Acts · chapter 17 · verse 27
Acts 17:27 in Hindi
कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोलकर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
Ki ve parameshvar ko dhoondhem, kadaachit use tatolakar paa jaaem taubhee vah ham mem se kisee se door naheem!
Acts 17:27 in English
- King James Version (KJV)
- That they should seek the Lord, if haply they might feel after him, and find him, though he be not far from every one of us:
- World English Bible (WEB)
- that they should seek the Lord, if perhaps they might reach out for him and find him, though he is not far from each one of us.
- American Standard Version (ASV)
- that they should seek God, if haply they might feel after him and find him, though he is not far from each one of us:
- Bible in Basic English (BBE)
- So that they might make search for God, in order, if possible, to get knowledge of him and make discovery of him, though he is not far from every one of us:
- Darby Translation (DBY)
- that they may seek God; if indeed they might feel after him and find him, although he is not far from each one of us:
- Webster's Bible (WBS)
- That they should seek the Lord, if haply they might feel after him, and find him, though he is not far from every one of us:
- Young's Literal Translation (YLT)
- to seek the Lord, if perhaps they did feel after Him and find, — though, indeed, He is not far from each one of us,
Read in context
- 25न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्वास और सब कुछ देता है।
- 26उस ने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाई हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्धा है।
- 27कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोलकर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
- 28क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते- फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।
- 29सो परमेश्वर का वंश होकर हमें यह समझता उचित नहीं, कि ईश्वरत्व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पता से गढ़े गए हों।
Cross references
- Jeremiah 23:23–24 यिर्मयाह 23:23–24यहोवा की यह वाणी है, कया मैं ऐसा परमेश्वर हूँ, जो दूर नहीं, निकट ही रहता हूँ? फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?
- Deuteronomy 4:7 व्यवस्थाविवरण 4:7देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उस को पुकारते हैं?
- Romans 1:20 रोमियों 1:20क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरूत्तर हैं।
- Acts 14:17 प्रेरितों के काम 14:17तौभी उस ने अपने आप को बे- गवाह न छोड़ा; किन्तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्त ऋतु देकर, तुम्हारे मन को भोजन और आनन्द से भरता रहा।
- Romans 2:4 रोमियों 2:4क्या तू उस की कृपा, और सहनशीलता, और धीरजरूपी धन को तुच्छ जानता है? और कया यह नहीं समझता, कि परमेश्वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है?
- Acts 15:17 प्रेरितों के काम 15:17इसलिये कि शेष मनुष्य, अर्थात् सब अन्यजाति जो मेरे नाम के कहलाते हैं, प्रभु को ढूंढें।
- Psalm 19:1–6 भजन संहिता 19:1–6आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उस ने सूरर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाई अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सबको पहुंचती है।।
- Psalm 139:1–13 भजन संहिता 139:1–13हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।। तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।। मैं तेरे आत्मा से भागकर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।। मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
- 1 Kings 8:27 1 राजा 8:27क्या परमेश्वर सचमुच पृथ्वी पर वास करेगा, स्वर्ग में वरन सब से ऊंचे स्वर्ग में भी तू नहीं समाता, फिर मेरे बनाए हुए इस भवन में क्योंकर समाएगा।
Original words (Greek)
- seek · G2212ζητέω zētéō
- Lord · G2962κύριος kýrios
- if · G1487εἰ ei
- haply · G1065γέ gé
- after · G5584ψηλαφάω psēlapháō
- him · G846αὐτός autós
- and · G2532καί kaí
- find · G2147εὑρίσκω heurískō
- him · G846αὐτός autós
- though · G2544καίτοιγε kaítoige
- be · G5225ὑπάρχω hypárchō
- not · G3756οὐ ou
- far · G3112μακράν makrán
- from · G575ἀπό apó
- every · G1538ἕκαστος hékastos
- one · G1520εἷς heîs
- us · G2257ἡμῶν hēmōn