Deuteronomy · chapter 11 · verse 29
Deuteronomy 11:29 in Hindi
और जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को उस देश में पहुंचाए जिसके अधिकारी होने को तू जाने पर है, तब आशीष गरीज्जीम पर्वत पर से और शाप एबाल पर्वत पर से सुनाना।
Aur jab teraa parameshvar yahovaa tujh ko us desh mem pahunchaae jisake adhikaaree hone ko too jaane par hai, tab aasheesh gareejjeem parvat par se aur shaap ebaal parvat par se sunaanaa.
Deuteronomy 11:29 in English
- King James Version (KJV)
- And it shall come to pass, when the LORD thy God hath brought thee in unto the land whither thou goest to possess it, that thou shalt put the blessing upon mount Gerizim, and the curse upon mount Ebal.
- World English Bible (WEB)
- It shall happen, when the LORD your God brings you into the land that you go to possess, that you shall set the blessing on Mount Gerizim, and the curse on Mount Ebal.
- American Standard Version (ASV)
- And it shall come to pass, when Jehovah thy God shall bring thee into the land whither thou goest to possess it, that thou shalt set the blessing upon mount Gerizim, and the curse upon mount Ebal.
- Bible in Basic English (BBE)
- And when the Lord your God has taken you into the land of your heritage, you are to put the blessing on Mount Gerizim and the curse on Mount Ebal.
- Darby Translation (DBY)
- And it shall come to pass, when Jehovah thy God hath brought thee into the land whither thou enterest in to possess it, that thou shalt put the blessing upon mount Gerizim, and the curse upon mount Ebal.
- Webster's Bible (WBS)
- And it shall come to pass when the LORD thy God hath brought thee in to the land whither thou goest to possess it, that thou shalt put the blessing upon mount Gerizim, and the curse upon mount Ebal.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And it hath been, when Jehovah thy God doth bring thee in unto the land whither thou art going in to possess it, that thou hast given the blessing on mount Gerizim, and the reviling on mount Ebal;
Read in context
- 27अर्थात् यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की इन आज्ञाओं को जो मैं आज तुम्हे सुनाता हूं मानो, तो तुम पर आशीष होगी,
- 28और यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं को नहीं मानोगे, और जिस मार्ग की आज्ञा मैं आज सुनाता हूं उसे तजकर दूसरे देवताओं के पीछे हो लोगे जिन्हें तुम नहीं जानते हो, तो तुम पर शाप पडेग़ा।
- 29और जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को उस देश में पहुंचाए जिसके अधिकारी होने को तू जाने पर है, तब आशीष गरीज्जीम पर्वत पर से और शाप एबाल पर्वत पर से सुनाना।
- 30क्या वे यरदन के पार, सूर्य के अस्त होने की ओर, अराबा के निवासी कनानियों के देश में, गिल्गाल के साम्हने, मोरे के बांज वृक्षों के पास नहीं है?
- 31तुम तो यरदन पार इसी लिये जाने पर हो, कि जो देश तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उसके अधिकारी होकर उस में निवास करोगे;
Cross references
- Joshua 8:30–35 यहोशू 8:30–35तब यहोशू ने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिये एबाल पर्वत पर एक वेदी बनवाई, जैसा यहोवा के दास मूसा ने इस्राएलियों को आज्ञा दी थी, और जैसा मूसा की व्यवस्था की पुस्तक में लिखा है, उस ने समूचे पत्थरों की एक वेदी बनवाई जिस पर औजार नहीं चलाया गया था। और उस पर उन्हों ने यहोवा के लिये होम- बलि चढ़ाए, और मेलबलि किए। उसी स्थान पर यहोशू ने इस्राएलियों के साम्हने उन पत्थरों के ऊपर मूसा की व्यवस्था, जो उस ने लिखी थी, उसकी नकल कराई। और वे, क्या देशी क्या परदेशी, सारे इस्राएली अपने वृद्ध लोगों, सरदारों, और न्यायियों समेत यहोवा की वाचा का सन्दूक उठानेवाले लेवीय याजकों के साम्हने उस सन्दूक के इधर उधर खड़े हुए, अर्थात् आधे लोग तो गिरिज्जीम पर्वत के, और आधे एबाल पर्वत के साम्हने खड़े हुए, जैसा कि यहोवा के दास मूसा ने पहिले आज्ञा दी थी, कि इस्राएली प्रजा को आर्शीवाद दिए जाएं। उसके बाद उस ने आशीष और शाप की व्यवस्था के सारे वचन, जैसे जैसे व्यवस्था की पुस्तक में लिखे हुए हैं, वैसे वैसे पढ़ पढ़कर सुना दिए। जितनी बातों की मूसा ने आज्ञा दी थी, उन में से कोई ऐसी बात नहीं रह गई जो यहोशू ने इस्राएली की सारी सभा, और स्त्रियों, और बाल- बच्चों, और उनके साथ रहनेवाले परदेशी लोगों के साम्हने भी पढ़कर न सुनाई।।
- Deuteronomy 27:12–26 व्यवस्थाविवरण 27:12–26कि जब तुम यरदन पार हो जाओ तब शिमौन, लेवी, यहूदा, इस्साकार, युसुफ, और बिन्यामीन, ये गिरिज्जीम पहाड़ पर खडे होकर आशीर्वाद सुनाएं। और रूबेन, गाद, आशेर, जबूलून, दान, और नप्ताली, ये एबाल पहाड़ पर खड़े होके शाप सुनाएं। तब लेवीय लोग सब इस्राएली पुरूषों से पुकारके कहें, कि शापित हो वह मनुष्य जो कोई मूर्त्ति कारीगर से खुदवाकर वा ढलवाकर निराले स्थान में स्थापन करे, क्योंकि इस से यहोवा को घृणा लगती है। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अपने पिता वा माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो किसी दूसरे के सिवाने को हटाए। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अन्धे को मार्ग से भटका दे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो परेदशी, अनाथ, वा विधवा का न्याय बिगाड़े। तब सब लोग कहें आमीन।। शापित हो वह जो अपनी सौतेली माता से कुकर्म करे, क्योंकि वह अपने पिता का ओढ़ना उघारता है। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो किसी प्रकार के पशु से कुकर्म करे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अपनी बहिन, चाहे सगी हो चाहे सौतेली, उस से कुकर्म करे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अपनी सास के संग कुकर्म करे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो किसी को छिपकर मारे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो निर्दोष जन के मार डालने के लिये धन ले। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो इस व्यवस्था के वचनों को मानकर पूरा न करे। तब सब लोग कहें, आमीन।।
Original words (Hebrew)
- God · H430אֱלֹהִים ʼĕlôhîym
- in · H935בּוֹא bôwʼ
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- goest · H935בּוֹא bôwʼ
- possess · H3423יָרַשׁ yârash
- put · H5414נָתַן nâthan
- blessing · H1293בְּרָכָה Bᵉrâkâh
- mount · H2022הַר har
- Gerizim · H1630גְּרִזִים Gᵉrizîym
- curse · H7045קְלָלָה qᵉlâlâh
- mount · H2022הַר har
- Ebal · H5858עֵיבָל ʻÊybâl