Acts · chapter 17 · verse 26
Acts 17:26 in Hindi
उस ने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाई हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्धा है।
Us ne ek hee mool se manushyom kee sab jaatiyaam saaree pruthvee par rahane ke liye banaaee haim; aur un ke thaharaae hue samay, aur nivaas ke sivaanom ko isaliye baandhaa hai.
Acts 17:26 in English
- King James Version (KJV)
- And hath made of one blood all nations of men for to dwell on all the face of the earth, and hath determined the times before appointed, and the bounds of their habitation;
- World English Bible (WEB)
- He made from one blood every nation of men to dwell on all the surface of the earth, having determined appointed seasons and the boundaries of their dwellings,
- American Standard Version (ASV)
- and he made of one every nation of men to dwell on all the face of the earth, having determined [their] appointed seasons, and the bounds of their habitation;
- Bible in Basic English (BBE)
- And he has made of one blood all the nations of men living on all the face of the earth, ordering their times and the limits of their lands,
- Darby Translation (DBY)
- and has made of one blood every nation of men to dwell upon the whole face of the earth, having determined ordained times and the boundaries of their dwelling,
- Webster's Bible (WBS)
- And hath made of one blood all nations of men to dwell on all the face of the earth, and hath determined the times before appointed, and the bounds of their habitation;
- Young's Literal Translation (YLT)
- He made also of one blood every nation of men, to dwell upon all the face of the earth — having ordained times before appointed, and the bounds of their dwellings —
Read in context
- 24जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी होकर हाथ के बनाए हुए मन्दिरों में नहीं रहता।
- 25न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्वास और सब कुछ देता है।
- 26उस ने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाई हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्धा है।
- 27कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोलकर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
- 28क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते- फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।
Cross references
- Deuteronomy 32:7–8 व्यवस्थाविवरण 32:7–8प्राचीनकाल के दिनों को स्मरण करो, पीढ़ी पीढ़ी के वर्षों को विचारो; अपने बाप से पूछो, और वह तुम को बताएगा; अपने वृद्ध लोगों से प्रश्न करो, और वे तुझ से कह देंगे।। जब परमप्रधान ने एक एक जाति को निज निज भाग बांट दिया, और आदमियों को अलग अलग बसाया, तब उस ने देश देश के लोगों के सिवाने इस्राएलियों की गिनती के अनुसार ठहराए।।
- Malachi 2:10 मलाकी 2:10क्या हम सभों का एक ही पिता नहीं? क्या एक ही परमेश्वर ने हम को उत्पन्न नहीं किया? हम क्यों एक दूसरे का विश्वासघात करके अपेन पूर्वजों की वाचा को तोड़ देते हैं?
- Genesis 3:20 उत्पत्ति 3:20और आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई।
- Romans 5:12–19 रोमियों 5:12–19इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। तौभी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आनेवाले का चिन्ह है, पाप न किया। पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के बरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात् यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुअ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा बरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्मरूमी बरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात् यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वेसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित्त धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।
- 1 Corinthians 15:22 1 कुरिन्थियों 15:22और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जाएंगे।
- 1 Corinthians 15:47 1 कुरिन्थियों 15:47प्रथम मनुष्य धरती से अर्थात् मिट्टी का था; दूसरा मनुष्य स्वर्गीय है।
- Job 14:5 अय्यूब 14:5मनुष्य के दिन नियुक्त किए गए हैं, और उसके महीनों की गिनती तेरे पास लिखी है, और तू ने उसके लिये ऐसा सिवाना बान्धा है जिसे वह पार नहीं कर सकता,
- Job 12:23 अय्यूब 12:23वह जातियों को बढ़ाता, और उनको नाश करता है; वह उनको फैलाता, और बन्धुआई में ले जाता है।
- Psalm 31:15 भजन संहिता 31:15मेरे दिन तेरे हाथ में है; तू मुझे मेरे शत्रुओं और मेरे सतानेवालों के हाथ से छुडा।
- Genesis 9:19 उत्पत्ति 9:19नूह के तीन पुत्रा ये ही हैं, और इनका वंश सारी पृथ्वी पर फैल गया।
- Daniel 11:35 दानिय्येल 11:35और सिखानेवालों में से कितनें गिरेंगे, और इसलिये गिरने पाएंगे कि जांचे जाएं, और निर्मल और उजले किए जाएं। यह दशा अन्त के समय तक बनी रहेगी, क्योंकि इन सब बातों का अन्त नियत समय में होनेवाला है।।
- Daniel 11:27 दानिय्येल 11:27तब उन दोनों राजाओं के मन बुराई करने में लगेंगे, यहां तक कि वे एक ही मेज पर बैठे हुए आपस में झूठ बोलेंगे, परन्तु इस से कुछ बन न पड़ेगा; क्योंकि इन सब बातों का अन्त नियत ही समय में होनेवाला है।
Original words (Greek)
- And · G5037τέ té
- made · G4160ποιέω poiéō
- of · G1537ἐκ ek
- one · G1520εἷς heîs
- blood · G129αἷμα haîma
- all · G3956πᾶς pâs
- nations · G1484ἔθνος éthnos
- men · G444ἄνθρωπος ánthrōpos
- dwell · G2730κατοικέω katoikéō
- on · G1909ἐπί epí
- all · G3956πᾶς pâs
- face · G4383πρόσωπον prósōpon
- earth · G1093γῆ gē
- determined · G3724ὁρίζω horízō
- times · G2540καιρός kairós
- appointed · G4384προτάσσω protássō
- and · G2532καί kaí
- bounds · G3734ὁροθεσία horothesía
- their · G846αὐτός autós
- habitation · G2733κατοικία katoikía