Acts · chapter 14 · verse 2
Acts 14:2 in Hindi
परन्तु न माननेवाले यहूदियों ने अन्यजातियों के मन भाइयों के विरोध में उसकाए, और बिगाड़ कर दिए।
Parantu na maananevaale yahoodiyom ne anyajaatiyom ke man bhaaiyom ke virodh mem usakaae, aur bigaad kar die.
Acts 14:2 in English
- King James Version (KJV)
- But the unbelieving Jews stirred up the Gentiles, and made their minds evil affected against the brethren.
- World English Bible (WEB)
- But the disbelieving Jews stirred up and embittered the souls of the Gentiles against the brothers.
- American Standard Version (ASV)
- But the Jews that were disobedient stirred up the souls of the Gentiles, and made them evil affected against the brethren.
- Bible in Basic English (BBE)
- But those Jews who had not the faith, made the minds of the Gentiles bitter against the brothers.
- Darby Translation (DBY)
- But the Jews who did not believe stirred up the minds of [those of] the nations and made [them] evil-affected against the brethren.
- Webster's Bible (WBS)
- But the unbelieving Jews stirred up the Gentiles, and made their minds evil-affected against the brethren.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and the unbelieving Jews did stir up and made evil the souls of the nations against the brethren;
Read in context
- 1इकुनियुम में ऐसा हुआ कि वे यहूदियों की आराधनालय में साथ साथ गए, और ऐसी बातें की, कि यहूदियों और यूनानियों दोनों में से बहतों ने विश्वास किया।
- 2परन्तु न माननेवाले यहूदियों ने अन्यजातियों के मन भाइयों के विरोध में उसकाए, और बिगाड़ कर दिए।
- 3और वे बहुत दिन तक वहां रहे, और प्रभु के भरोसे पर हियाव से बातें करते थे: और वह उन के हाथों से चिन्ह और अद्भुत काम करवाकर अपने अनुग्रह के वचन पर गवाही देता था।
- 4परन्तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई थी; इस से कितने तो यहूदियों की ओर, और कितने प्रेरितों की ओर हो गए।
Cross references
- Acts 13:50 प्रेरितों के काम 13:50परन्तु यहूदियों ने भक्त और कुलीन स्त्रियों को और नगर के बड़े लोगों को उसकाया, और पौलुस और बरनबास पर उपद्रव करवाकर उन्हें अपने सिवानों से निकाल दिया।
- Acts 14:19 प्रेरितों के काम 14:19परन्तु कितने यहूदियों ने अन्ताकिया और इकुनियम से आकर लोगों को अपनी ओर कर लिया, और पौलुस को पत्थरवाह किया, और मरा समझकर उसे नगर के बाहर घसीट ले गए।
- Acts 17:5 प्रेरितों के काम 17:5परन्तु यहूदियों ने डाह से भरकर बजारू लोगों में से कई दुष्ट मनुष्यों को अपने साथ में लिया, और भीड़ लगाकर नगर में हुल्लड़ मचाने लगे, और यासोन के घर पर चढ़ाई करके उन्हें लोगों के साम्हने लाना चाहा।
- Acts 13:45 प्रेरितों के काम 13:45परन्तु यहूदी भीड़ को देखकर डाह से भर गए, और निन्दा करते हुए पौलुस की बातों के विरोध में बोलने लगे।
- Acts 21:27–30 प्रेरितों के काम 21:27–30जब वे सात दिन पूरे होने पर थे, तो आसिया के यहूदियों ने पौलुस को मन्दिर में देखकर सब लोगों को उसकाया, और यों चिल्लाकर उस को पकड़ लिया। कि हे इस्त्राएलियों, सहायता करो; यह वही मनुष्य है, जो लोगों के, और व्यवस्था के, और इस स्थान के विरोध में हर जगह सब लोगों को सिखाता है, यहां तक कि युनानियों को भी मन्दिर में लाकर उस ने इस पवित्रा स्थान को अपवित्रा किया है। उन्हों ने तो इस से पहिले त्रुफिमुस इफिसी को उसके साथ नगर में देखा था, और समझते थे, कि पौलुस उसे मन्दिर में ले आया है। तब सारे नगर में कोलाहल मच गया, और लोग दौड़कर इकट्ठे हुए, और पौलुस को पकड़कर मन्दिर के बाहर घसीट लाए, और तुरन्त द्वार बन्द किए गए।
- Acts 17:13 प्रेरितों के काम 17:13किन्तु जब थिस्सलुनीके के यहूदी जान गए, कि पौलुस बिरीया में भी परमेश्वर का वचन सुनाता है, तो वहां भी आकर लोगों को उसकाने और हलचल मचाने लगे।
- 1 Thessalonians 2:15–16 1 थिस्सलुनीकियों 2:15–16जिन्हों ने प्रभु यीशु को और भविष्यद्वक्ताओं को भी मार डाला और हम को सताया, और परमेश्वर उन से प्रसन्न नहीं; और वे सब मनुष्यों को विरोध करते हैं। और वे अन्यजातियों से उन के उद्धार के लिये बातें करने से हमें रोकते हैं, कि सदा अपने पापों का नपुआ भरते रहें; पर उन पर भयानक प्रकोप आ पहुंचा है।।
- Mark 15:10–11 मरकुस 15:10–11क्योंकि वह जानता था, कि महायाजकों ने उसे डाह से पकड़वाया था। परन्तु महायाजकों ने लोगों को उभारा, कि वह बरअब्बा ही को उन के लिये छोड़ दे।
- Acts 18:12 प्रेरितों के काम 18:12जब गल्लियो अखाया देश का हाकिम था तो यहूदी लोग एका करके पौलुस पर चढ़ आए, और उसे न्याय आसन के साम्हने लाकर, कहने लगे।
- John 3:36 यूहन्ना 3:36जो पुत्रा पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्रा की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है।।