Deuteronomy · chapter 34 · verse 7
Deuteronomy 34:7 in Hindi
मूसा अपनी मृत्यु के समय एक सौ बीस वर्ष का था; परन्तु न तो उसकी आंखें धुंधली पड़ीं, और न उसका पौरूष घटा था।
Moosaa apanee mrutyu ke samay ek sau bees varsh kaa thaa; parantu na to usakee aankhem dhundhalee padeem, aur na usakaa pauroosh ghataa thaa.
Deuteronomy 34:7 in English
- King James Version (KJV)
- And Moses [was] an hundred and twenty years old when he died: his eye was not dim, nor his natural force abated.
- World English Bible (WEB)
- Moses was one hundred twenty years old when he died. His eye was not dim, nor his strength gone.
- American Standard Version (ASV)
- And Moses was a hundred and twenty years old when he died: his eye was not dim, nor his natural force abated.
- Bible in Basic English (BBE)
- And Moses at his death was a hundred and twenty years old: his eye had not become clouded, or his natural force become feeble.
- Darby Translation (DBY)
- And Moses was a hundred and twenty years old when he died; his eye was not dim, nor his natural force abated.
- Webster's Bible (WBS)
- And Moses [was] a hundred and twenty years old when he died: his eye was not dim, nor his natural force abated.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Moses [is] a son of a hundred and twenty years when he dieth; his eye hath not become dim, nor hath his moisture fled.
Read in context
- 5तब यहोवा के कहने के अनुसार उसका दास मूसा वहीं मोआब देश में मर गया,
- 6और उस ने उसे मोआब के देश में बेतपोर के साम्हने एक तराई में मिट्टी दी; और आज के दिन तक कोई नहीं जानता कि उसकी कब्र कहां है।
- 7मूसा अपनी मृत्यु के समय एक सौ बीस वर्ष का था; परन्तु न तो उसकी आंखें धुंधली पड़ीं, और न उसका पौरूष घटा था।
- 8और इस्राएली मोआब के अराबा में मूसा के लिये तीस दिन तक रोते रहे; तक मूसा के लिये रोने और विलाप करने के दिन पूरे हुए।
- 9और नून का पुत्रा यहोशू बुद्धिमानी की आत्मा से परिपूर्ण था, क्योंकि मूसा ने अपने हाथ उस पर रखे थे; और इस्राएली उस आज्ञा के अनुसार जो याहोवा ने मूसा को दी थी उसकी मानते रहे।
Cross references
- Deuteronomy 31:2 व्यवस्थाविवरण 31:2और उस ने उन से यह भी कहा, कि आज मैं एक सौ बीच वर्ष का हूं; और अब मैं चल फिर नहीं सकता; क्योंकि यहोवा ने मुझ से कहा है, कि तू इस यरदन पार नहीं जाने पाएगा।
- Joshua 14:10–11 यहोशू 14:10–11और अब देख, जब से यहोवा ने मूसा से यह वचन कहा था तब से पैतालीस वर्ष हो चुके हैं, जिन में इस्राएली जंगल में घूमते फिरते रहे; उन में यहोवा ने अपने कहने के अनुसार मुझे जीवित रखा है; और अब मैं पचासी वर्ष का हूं। जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने, वा भीतर बाहर आने जाने के लिये जितनी उस समय मुझ मे सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है।
- Genesis 27:1 उत्पत्ति 27:1जब इसहाक बूढ़ा हो गया, और उसकी आंखें ऐसी धुंधली पड़ गई, कि उसको सूझता न था, तब उस ने अपने जेठे पुत्रा एसाव को बुलाकर कहा, हे मेरे पुत्रा; उस ने कहा, क्या आज्ञा।
- Genesis 48:10 उत्पत्ति 48:10इस्राएल की आंखे बुढ़ापे के कारण धुन्धली हो गई थीं, यहां तक कि उसे कम सूझता था। तब यूसुफ उन्हें उनके पास ले गया; और उस ने उन्हें चूमकर गले लगा लिया।
- Acts 7:36 प्रेरितों के काम 7:36यही व्यक्ति मिसर और लाल समुद्र और जंगल में चालीस वर्ष तक अद्भुत काम और चिन्ह दिखा दिखाकर उन्हें निकाल लाया।
- Acts 7:30 प्रेरितों के काम 7:30जब पूरे चालीस वर्ष बीत गए, तो एक स्वर्ग दूत ने सीनै पहाड़ के जंगल में उसे जलती हुई झाड़ी की ज्वाला में दर्शन दिया।
- Acts 7:23 प्रेरितों के काम 7:23जब वह चालीस वर्ष का हुआ, तो उसके मन में आया कि मैं अपने इस्त्राएली भाइयों से भेंट करूं।