Leviticus · chapter 11 · verse 47
Leviticus 11:47 in Hindi
कि शुद्ध अशुद्ध और भक्षय और अभक्षय जीवधारियों में भेद किया जाए।।
Ki shuddh ashuddh aur bhakshay aur abhakshay jeevadhaariyom mem bhed kiyaa jaae..
Leviticus 11:47 in English
- King James Version (KJV)
- To make a difference between the unclean and the clean, and between the beast that may be eaten and the beast that may not be eaten.
- World English Bible (WEB)
- to make a distinction between the unclean and the clean, and between the living thing that may be eaten and the living thing that may not be eaten.’”
- American Standard Version (ASV)
- to make a distinction between the unclean and the clean, and between the living thing that may be eaten and the living thing that may not be eaten.
- Bible in Basic English (BBE)
- Marking out the unclean from the clean, and the living thing which may be used for food from that which may not.
- Darby Translation (DBY)
- to make a difference between the unclean and the clean, and between the beast that is to be eaten and the beast that is not to be eaten.
- Webster's Bible (WBS)
- To make a difference between the unclean and the clean, and between the beast that may be eaten and the beast that may not be eaten.
- Young's Literal Translation (YLT)
- to make separation between the unclean and the pure, and between the beast that is eaten, and the beast that is not eaten.'
Read in context
- 45क्योंकि मैं वह यहोवा हूं जो तुम्हें मि देश से इसलिये निकाल ले आया हूं कि तुम्हारा परमेश्वर ठहरूं; इसलिये तुम पवित्रा बनो, क्योंकि मैं पवित्रा हूं।।
- 46पशुओं, पक्षियों, और सब जलचरी प्राणियों, और पृथ्वी पर सब रेंगनेवाले प्राणियों के विषय में यही व्यवस्था है,
- 47कि शुद्ध अशुद्ध और भक्षय और अभक्षय जीवधारियों में भेद किया जाए।।
Cross references
- Leviticus 10:10 लैव्यव्यवस्था 10:10जिस से तुम पवित्रा और अपवित्रा में, और शुद्ध और अशुद्ध में अन्तर कर सको;
- Ezekiel 44:23 यहेजकेल 44:23वे मेरी प्रजा को पवित्रा अपवित्रा का भेद सिखाया करें, और शुद्ध अशुद्ध का अन्तर बताया करें।
- Romans 14:13–23 रोमियों 14:13–23सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। मैं जानता हूं, और प्रभु यीशु से मुझे निश्चय हुआ है, कि कोई वस्तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्तु जो उस को अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है। यदि तेरा भाई तेरे भोजन के कारण उदास होता है, तो फिर तू प्रेम की रीति से नहीं चलता: जिस के लिये मसीह मरा उस को तू अपने भोजन के द्वारा नाश न कर। अब तुम्हारी भलाई की निन्दा न होने पाए। क्योंकि परमशॆवर का राज्या खानापीना नहीं; परन्तु धर्म और मिलाप और वह आनन्द है; जो पवित्राआत्मा से होता है और जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्वर को भाता है और मनुष्यों में ग्रहणयोग्य ठहरता है। इसलिये हम उन बातों का प्रयत्न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो। भोजन के लिये परमेश्वर का काम न बिगाड़: सब कुछ शुद्ध तो है, परन्तु उस मनुष्य के लिये बुरा है, जिस को उसके भोजन करने से ठोकर लगती है। भला तो यह है, कि तू न मांस खाए, और न दाख रस पीए, न और कुछ ऐसा करे, जिस से तेरा भाई ठोकर खाए। तेरा जो विश्वास हो, उसे परमेश्वर के साम्हने अपने ही मन में रख: धन्य है वह, जो उस बात में, जिस वह ठीक समझता है, अपने आप को दोषी नहीं ठहराता। परन्तु जो सन्देह कर के खाता है, वह दण्ड के योग्य ठहर चुका, क्योंकि वह निश्चय धारणा से नहीं खाता, और जो कुछ विश्वास से नहीं, वह पाप है।।
- Romans 14:2–3 रोमियों 14:2–3क्योंकि एक को विश्वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्तु जो विश्वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है। और खानेवाला न- खानेवाले को तुच्छ न जाने, और न- खानेवाला खानेवाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।
- Malachi 3:18 मलाकी 3:18तब तुम फिरकर धर्मी और दुष्ट का भेद, अर्थात् जो परमेश्वर की सेवा करता है, और जो उसकी सेवा नहीं करता, उन दोनों को भेद पहिचान सकोगे।।