Exodus · chapter 21 · verse 26
Exodus 21:26 in Hindi
जब कोई अपने दास वा दासी की आंख पर ऐसा मारे कि फूट जाए, तो वह उसकी आंख की सन्ती उसे स्वतंत्रा करके जाने दे।
Jab koee apane daas vaa daasee kee aankh par aisaa maare ki phoot jaae, to vah usakee aankh kee santee use svatantraa karake jaane de.
Exodus 21:26 in English
- King James Version (KJV)
- And if a man smite the eye of his servant, or the eye of his maid, that it perish; he shall let him go free for his eye’s sake.
- World English Bible (WEB)
- “If a man strikes his servant’s eye, or his maid’s eye, and destroys it, he shall let him go free for his eye’s sake.
- American Standard Version (ASV)
- And if a man smite the eye of his servant, or the eye of his maid, and destroy it; he shall let him go free for his eye’s sake.
- Bible in Basic English (BBE)
- If a man gives his man-servant or his woman-servant a blow in the eye, causing its destruction, he is to let him go free on account of the damage to his eye.
- Darby Translation (DBY)
- And if a man strike the eye of his bondman or the eye of his handmaid, and it be marred, he shall let him go for his eye.
- Webster's Bible (WBS)
- And if a man shall smite the eye of his servant, or the eye of his maid, that it shall perish; he shall let him go free for his eye's sake.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And when a man smiteth the eye of his man-servant, or the eye of his handmaid, and hath destroyed it, as a freeman he doth send him away for his eye;
Read in context
- 24और आंख की सन्ती आंख का, और दांत की सन्ती दांत का, और हाथ की सन्ती हाथ का, और पांव की सन्ती पांव का,
- 25और दाग की सन्ती दाग का, और घाव की सन्ती घाव का, और मार की सन्ती मार का दण्ड हो।।
- 26जब कोई अपने दास वा दासी की आंख पर ऐसा मारे कि फूट जाए, तो वह उसकी आंख की सन्ती उसे स्वतंत्रा करके जाने दे।
- 27और यदि वह अपने दास वा दासी को मारके उसका दांत तोड़ डाले, तो वह उसके दांत की सन्ती उसे स्वतंत्रा करके जाने दे।।
- 28यदि बैल किसी पुरूष वा स्त्री को ऐसा सींग मारे कि वह मर जाए, तो वह बैल तो निश्चय पत्थरवाह करके मार डाला जाए, और उसका मांस खाया न जाए; परन्तु बैल का स्वामी निर्दोष ठहरे।
Cross references
- Psalm 9:12 भजन संहिता 9:12क्योंकि खून का पलटा लेनेवाला उनको स्मरण करता है; वह दीन लोगों की दोहाई को भूलता।।
- Proverbs 22:22–23 नीतिवचन 22:22–23कंगाल पर इस कारण अन्धेर न करता कि वह कंगाल है, और न दीन जन को कचहरी में पीसना; क्योंकि यहोवा उनका मुक मा लड़ेगा, और जो लोग उनका धन हर लेते हैं, उनका प्राण भी वह हर लेगा।
- Ephesians 6:9 इफिसियों 6:9और हे स्वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दानों का स्वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।।
- Nehemiah 5:5 नहेमायाह 5:5परन्तु हमारा और हमारे भाइयों का शरीर और हमारे और उनके लड़केबाले एक ही समान हैं, तौभी हम अपने बेटे- बेटियों को दास बनाते हैं; वरन हमारी कोई कोई बेटी दासी भी हो चुकी हैं; और हमारा कुछ बस नहीं जलता, क्योंकि हमारे खेत और दाख की बारियां औरों के हाथ पड़ी हैं।
- Job 31:13–15 अय्यूब 31:13–15जब मेरे दास वा दासी ने मुझ से झगड़ा किया, तब यदि मैं ने उनका हक मार दिया हो; तो जब ईश्वर उठ खड़ा होगा, तब मैं क्या करूंगा? और जब वह आएगा तब मैं क्या उत्तर दूंगा? क्या वह उसका बनानेवाला नहीं जिस ने मुझे गर्भ में बनाया? क्या एक ही ने हम दोनों की सूरत गर्भ में न रची थी?
- Colossians 4:1 कुलुस्सियों 4:1हे स्वामियों, अपने अपने दासों के साथ न्याय और ठीक ठीक व्यवहार करो, यह समझकर कि स्वर्ग में तुम्हारा भी एक स्वामी है।।
- Exodus 21:20 निर्गमन 21:20यदि कोई अपने दास वा दासी को सोंटे से ऐसा मारे कि वह उसके मारने से मर जाए, तब तो उसको निश्चय दण्ड दिया जाए।
- Psalm 72:12–14 भजन संहिता 72:12–14क्योंकि वह दोहाई देनेवाले दरिद्र को, और दु:खी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा। वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा, और दरिद्रों के प्राणो को बचाएगा। वह उनके प्राणों को अन्धेर और उपद्रव से छुड़ा लेगा; और उनका लोहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा।।
- Psalm 10:18 भजन संहिता 10:18कि अनाथ और पिसे हुए का न्याय करे, ताकि मनुष्य जो मिट्टी से बना है फिर भय दिखाने न पाए।।
- Deuteronomy 16:19 व्यवस्थाविवरण 16:19तुम न्याय न बिगाड़ना; तू न तो पक्षपात करना; और न तो घूस लेना, क्योंकि घूस बुद्धिमान की आंखें अन्धी कर देती है, और धर्मियों की बातें पलट देती है।
- Psalm 10:14 भजन संहिता 10:14परमेश्वर को दुष्ट क्यों तुच्छ जानता है, और अपने मन में कहता है कि तू लेखा न लेगा?