Jeremiah · chapter 16 · verse 8
Jeremiah 16:8 in Hindi
तू जेवनार के घर में इनके साथ खाने- पीने के लिये न जाना।
Too jevanaar ke ghar mem inake saath khaane- peene ke liye na jaanaa.
Jeremiah 16:8 in English
- King James Version (KJV)
- Thou shalt not also go into the house of feasting, to sit with them to eat and to drink.
- World English Bible (WEB)
- “You shall not go into the house of feasting to sit with them, to eat and to drink.”
- American Standard Version (ASV)
- And thou shalt not go into the house of feasting to sit with them, to eat and to drink.
- Bible in Basic English (BBE)
- And you are not to go into the house of feasting, or be seated with them to take food or drink.
- Darby Translation (DBY)
- And thou shalt not go into the house of feasting, to sit with them, to eat and to drink.
- Webster's Bible (WBS)
- Also thou shalt not go into the house of feasting, to sit with them to eat and to drink.
- Young's Literal Translation (YLT)
- A house of banqueting thou dost not enter, To sit with them, to eat and to drink,
Read in context
- 6इस कारण इस देश के छोटे- बड़े सब मरेंगे, न तो इनको मिट्टी दी जाएगी, न लोग छाती पीटेंगे, न अपना शरीर चीरेंगे, और न सिर मुंड़ाएंगे। इनके लिये कोई शोक करनेवालों को रोटी न बाटेंगे कि शोक में उन्हें शान्ति दें;
- 7और न लोग पिता वा माता के मरने पर किसी को शान्ति के लिये कटोरे में दाखमधु पिलाएंगे।
- 8तू जेवनार के घर में इनके साथ खाने- पीने के लिये न जाना।
- 9क्योंकि सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, देख, तुम लोगों के देखते और तुम्हारे ही दिनों में मैं ऐसा करूंगा कि इस स्थान में न तो हर्ष और न आनन्द का शब्द सुनाई पडेगा, न दुल्हे और न दुल्हिन का शब्द।
- 10और जब तू इन लोगों से ये सब बातें कहे, और वे तुझ से पूछें कि यहोवा ने हमारे ऊपर यह सारी बड़ी विपत्ति डालने के लिये क्यों कहा है? हमारा अधर्म क्या है और हम ने अपने परमेश्वर यहोवा के विरूद्ध कौन सा पाप किया है?
Cross references
- Jeremiah 15:17 यिर्मयाह 15:17तेरी छाया मुझ पर इई; मैं मन बहलानेवालों के बीच बैठकर प्रसन्न नहीं हुआ; तेरे हाथ के दबाव से मैं अकेला बैठा, क्योंकि तू ने मुझे क्रोध से भर दिया था।
- Ecclesiastes 7:2–4 सभोपदेशक 7:2–4जेवनार के घर जाने से शोक ही के घर जाना उत्तम है; क्योंकि सब मनुष्यों का अन्त यही है, और जो जीवित है वह मन लगाकर इस पर सोचेगा। हंसी से खेद उत्तम है, क्योंकि मुंह पर के शोक से मन सुधरता है। बुद्धिमानों का मन शोक करनेवालों के घर की ओर लगा रहता है परन्तु मूर्खों का मन आनन्द करनेवालों के घर लगा रहता है।
- Isaiah 22:12–14 यशायाह 22:12–14उस समय सेनाओं के प्रभु यहोवा ने रोने- पीटने, सिर मुंडाने और टाट पहिनने के लिये कहा था; परन्तु क्या देखा कि हर्ष और आनन्द मनाया जा रहा है, गाय- बैल का घात और भेड़- बकरी का वध किया जा रहा है, मांस खाया और दाखमधु पीया जा रहा है। और कहते हैं, आओ खाएं- पीएं, क्योंकि कल तो हमें मरना है। सेनाओं के यहोवा ने मेरे कान में कहा और अपने मन की बात प्रगट की, निश्चय तुम लोगों के इस अधर्म का कुछ भी प्रायश्चित्त तुम्हारी मृत्यु तक न हो सकेगा, सेनाओं के प्रभु यहोवा का यही कहना है।
- Amos 6:4–6 आमोस 6:4–6तुम हाथी दांत के पलंगों पर लेटते, और अपने अपने बिछौने पर पांव फैलाए सोते हो, और भेड़- बकरियों में से मेम्ने और गौशालाओं में से बछड़े खाते हो। तुम सारंगी के साथ गीत गाते, और दाऊद की नाईं भांति भांति के बाजे बुद्धि से निकालते हो; और कटोरों में से दाखमधु पीते, और उत्तम उत्तम तेल लगाते हो, परन्तु यूसुफ पर आनेवाली विपत्ति का हाल सुनकर शोकित नहीं होते।
- Psalm 26:4 भजन संहिता 26:4मैं निकम्मी चाल चलनेवालों के संग नहीं बैठा, और न मैं कपटियों के साथ कहीं जाऊंगा;
- Luke 17:27–29 लूका 17:27–29जिस दिन तक नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते- पीते थे, और उन में ब्याह- शादी होती थीे; तब जल- प्रलय ने आकर उन सब को नाश किया। और जैसा लूत के दिनों में हुआ था, कि लोग खाते- पीते लेन- देन करते, पेड़ लगाते और घर बनाते थे। परन्तु जिस दिन लूत सदोम से निकला, उस दिन आग और गन्धक आकाश से बरसी और सब को नाश कर दिया।
- Ephesians 5:11 इफिसियों 5:11और अन्धकार के निष्फल कामों में सहभागी न हो, बरन उन पर उलाहना दो।
- 1 Corinthians 5:11 1 कुरिन्थियों 5:11मेरा कहना यह है; कि यदि कोई भाई कहलाकर, व्यभिचारी, या लोभी, या मूत्तिपूजक, या गाली देनेवाला, या पियक्कड़, या अन्धेर करनेवाला हो, तो उस की संगति मत करना; बरन ऐसे मनुष्य के साथ खाना भी न खाना।
- Matthew 24:38 मत्ती 24:38क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी।