Ezekiel · chapter 47 · verse 5
Ezekiel 47:5 in Hindi
तब फिर उस ने एक हजार हाथ मापे, और ऐसी नदी हो गई जिसके पार मैं न जा सका, क्योंकि जल बढ़कर तैरने के योग्य था; अर्थात् ऐसी नदी थी जिसके पार कोई न जा सकता था।
Tab phir us ne ek hajaar haath maape, aur aisee nadee ho gaee jisake paar maim na jaa sakaa, kyonki jal badhakar tairane ke yogy thaa; arthaat aisee nadee thee jisake paar koee na jaa sakataa thaa.
Ezekiel 47:5 in English
- King James Version (KJV)
- Afterward he measured a thousand; [and it was] a river that I could not pass over: for the waters were risen, waters to swim in, a river that could not be passed over.
- World English Bible (WEB)
- Afterward he measured one thousand; and it was a river that I could not pass through, for the waters had risen, waters to swim in, a river that could not be walked through.
- American Standard Version (ASV)
- Afterward he measured a thousand; [and it was] a river that I could not pass through; for the waters were risen, waters to swim in, a river that could not be passed through.
- Bible in Basic English (BBE)
- Again, after his measuring a thousand, it became a river which it was not possible to go through: for the waters had become deep enough for swimming, a river it was not possible to go through.
- Darby Translation (DBY)
- And he measured a thousand: it was a river that I could not pass through, for the waters were risen, waters to swim in, a river that could not be passed through.
- Webster's Bible (WBS)
- Afterward he measured a thousand; [and it was] a river that I could not pass over: for the waters had risen, waters to swim in, a river that could not be passed over.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he measureth a thousand — a stream that I am not able to pass over; for risen have the waters — waters to swim in — a stream that is not passed over.
Read in context
- 3जब वह पुरूष हाथ में मापने की डोरी लिए हुए पूर्व ओर निकला, तब उस ने भवन से लेकर, हजार हाथ तक उस सोते को मापा, और मुझे जल में से चलाया, और जल टखनों तक था।
- 4उस ने फिर हजार हाथ मापकर मुझे जल में से चलाया, और जल घुटनों तक था, फिर ओर हजार हाथ मापकर मुझे जल में से चलाया, और जल कमर तक था।
- 5तब फिर उस ने एक हजार हाथ मापे, और ऐसी नदी हो गई जिसके पार मैं न जा सका, क्योंकि जल बढ़कर तैरने के योग्य था; अर्थात् ऐसी नदी थी जिसके पार कोई न जा सकता था।
- 6तब उस ने मुझ से पूछा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू ने यह देखा है? फिर उस ने मुझे नदी के तीर लौटाकर पहुंचा दिया।
- 7लौटकर मैं ने क्या देखा, कि नदी के दोनों तीरों पर बहुत से वृक्ष हैं।
Cross references
- Isaiah 11:9 यशायाह 11:9मेरे सारे पवित्रा पर्वत पर न तो कोई दु:ख देगा और न हानि करेगा; क्योंकि पृथ्वी यहोवा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसा जल समुद्र में भरा रहता है।।
- Habakkuk 2:14 हबक्कूक 2:14क्योंकि पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भर जाता है।।
- Revelation 7:9 प्रकाशितवाक्य 7:9इस के बाद मैं ने दृष्टि की, और देखो, हर एक जाति, और कुल, और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था श्वेत वस्त्रा पहिने, और अपने हाथों में खजूर की डालियां लिये हुए सिंहासन के साम्हने और मेम्ने के साम्हने खड़ी है।
- Matthew 13:31–32 मत्ती 13:31–32उस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया; कि स्वर्ग का राज्य राई के एक दाने के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने लेकर अपने खेत में बो दिया। वह सब बीजों से छोटा तो है पर जब बढ़ जाता है तब सब साग पात से बड़ा होता है; और ऐसा पेड़ हो जाता है, कि आकाश के पक्षी आकर उस की डालियों पर बसेरा करते हैं।।
- Daniel 2:34–35 दानिय्येल 2:34–35फिर देखते देखते, तू ने क्या देखा, कि एक पत्थर ने, बिना किसी के खोदे, आप ही आप उखड़ कर उस मूर्ति के पांवों पर लगकर जो लोहे और मिट्टी के थे, उन को चूर चूर कर डाला। तब लोहा, मिट्टी, पीतल, चान्दी और सोना भी सब चूर चूर हो गए, और धूपकाल में खलिहानों के भूसे की नाईं हवा से ऐसे उड़ गए कि उनका कहीं पता न रहा; और वह पत्थर जो मूर्ति पर लगा था, वह बड़ा पहाड़ बन कर सारी पृथ्वी में फैल गया॥
- Revelation 11:15 प्रकाशितवाक्य 11:15और जब सातवें दूत ने तुरही फूंकी, तो स्वर्ग में इस विषय के बड़े बड़े शब्द होने लगे कि जगत का राज्य हमारे प्रभु का, और उसके मसीह का हो गया।
- Revelation 20:2–4 प्रकाशितवाक्य 20:2–4और उस ने उस अजगर, अर्थात् पुराने सांप को, जो इब्लीस और शैतान है; पकड़ के हजार वर्ष के लिये बान्ध दिया। और उसे अथाह कुंड में डालकर बन्द कर दिया और उस पर मुहर कर दी, कि वह हजार वर्ष के पूरे होने तक जाति जाति के लोगों को फिर न भरमाए; इस के बाद अवश्य है, कि थोड़ी देर के लिये फिर खोला जाए।। फिर मैं ने सिंहासन देखे, और उन पर लोग बैठ गए, और उन को न्याय करने का अधिकार दिया गया; और उन की आत्माओं को भी देखा, जिन के सिर यीशु की गवाही देने और परमेश्वर के वचन के कारण काटे गए थे; और जिन्हों ने न उस पशु की, और न उस की मूरत की पूजा की थी, और न उस की छाप अपने माथे और हाथों पर ली थी; वे जीवित होकर मसीह के साथ हजार वर्ष तक राज्य करते रहे।