Romans · chapter 13 · verse 10
Romans 13:10 in Hindi
प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।।
Prem padosee kee kuchh buraaee naheem karataa, isaliye prem rakhanaa vyavasthaa ko pooraa karanaa hai..
Romans 13:10 in English
- King James Version (KJV)
- Love worketh no ill to his neighbour: therefore love [is] the fulfilling of the law.
- World English Bible (WEB)
- Love doesn’t harm a neighbor. Love therefore is the fulfillment of the law.
- American Standard Version (ASV)
- Love worketh no ill to his neighbor: love therefore is the fulfilment of the law.
- Bible in Basic English (BBE)
- Love does no wrong to his neighbour, so love makes the law complete.
- Darby Translation (DBY)
- Love works no ill to its neighbour; love therefore [is the] whole law.
- Webster's Bible (WBS)
- Love worketh no ill to one's neighbor: therefore love [is] the fulfilling of the law.
- Young's Literal Translation (YLT)
- the love to the neighbour doth work no ill; the love, therefore, [is] the fulness of law.
Read in context
- 8आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदान न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है।
- 9क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्र्रेम रख।
- 10प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।।
- 11और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुंची है, क्योंकि जिस समय हम ने विश्वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है।
- 12रात बहुत बीन गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें।
Cross references
- Romans 13:8 रोमियों 13:8आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदान न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है।
- Matthew 22:39–40 मत्ती 22:39–40और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है।।
- 1 Corinthians 13:4–7 1 कुरिन्थियों 13:4–7प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम डाल नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सन्य से आनन्दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।