Ecclesiastes · chapter 12 · verse 12
Ecclesiastes 12:12 in Hindi
हे मेरे पुत्रा, इन्ही में चौकसी सीख। बहुत पुस्तकों की रचना का अन्त नहीं होता, और बहुत पढ़ना देह को थका देता है।।
He mere putraa, inhee mem chaukasee seekh. Bahut pustakom kee rachanaa kaa ant naheem hotaa, aur bahut padhanaa deh ko thakaa detaa hai..
Ecclesiastes 12:12 in English
- King James Version (KJV)
- And further, by these, my son, be admonished: of making many books [there is] no end; and much study [is] a weariness of the flesh.
- World English Bible (WEB)
- Furthermore, my son, be admonished: of making many books there is no end; and much study is a weariness of the flesh.
- American Standard Version (ASV)
- And furthermore, my son, be admonished: of making many books there is no end; and much study is a weariness of the flesh.
- Bible in Basic English (BBE)
- And further, my son, take note of this: of the making of books there is no end, and much learning is a weariness to the flesh.
- Darby Translation (DBY)
- And besides, my son, be warned by them: of making many books there is no end, and much study is a weariness of the flesh.
- Webster's Bible (WBS)
- And further, by these, my son, be admonished: of making many books [there is] no end; and much study [is] a weariness of the flesh.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And further, from these, my son, be warned; the making of many books hath no end, and much study [is] a weariness of the flesh.
Read in context
- 10उपदेशक ने मनभावने शब्द खोजे और सीधाई से ये सच्ची बातें लिख दीं।।
- 11बुद्धिमानों के वचन पैनों के समान होते हैं, और सभाओं के प्रधानों के वचन गाड़ी हुई कीलों के समान हैं, क्योंकि एक ही चरवाहे की ओर से मिलते हैं।
- 12हे मेरे पुत्रा, इन्ही में चौकसी सीख। बहुत पुस्तकों की रचना का अन्त नहीं होता, और बहुत पढ़ना देह को थका देता है।।
- 13सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है।
- 14क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा।।
Cross references
- Ecclesiastes 1:18 सभोपदेशक 1:18क्योंकि बहुत बुद्धि के साथ बहुत खेद भी होता है, और जो अपना ज्ञान बढ़ाता है वह अपना दु:ख भी बढ़ाता है।।
- John 21:25 यूहन्ना 21:25और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूं, कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं।।
- 2 Peter 1:19–21 2 पतरस 1:19–21और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्छा करते हो, कि जो यह समझकर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अन्धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे। पर पहिले यह जान लो कि पवित्रा शास्त्रा की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती। क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्रा आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।।
- John 5:39 यूहन्ना 5:39तुम पवित्रा शास्त्रा में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है।
- 1 Kings 4:32 1 राजा 4:32उसने तीन हज़ार नीतिवचन कहे, और उसके एक हज़ार पांच गीत भी है।
- Luke 16:29–31 लूका 16:29–31इब्राहीम ने उस से कहा, उन के पास तो मूसा और भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकें हैं, वे उन की सुनें। उस ने कहा; नहीं, हे पिता इब्राहीम; पर यदि कोई मरे हुओं में से उन के पास जाए, तो वे मन फिराएंगे। उस ने उस से कहा, कि जब वे मूसा और भविष्यद्वक्ताओं की नहीं सुनते, तो यदि मरे हुओं में से कोई भी जी उठे तौभी उस की नहीं मानेंगे॥
- John 20:31 यूहन्ना 20:31परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्रा मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।।