Acts · chapter 28 · verse 4
Acts 28:4 in Hindi
जब उन जंगलियों ने सांप को उसके हाथ में लटके हुए देखा, तो आपस में कहा; सचमुच यह मनुष्य हत्यारा है, कि यद्यपि समुद्र से बच गया, तौभी न्याय ने जीवित रहने न दिया।
Jab un jangaliyom ne saamp ko usake haath mem latake hue dekhaa, to aapas mem kahaa; sachamuch yah manushy hatyaaraa hai, ki yadyapi samudr se bach gayaa, taubhee nyaay ne jeevit rahane na diyaa.
Acts 28:4 in English
- King James Version (KJV)
- And when the barbarians saw the [venomous] beast hang on his hand, they said among themselves, No doubt this man is a murderer, whom, though he hath escaped the sea, yet vengeance suffereth not to live.
- World English Bible (WEB)
- When the natives saw the creature hanging from his hand, they said to one another, “No doubt this man is a murderer, whom, though he has escaped from the sea, yet Justice has not allowed to live.”
- American Standard Version (ASV)
- And when the barbarians saw the [venomous] creature hanging from his hand, they said one to another, No doubt this man is a murderer, whom, though he hath escaped from the sea, yet Justice hath not suffered to live.
- Bible in Basic English (BBE)
- And when the people saw it hanging on his hand, they said to one another, Without doubt this man has put someone to death, and though he has got safely away from the sea, God will not let him go on living.
- Darby Translation (DBY)
- And when the barbarians saw the beast hanging from his hand, they said to one another, This man is certainly a murderer, whom, [though] saved out of the sea, Nemesis has not allowed to live.
- Webster's Bible (WBS)
- And when the barbarians saw the animal hang on his hand, they said among themselves, No doubt this man is a murderer, whom, though he hath escaped the sea, yet vengeance suffereth not to live.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And when the foreigners saw the beast hanging from his hand, they said unto one another, 'Certainly this man is a murderer, whom, having been saved out of the sea, the justice did not suffer to live;'
Read in context
- 2और उन जंगली लोगों ने हम पर अनोखी कृपा की; क्योंकि मेंह के कारण जो बरस रहा था और जाड़े के कारण उन्हों ने आग सुलगाकर हम सब को ठहराया।
- 3जब पौलुस ने लकड़ियों का गट्ठा बटोरकर आग पर रखा, तो एक सांप आंच पाकर निकला और उसके हाथ से लिपट गया।
- 4जब उन जंगलियों ने सांप को उसके हाथ में लटके हुए देखा, तो आपस में कहा; सचमुच यह मनुष्य हत्यारा है, कि यद्यपि समुद्र से बच गया, तौभी न्याय ने जीवित रहने न दिया।
- 5तब उस ने सांप को आग में झटक दिया, और उसे कुछ हानि न पहुंची।
- 6परन्तु वे बाट जोहते थे, कि वह सूज जाएगा, या एकाएक गिरके मर जाएगा, परन्तु जब वे बहुत देर तक देखते रहे, और देखा, कि उसका कुछ भी नहीं बिगड़ा, तो और ही विचार कर कहा; यह तो कोई देवता है।।
Cross references
- Luke 13:2 लूका 13:2यह सुन उस ने उन से उत्तर में यह कहा, क्या तुम समझते हो, कि ये गलीली, और सब गलीलियों से पापी थे कि उन पर ऐसी विपत्ति पड़ी?
- Luke 13:4 लूका 13:4या क्या तुम समझते हो, कि वे अठारह जन जिन पर शीलोह का गुम्मट गिरा, और वे दब कर मर गए: यरूशलेम के और सब रहनेवालों से अधिक अपराधी थे?
- Acts 28:2 प्रेरितों के काम 28:2और उन जंगली लोगों ने हम पर अनोखी कृपा की; क्योंकि मेंह के कारण जो बरस रहा था और जाड़े के कारण उन्हों ने आग सुलगाकर हम सब को ठहराया।
- John 7:24 यूहन्ना 7:24मुंह देखकर न्याय न चुकाओ, परन्तु ठीक ठीक न्याय चुकाओ।।
- Acts 28:5 प्रेरितों के काम 28:5तब उस ने सांप को आग में झटक दिया, और उसे कुछ हानि न पहुंची।
- Matthew 23:35 मत्ती 23:35जिस से धर्मी हाबिल से लेकर बिरिक्याह के पुत्रा जकरयाह तक, जिसे तुम ने मन्दिर और वेदी के बीच में मार डाला था, जितने धर्मियों का लोहू पृथ्वी पर बहाया गया है, वह सब तुम्हारे सिर पर पड़ेगा।
- John 9:1–2 यूहन्ना 9:1–2फिर जाते हुए उस ने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म का अन्धा था। और उसके चेलों ने उस से पूछा, हे रब्बी, किस ने पाप किया था कि यह अन्धा जन्मा, इस मनुष्य ने, या उसके माता पिता ने?
- Isaiah 43:20 यशायाह 43:20गीदड़ और शुतर्मुर्ग आदि जंगली जन्तु मेरी महिमा करेंगे; क्योंकि मैं अपनी चुनी हुई प्रजा के पीने के लिये जंगल में जल और निर्जल देश में नदियां बहाऊंगा।
- Revelation 21:8 प्रकाशितवाक्य 21:8पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।।
- Genesis 9:5–6 उत्पत्ति 9:5–6और निश्चय मैं तुम्हारा लोहू अर्थात् प्राण का पलटा लूंगा: सब पशुओं, और मनुष्यों, दोनों से मैं उसे लूंगा: मनुष्य के प्राण का पलटा मै एक एक के भाई बन्धु से लूंगा। जो कोई मनुष्य का लोहू बहाएगा उसका लोहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा क्योंकि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार बनाया है।
- Numbers 35:31–34 गिनती 35:31–34और जो खूनी प्राणदण्ड के योग्य ठहरे उस से प्राणदण्ड के बदले में जुरमाना न लेना; वह अवश्य मार डाला जाए। और जो किसी शरणस्थान में भागा हो उसके लिये भी इस मतलब से जुरमाना न लेना, कि वह याजक के मरने से पहिले फिर अपने देश मे रहने को लौटने पाएं। इसलिये जिस देश में तुम रहोगे उसको अशुद्ध न करना; खून से तो देश अशुद्ध हो जाता है, और जिस देश में जब खून किया जाए तब केवल खूनी के लोहू बहाने ही से उस देश का प्रायश्चित्त हो सकता है। जिस देश में तुम निवास करोगे उसके बीच मै रहूंगा, उसको अशुद्ध न करना; मैं यहोवा तो इस्त्राएलियों के बीच रहता हूं।।
- Zephaniah 2:15 सपन्याह 2:15यह वही नगरी है, जो मगन रहती और निडर बैठी रहती थी, औश्र सोचती थी कि मैं ही हूं, और मुझे छोड़ कोई है ही नहीं। परन्तु अब यह उजाड़ और वनपशुओं के बैठने का स्थान बन गया है, यहां तक कि जो कोई इसके पास होकर चले, वह ताली बजाएगा और हाथ हिलाएगा।
Original words (Greek)
- And · G1161δέ dé
- when · G5613ὡς hōs
- barbarians · G915βάρβαρος bárbaros
- saw · G1492εἴδω eídō
- the · G2342θηρίον thēríon
- beast · G2342θηρίον thēríon
- hang · G2910κρεμάννυμι kremánnymi
- on · G1537ἐκ ek
- his · G846αὐτός autós
- hand · G5495χείρ cheír
- said · G3004λέγω légō
- among · G4314πρός prós
- themselves · G240ἀλλήλων allḗlōn
- doubt · G3843πάντως pántōs
- this · G3778οὗτος hoûtos
- man · G444ἄνθρωπος ánthrōpos
- is · G2076ἐστί estí
- murderer · G5406φονεύς phoneús
- whom · G3739ὅς hós
- escaped · G1295διασώζω diasṓzō
- the · G1537ἐκ ek
- sea · G2281θάλασσα thálassa
- vengeance · G1349δίκη díkē
- suffereth · G1439ἐάω eáō
- not · G3756οὐ ou
- live · G2198ζάω záō