Zechariah · chapter 5 · verse 3
Zechariah 5:3 in Hindi
तब उस ने मुझ से कहा, यह वह शाप है जो इस सारे देश पर पड़नेवाला है; क्योंकि जो कोई चोरी करता है, वह उसकी एक ओर लिखे हुए के अनुसार मैल की नाईं निकाल दिया जाएगा; और जो कोई शपथ खाता है, वह उसकी दूसरी ओर लिखे हुए के अनुसार मैल की नाईं निकाल दिया जाएगा।
Tab us ne mujh se kahaa, yah vah shaap hai jo is saare desh par padanevaalaa hai; kyonki jo koee choree karataa hai, vah usakee ek or likhe hue ke anusaar mail kee naaeem nikaal diyaa jaaegaa; aur jo koee shapath khaataa hai, vah usakee doosaree or likhe hue ke anusaar mail kee naaeem nikaal diyaa jaaegaa.
Zechariah 5:3 in English
- King James Version (KJV)
- Then said he unto me, This [is] the curse that goeth forth over the face of the whole earth: for every one that stealeth shall be cut off [as] on this side according to it; and every one that sweareth shall be cut off [as] on that side according to it.
- World English Bible (WEB)
- Then he said to me, “This is the curse that goes out over the surface of the whole land, for everyone who steals shall be cut off according to it on the one side; and everyone who swears falsely shall be cut off according to it on the other side.
- American Standard Version (ASV)
- Then said he unto me, This is the curse that goeth forth over the face of the whole land: for every one that stealeth shall be cut off on the one side according to it; and every one that sweareth shall be cut off on the other side according to it.
- Bible in Basic English (BBE)
- Then he said to me, This is the curse which goes out over the face of all the land: for long enough has every thief gone without punishment, and long enough has every taker of false oaths gone without punishment.
- Darby Translation (DBY)
- And he said unto me, This is the curse that goeth forth over the face of the whole land: for every one that stealeth shall be cut off according to it on this side; and every one that sweareth shall be cut off according to it on that side.
- Webster's Bible (WBS)
- Then said he to me, This [is] the curse that goeth forth over the face of the whole earth: for every one that stealeth shall be cut off [as] on this side according to it; and every one that sweareth shall be cut off [as] on that side according to it.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he saith unto me, 'This [is] the execration that is going forth over the face of all the land, for every one who is stealing, on the one side, according to it, hath been declared innocent, and every one who hath sworn, on the other side, according to it, hath been declared innocent.
Read in context
- 1मैं ने फिर आंखें उठाईं तो क्या देखा, कि एक लिखा हुआ पत्रा उड़ रहा है।
- 2दूत ने मुझ से पूछा, तुझे क्या देख पड़ता है? मैं ने कहा, मुझे एक लिखा हुआ पत्रा उड़ता हुआ देख पड़ता है, जिस की लम्बाई बीस हाथ और चौड़ाई दस हाथ की है।
- 3तब उस ने मुझ से कहा, यह वह शाप है जो इस सारे देश पर पड़नेवाला है; क्योंकि जो कोई चोरी करता है, वह उसकी एक ओर लिखे हुए के अनुसार मैल की नाईं निकाल दिया जाएगा; और जो कोई शपथ खाता है, वह उसकी दूसरी ओर लिखे हुए के अनुसार मैल की नाईं निकाल दिया जाएगा।
- 4सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, मैं उसको ऐसा चलाऊंगा कि वह चोर के घर में और मेरे नाम की झूठी शपथ खानेवाले के घर में घुसकर ठहरेगा, और उसको लकड़ी और पत्थरों समेत नाश कर देगा।।
- 5तब जो दूत मुझ से बातें करता था, उस ने बाहर जाकर मुझ से कहा, आंखें उठाकर देख कि वह क्या वस्तु निकली जा रही हैं?
Cross references
- Exodus 20:15 निर्गमन 20:15तू चोरी न करना।।
- Isaiah 24:6 यशायाह 24:6इस कारण पृथ्वी को शाप ग्रसेगा और उस में रहनेवाले दोषी ठहरेंगे; और इसी कारण पृथ्वी के निवासी भस्म होंगे और थोड़े ही मनुष्य रह जाएंगे।
- Isaiah 43:28 यशायाह 43:28इस कारण मैं ने पवित्रास्थान के हाकिमों को अपवित्रा ठहराया, मैं ने याकूब को सत्यानाश और इस्राएल को निन्दित होने दिया है।।
- James 5:12 याकूब 5:12पर हे मेरे भाइयों, सब से श्रेष्ठ बात यह है, कि शपथ न खाना; न स्वर्ग की न पृथ्वी की, न किसी और वस्तु की, पर तुम्हारी बातचीत हां की हां, और नहीं की नहीं हो, कि तुम दण्ड के योग्य न ठहरो॥
- Isaiah 48:1 यशायाह 48:1हे याकूब के घराने, यह बात सुन, तुम जो इस्राएली कहलाते हो; जो यहोवा के नाम की शपथ खाते हो और इस्राएल के परमेश्वर की चर्चा तो करते हो, परन्तु सच्चाई और धर्म से नहीं करते।
- Jeremiah 5:2 यिर्मयाह 5:2यद्यमि उसके निवासी यहोवा के जीवन की शपथ भी खाएं, तौभी निश्चय वे झूठी शपथ खाते हैं।
- Galatians 3:10–13 गलातियों 3:10–13सो जितने लोग व्यवस्था के कामों पर भरोसा रखते हैं, वे सब स्त्राप के आधीन हैं, क्योंकि लिखा है, कि जो कोई व्यवस्था की पुस्तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्थिर नहीं रहता, वह स्त्रापित है। पर यह बात प्रगट है, कि व्यवस्था के द्वारा परमेश्वर के यहां कोई धर्मी नहीं ठहरता क्योंकि धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा। पर व्यवस्था का विश्वास से कुछ सम्बन्ध नहीं; पर जो उन को मानेगा, वह उन के कारण जीवित रहेगा। मसीह ने जो हमारे लिये स्त्रापित बना, हमें मोल लेकर व्यवस्था के स्त्राप से छुड़ाया क्योंकि लिखा है, जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह स्त्रापित है।
- Psalm 109:17–20 भजन संहिता 109:17–20वह शाप देने में प्रीति रखता था, और शाप उस पर आ पड़ा; वह आशीर्वाद देने से प्रसन्न न होता था, सो आर्शीवाद उस से दूर रहा। वह शाप देना वस्त्रा की नाई पहिनता था, और वह उसके पेट में जल की नाई और उसकी हडि्डयों में तेल की नाई समा गया। वह उसके लिये ओढ़ने का काम दे, और फेंटे की नाईं उसकी कटि में नित्य कसा रहे।। यहोवा की ओर से मेरे विरोधियों को, और मेरे विरूद्ध बुरा कहनेवालों को यही बदला मिले!
- Revelation 22:15 प्रकाशितवाक्य 22:15पर कुत्तेे, और टोन्हें, और व्यभिचारी, और हत्यारे और मूर्तिपूजक, और हर एक झूठ का चाहनेवाला, और गढ़नेवाला बाहर रहेगा।।
- Leviticus 19:12 लैव्यव्यवस्था 19:12तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्रा न ठहराना; मैं यहोवा हूं।
- Zechariah 5:4 जकर्याह 5:4सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, मैं उसको ऐसा चलाऊंगा कि वह चोर के घर में और मेरे नाम की झूठी शपथ खानेवाले के घर में घुसकर ठहरेगा, और उसको लकड़ी और पत्थरों समेत नाश कर देगा।।
- Matthew 23:16–22 मत्ती 23:16–22हे अन्धे अगुवों, तुम पर हाय, जो कहते हो कि यदि कोई मन्दिर की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु यदि कोई मन्दिर के सोने की सौगन्ध खाए तो उस से बन्ध जाएगा। हे मूर्खो, और अन्धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्दिर जिस से सोना पवित्रा होता है? फिर कहते हो कि यदि कोई वेदी की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु जो भेंट उस पर है, यदि कोई उस की शपथ खाए तो बन्ध जाएगा। हे अन्धों, कौन बड़ा है, भेंट या वेदी: जिस से भेंट पवित्रा होता है? इसलिये जो वेदी की शपथ खाता है, वह उस की, और जो कुछ उस पर है, उस की भी शपथ खाता है। और जो मन्दिर की शपथ खाता है, वह उस की और उस में रहनेवालों की भी शपथ खाता है। और जो स्वर्ग की शपथ खाता है, वह परमेश्वर के सिहांसन की और उस पर बैठनेवाले की भी शपथ खाता है।।