:32 1 कुरिन्थियों 15:32यदि मैं मनुष्य की रीति पर इफिसुस में बन- पशुओं से लड़ा, तो मुझे क्या लाभ हुआ? यदि मुर्दे जिलाए नहीं जाएंगे, तो आओ, खाए- पीए, क्योंकि कल तो मर ही जाएंगे।
- 1 Corinthians 4:8 1 कुरिन्थियों 4:8तुम तो तृप्त हो चुके; तुम धनी हो चुके, तुम ने हमारे बिना राज्य किया; परन्तु भला होता कि तुम राज्य करते कि हम भी तुम्हारे साथ राज्य करते।
- 1 Corinthians 16:9 1 कुरिन्थियों 16:9क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।।
- Acts 19:23–35 प्रेरितों के काम 19:23–35उस समय में पन्थ के विषय में बड़ा हुल्लड़ हुआ। क्योंकि देमेत्रियुस नाम का ऐ सुनार अरतिमिस के चान्दी के मन्दिर बनवाकर कारीगरों को बहुत काम दिलाया करता था। उस ने उन को, और, और ऐसी वस्तुओं के कारीगरों को इकट्ठे करके कहा; हे मनुष्यो, तुम जानते हो, कि इस काम में हमें कितना धन मिलता है। और तुम देखते और सुनते हो, कि केवल इफिसुस ही में नहीं, बरन प्राय: सारे आसिया में यह कह कहकर इस पौलुस ने बहुत लोगों को समझाया और भरमाया भी है, कि जो हाथ की कारीगरी है, वे ईश्वर नहीं। और अब केवल इसी एक बात का ही डर नहीं, कि हमारे इस धन्धे की प्रतिष्ठा जाती रहेगी; बरन यह कि महान देवी अरतिमिस का मन्दिर तुच्छ समझा जाएगा और जिस सारा आसिया और जगत पूजता है उसका महत्व भी जाता रहेगा। वे यह सुनकर क्रोध से भर गए, और चिल्ला चिल्लाकर कहने लगे, "इफिसियों की अरतिमिस महान है!" और सारे नगर में बड़ा कोलाहल मच गया और लोगों ने गयुस और अरिस्तरखुस मकिदुनियों को जो पौलुस के संगी यात्री थे, पकड़ लिया, और एकचित्त होकर रंगशाला में दौड़ गए। जब पौलुस ने लोगों के पास भीतर जाना चाहा तो चेलों ने उसे जाने न दिया। आसिया के हाकिमों में से भी उसके कई मित्रों ने उसके पास कहला भेजा, और बिनती की, कि रंगशाला में जाकर जोखिम न उठाना। सो कोई कुछ चिल्लाया, और कोई कुछ; क्योंकि सभा में बड़ी गड़बड़ी हो रही थी, और बहुत से लोग तो यह जानते भी नहीं थे कि हम किस लिये इकट्ठे हुए हैं। तब उन्हों ने सिकन्दर को, जिस यहूदियों ने खड़ा किया था, भीड़ में से आगे बढ़ाया, और सिकन्दर हाथ से सैन करके लोगों के साम्हने उत्तर दिया चाहता था। परन्तु जब उन्हों ने जान लिया कि वह यहूदी है, तो सब के सब एक शब्द से कोई दो घंटे तक चिल्लाते रहे, कि इफसियों की अरतिमिस महान है। तब नगर के मन्त्री ने लोगों को शान्त करके कहा; हे इफिसियों, कौन नहीं जानता, कि इफिसियों का नगर बड़ी देवी अरतिमिस के मन्दिर, और ज्यूस की ओर से गिरी हुई मूरत का टहलुआ है।
- 1 Samuel 27:1 1 शमूएल 27:1और दाऊद सोचने लगा, अब मैं किसी न किसी दिन शाऊल के हाथ से नाश हो जाऊंगा; अब मेरे लिये उत्तम यह है कि मैं पलिश्तियों के देश में भाग जाऊं; तब शाऊल मेरे विषय निराश होगा, और मुझे इस्राएल के देश के किसी भाग में फिर न ढूढ़ेगा, यों मैं उसके हाथ से बच निकलूंगा।
- 1 Samuel 20:3 1 शमूएल 20:3फिर दाऊद ने शपथ खाकर कहा, तेरा पिता निश्चय जानता है कि तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर है; और वह सोचता होगा, कि योनातन इस बात को न जानने पाए, ऐसा न हो कि वह खेदित हो जाए। परन्तु यहोवा के जीवन की शपथ और तेरे जीवन की शपथ, नि:सन्देह, मेरे और मृत्यु के बीच डग ही भर का अन्तर है।
Original words (Greek)
- For · G1063γάρ gár
- would · G2309θέλω thélō
- not · G3756οὐ ou
- brethren · G80ἀδελφός adelphós
- have · G50ἀγνοέω agnoéō
- you · G5209ὑμᾶς hymâs
- ignorant · G50ἀγνοέω agnoéō
- of · G5228ὑπέρ hypér
- our · G2257ἡμῶν hēmōn
- trouble · G2347θλῖψις thlîpsis
- came · G1096γίνομαι gínomai
- us · G2254ἡμῖν hēmîn
- in · G1722ἐν en
- Asia · G773Ἀσία Asía
- that · G3754ὅτι hóti
- pressed · G916βαρέω baréō
- out · G2596κατά katá
- measure · G5236ὑπερβολή hyperbolḗ
- above · G5228ὑπέρ hypér
- strength · G1411δύναμις dýnamis
- that · G5620ὥστε hṓste
- we · G2248ἡμᾶς hēmâs
- despaired · G1820ἐξαπορέομαι exaporéomai
- even · G2532καί kaí
- life · G2198ζάω záō