Ecclesiastes · chapter 1 · verse 18
Ecclesiastes 1:18 in Hindi
क्योंकि बहुत बुद्धि के साथ बहुत खेद भी होता है, और जो अपना ज्ञान बढ़ाता है वह अपना दु:ख भी बढ़ाता है।।
Kyonki bahut buddhi ke saath bahut khed bhee hotaa hai, aur jo apanaa jnyaan badhaataa hai vah apanaa du:kh bhee badhaataa hai..
Ecclesiastes 1:18 in English
- King James Version (KJV)
- For in much wisdom [is] much grief: and he that increaseth knowledge increaseth sorrow.
- World English Bible (WEB)
- For in much wisdom is much grief; and he who increases knowledge increases sorrow.
- American Standard Version (ASV)
- For in much wisdom is much grief; and he that increaseth knowledge increaseth sorrow.
- Bible in Basic English (BBE)
- Because in much wisdom is much grief, and increase of knowledge is increase of sorrow.
- Darby Translation (DBY)
- For in much wisdom is much vexation, and he that increaseth knowledge increaseth sorrow.
- Webster's Bible (WBS)
- For in much wisdom [is] much grief: and he that increaseth knowledge increaseth sorrow.
- Young's Literal Translation (YLT)
- for, in abundance of wisdom [is] abundance of sadness, and he who addeth knowledge addeth pain.'
Read in context
- 16मैं ने मन में कहा, देख, जितने यरूशलेम में मुझ से पहिले थे, उन सभों से मैं ने बहुत अधिक बुद्धि प्राप्त की है; और मुझ को बहुत बुद्धि और ज्ञान मिल गया है।
- 17और मैं ने अपना मन लगाया कि बुद्धि का भेद लूं और बावलेपन और मूर्खता को भी जान लूं। मुझे जान पड़ा कि यह भी वायु को पकड़ना है।।
- 18क्योंकि बहुत बुद्धि के साथ बहुत खेद भी होता है, और जो अपना ज्ञान बढ़ाता है वह अपना दु:ख भी बढ़ाता है।।
Cross references
- Job 28:28 अय्यूब 28:28तब उस न मनुष्य से कहा, देख, प्रभु का भय मानना यही बुध्दि हैे और बुराई से दूर रहना यही समझ है।
- Ecclesiastes 12:12–13 सभोपदेशक 12:12–13हे मेरे पुत्रा, इन्ही में चौकसी सीख। बहुत पुस्तकों की रचना का अन्त नहीं होता, और बहुत पढ़ना देह को थका देता है।। सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है।
- 1 Corinthians 3:18–20 1 कुरिन्थियों 3:18–20कोई अपन आप को धोखा न दे: यदि तुम में से कोई इस संसार में अपने आप को ज्ञानी समझे, तो मूर्ख बने; कि ज्ञानी हो जाए। क्योंकि इस संसार का ज्ञान परमेश्वर के निकट मूर्खता है, जैसा लिखा है; कि वह ज्ञानियों को उन की चतुराई में फंसा देता है। और फिर प्रभु ज्ञानियों की चिन्ताओं को जानता है, कि व्यर्थ हैं।
- Ecclesiastes 7:16 सभोपदेशक 7:16अपने को बहुत धर्मी न बना, और न अपने को अधिक बुद्धिमान बना; तू क्यों अपने की नाश का कारण हो?
- James 3:13–17 याकूब 3:13–17तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है। पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्ड न करना, और न तो झूठ बोलना। यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है बरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्कर्म भी होता है। पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्रा होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।
- Ecclesiastes 2:23 सभोपदेशक 2:23उसके सब दिन तो दु:खों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता है; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।
- Ecclesiastes 2:15 सभोपदेशक 2:15तब मैं ने मन में कहा, जैसी मूर्ख की दशा होगी, वैसी ही मेरी भी होगी; फिर मैं क्यों अधिक बुद्धिमान हुआ? और मैं ने मन में कहा, यह भी व्यर्थ ही है।