Mark · chapter 8 · verse 31
Mark 8:31 in Hindi
और वह उन्हें सिखाने लगा, कि मनुष्य के पुत्रा के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरनिए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें और वह तीन दिन के बाद जी उठे।
Aur vah unhem sikhaane lagaa, ki manushy ke putraa ke liye avashy hai, ki vah bahut dukh uthaae, aur puranie aur mahaayaajak aur shaastree use tuchchh samajhakar maar daalem aur vah teen din ke baad jee uthe.
Mark 8:31 in English
- King James Version (KJV)
- And he began to teach them, that the Son of man must suffer many things, and be rejected of the elders, and [of] the chief priests, and scribes, and be killed, and after three days rise again.
- World English Bible (WEB)
- He began to teach them that the Son of Man must suffer many things, and be rejected by the elders, the chief priests, and the scribes, and be killed, and after three days rise again.
- American Standard Version (ASV)
- And he began to teach them, that the Son of man must suffer many things, and be rejected by the elders, and the chief priests, and the scribes, and be killed, and after three days rise again.
- Bible in Basic English (BBE)
- And teaching them, he said that the Son of man would have to undergo much, and be hated by those in authority, and the chief priests, and the scribes, and be put to death, and after three days come back from the dead.
- Darby Translation (DBY)
- And he began to teach them that the Son of man must suffer many things, and be rejected of the elders and of the chief priests and of the scribes, and be killed, and after three days rise [again].
- Webster's Bible (WBS)
- And he began to teach them, that the Son of man must suffer many things, and be rejected by the elders, and the chief priests, and scribes, and be killed, and after three days rise again.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and began to teach them, that it behoveth the Son of Man to suffer many things, and to be rejected by the elders, and chief priests, and scribes, and to be killed, and after three days to rise again;
Read in context
- 29उस ने उन से पूछा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? पतरस ने उस को उत्तर दिया; तू मसीह है।
- 30तब उस ने उन्हें चिताकर कहा, कि मेरे विषय में यह किसी से न कहना।
- 31और वह उन्हें सिखाने लगा, कि मनुष्य के पुत्रा के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरनिए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें और वह तीन दिन के बाद जी उठे।
- 32उस ने यह बात उन से साफ साफ कह दी: इस पर पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा।
- 33परन्तु उस ने फिरकर, और अपने चेलों की ओर देखकर पतरस को झिड़कर कर कहा; कि हे शैतान, मेरे साम्हने से दूर हो; क्योंकि तू परमेश्वर की बातों पर नहीं, परन्तु मनुष्य की बातों पर मन लगाता है।
Cross references
- Mark 10:33–34 मरकुस 10:33–34कि देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्रा महायाजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा, और वे उस को घात के योग्य ठहराएंगे, और अन्यजातियों के हाथ में सौंपेंगे। और वे उस को ठट्ठों में उड़ाएंगे, और उस पर थूकेंगे, और उसे कोड़े मारेंगे, और उसे घात करेंगे, और तीन दिन के बाद वह जी उठेगा।।
- John 2:19 यूहन्ना 2:19यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि इस मन्दिर को ढा दो, और मैं उसे तीन दिन में खड़ा कर दूंगा।
- Luke 24:26 लूका 24:26क्या अवश्य न था, कि मसीह ये दुख उठाकर अपनी महिमा में प्रवेश करे?
- Luke 17:25 लूका 17:25परन्तु पहिले अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएं।
- 1 Samuel 10:19 1 शमूएल 10:19परन्तु तुम ने आज अपने परमेश्वर को जो सब विपत्तियों और कष्टों से तुम्हारा छुड़ानेवाला है तुच्छ जाना; और उस से कहा है, कि हम पर राजा नियुक्त कर दे। इसलिये अब तुम गोत्रा गोत्रा और हजार हजार करके यहोवा के साम्हने खड़े हो जाओ।
- Hosea 6:2 होशे 6:2दो दिन के बाद वह हम को जिलाएगा; और तीसरे दिन वह हमको उठाकर खड़ा करेगा; तब हम उसके सम्मुख जीवित रहेंगे।
- Mark 9:31–32 मरकुस 9:31–32पर यह बात उन की समझ में नहीं आई, और वे उस से पूछने से डरते थे।। फिर वे कफरनहूम में आए; और घर में आकर उस ने उन से पूछा कि रास्ते में तुम किस बात पर विवाद करते थे?
- Matthew 16:21–28 मत्ती 16:21–28उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा, कि मुझे अवश्य है, कि यरूशलेम को जाऊं, और पुरनियों और महायाजकों और शास्त्रियों के हाथ से बहुत दुख उठाऊं; और मार डाला जाऊं; और तीसरे दिन जी उठूं। इस पर पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा कि हे प्रभु, परमेश्वर न करे; तुझ पर ऐसा कभी न होगा। उस ने फिरकर पतरस से कहा, हे शैतान, मेरे साम्हने से दूर हो: तू मेरे लिये ठोकर का कारण है; क्योंकि तू परमेश्वर की बातें नहीं, पर मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है। तब यीशु ने अपने चेलों से कहा; यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हाति उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? मनुष्य का पुत्रा अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा। मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कितने ऐसे हैं; कि जब तक मनुष्य के पुत्रा को उसके राज्य में आते हुए न देख लेंगे, तब तक मृत्यु का स्वाद कभी न चखेंगे।
- Acts 7:35 प्रेरितों के काम 7:35जिस मूसा को उन्होंने यह कहकर नकारा था कि तुझे किस ने हम पर हाकिम और न्यायी ठहराया है; उसी को परमेश्वर ने हाकिम और छुड़ाने वाला ठहरा कर, उस स्वर्ग दूत के द्वारा जिस ने उसे झाड़ी में दर्शन दिया था, भेजा।
- Mark 12:10 मरकुस 12:10क्या तुम ने पवित्रा शास्त्रा में यह वचन नहीं पढ़ा, कि जिस पत्थर को राजमिस्त्रायों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया?
- Acts 7:51–52 प्रेरितों के काम 7:51–52जैसा तुम्हारे बाप दादे करते थे, वैसे ही तुम भी करते हो। भविष्यद्वक्ताओं में से किस को तुम्हारे बाप दादों ने नहीं सताया, और उन्होंने उस धर्मी के आगमन का पूर्वकाल से सन्देश देने वालों को मार डाला, और अब तुम भी उसके पकड़वाने वाले और मार डालने वाले हुए।
- Matthew 21:42 मत्ती 21:42यीशु ने उन से कहा, क्या तुम ने कभी पवित्रा शास्त्रा में यह नहीं पढ़ा, कि जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने के सिरे का पत्थर हो गया?
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- began · G756ἄρχομαι árchomai
- teach · G1321διδάσκω didáskō
- them · G846αὐτός autós
- that · G3754ὅτι hóti
- Son · G5207υἱός huiós
- man · G444ἄνθρωπος ánthrōpos
- must · G1163δεῖ deî
- suffer · G3958πάσχω páschō
- things · G4183πολύς polýs
- and · G2532καί kaí
- rejected · G593ἀποδοκιμάζω apodokimázō
- of · G575ἀπό apó
- elders · G4245πρεσβύτερος presbýteros
- and · G2532καί kaí
- priests · G749ἀρχιερεύς archiereús
- and · G2532καί kaí
- scribes · G1122γραμματεύς grammateús
- and · G2532καί kaí
- killed · G615ἀποκτείνω apokteínō
- and · G2532καί kaí
- after · G3326μετά metá
- three · G5140τρεῖς treîs
- days · G2250ἡμέρα hēméra
- again · G450ἀνίστημι anístēmi