1 Samuel · chapter 9 · verse 5
1 Samuel 9:5 in Hindi
जब वे सूफ नाम देश में आए, तब शाऊल ने अपने साथ के सेवक से कहा, आ, हम लौट चलें, ऐसा न हो कि मेरा पिता गदहियों की चिन्ता छोड़कर हमारी चिन्ता करने लगे।
Jab ve sooph naam desh mem aae, tab shaaool ne apane saath ke sevak se kahaa, aa, ham laut chalem, aisaa na ho ki meraa pitaa gadahiyom kee chintaa chhodakar hamaaree chintaa karane lage.
1 Samuel 9:5 in English
- King James Version (KJV)
- [And] when they were come to the land of Zuph, Saul said to his servant that [was] with him, Come, and let us return; lest my father leave [caring] for the asses, and take thought for us.
- World English Bible (WEB)
- When they had come to the land of Zuph, Saul said to his servant who was with him, “Come! Let’s return, lest my father stop caring about the donkeys and be anxious for us.”
- American Standard Version (ASV)
- When they were come to the land of Zuph, Saul said to his servant that was with him, Come, and let us return, lest my father leave off caring for the asses, and be anxious for us.
- Bible in Basic English (BBE)
- And when they had come to the land of Zuph, Saul said to the servant who was with him, Come, let us go back, or my father may give up caring about the asses and be troubled about us.
- Darby Translation (DBY)
- They had come to the land of Zuph when Saul said to his servant that was with him, Come and let us return; lest my father give up the asses, and be anxious about us.
- Webster's Bible (WBS)
- [And] when they had come to the land of Zuf, Saul said to his servant that [was] with him, Come, and let us return; lest my father leave [caring] for the asses, and be anxious for us.
- Young's Literal Translation (YLT)
- They have come in unto the land of Zuph, and Saul hath said to his young man who [is] with him, 'Come, and we turn back, lest my father leave off from the asses, and hath been sorrowful for us.'
Read in context
- 3जब शाऊल के पिता कीश की गदहियां खो गईं, तब कीश ने अपने पुत्रा शाऊल से कहा, एक सेवक को अपने साथ ले जा और गदहियों को ढूंढ ला।
- 4तब वह एप्रैम के पहाड़ी देश और शलीशा देश होते हुए गया, परन्तु उन्हें न पाया। तब वे शालीम नाम देश भी होकर गए, और वहां भी न पाया। फिर बिन्यामीन के देश में गए, परन्तु गदहियां न मिलीं।
- 5जब वे सूफ नाम देश में आए, तब शाऊल ने अपने साथ के सेवक से कहा, आ, हम लौट चलें, ऐसा न हो कि मेरा पिता गदहियों की चिन्ता छोड़कर हमारी चिन्ता करने लगे।
- 6उस ने उस से कहा, सुन, इस नगर में परमेश्वर का एक जन है जिसका बड़ा आदरमान होता है; और जो कुछ वह कहता है वह बिना पूरा हुए नहीं रहता। अब हम उधर चलें, सम्भव है वह हम को हमार मार्ग बताए कि किधर जाएं।
- 7शाऊल ने अपने सेवक से कहा, सुन, यदि हम उस पुरूष के पास चलें तो उसके लिये क्या ले चलें? देख, हमारी थैलियों में की रोटी चुक गई है और भेंट के योग्य कोई वस्तु है ही नहीं, जो हम परमेश्वर के उस जन को दें। हमारे पास क्या है?
Cross references
- 1 Samuel 10:2 1 शमूएल 10:2आज जब तू मेरे पास से चला जाएगा, तब राहेल की कब्र के पास जो बिन्यामीन के देश के सिवाने पर सेलसह में है दो जन तुझे मिलेंगे, और कहेंगे, कि जिन गदिहियों को तू ढूंढने गया था वे मिल हैं; और सुन, तेरा पिता गदहियों की चिन्ता छोड़कर तुम्हारे कारण कुढ़ता हुआ कहता है, कि मैं अपने पुत्रा के लिये क्या करूं?
- 1 Samuel 1:1 1 शमूएल 1:1एप्रैम के पहाड़ी देश के रामतैम सोपीम नाम नगर का निवासी एल्काना नाम पुरूष था, वह एप्रेमी था, और सूप के पुत्रा तोहू का परपोता, एलीहू का पोता, और यरोहाम का पुत्रा था।
- Luke 12:11 लूका 12:11जब लोग तुम्हें सभाओं और हाकिमों और अधिकारियों के साम्हने ले जाएं, तो चिन्ता न करना कि हम किस रीति से या क्या उत्तर दें, या क्या कहें।
- Matthew 6:28 मत्ती 6:28और वस्त्रा के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
- Luke 12:22 लूका 12:22फिर उस ने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।
- Matthew 6:25 मत्ती 6:25इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्रा से बढ़कर नहीं?
- Matthew 6:34 मत्ती 6:34सो कल के लिये चिन्ता न करो, क्योकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।।