Ecclesiastes · chapter 7 · verse 24
Ecclesiastes 7:24 in Hindi
वह जो दूर और अत्यन्त गहिरा है, उसका भेद कौन पा सकता है?
Vah jo door aur atyant gahiraa hai, usakaa bhed kaun paa sakataa hai?
Ecclesiastes 7:24 in English
- King James Version (KJV)
- That which is far off, and exceeding deep, who can find it out?
- World English Bible (WEB)
- That which is, is far off and exceedingly deep. Who can find it out?
- American Standard Version (ASV)
- That which is, is far off and exceeding deep; who can find it out?
- Bible in Basic English (BBE)
- Far off is true existence, and very deep; who may have knowledge of it?
- Darby Translation (DBY)
- Whatever hath been, is far off, and exceeding deep: who will find it out?
- Webster's Bible (WBS)
- That which is far off, and exceedingly deep, who can find it out?
- Young's Literal Translation (YLT)
- Far off [is] that which hath been, and deep, deep, who doth find it?
Read in context
- 22क्योंकि तू आप जानता है कि तू ने भी बहुत बेर औरों को शाप दिया है।।
- 23यह सब मैं ने बुद्धि से जांच लिया है; मैं ने कहा, मैं बुद्धिमान हो जाऊंगा; परन्तु यह मुझ से दूर रहा।
- 24वह जो दूर और अत्यन्त गहिरा है, उसका भेद कौन पा सकता है?
- 25मैं ने अपना मन लगाया कि बुद्धि के विषय में जान लूं; कि खोज निकालूं और उसका भेद जानूं, और कि दुष्टता की मूर्खता और मूर्खता जो निरा बावलापन है जानूं।
- 26और मैं ने मृत्यु से भी अधिक दृ:खदाई एक वस्तु पाई, अर्थात् वह स्त्री जिसका मन फन्दा और जाल है और जिसके हाथ हथकड़ियां है; (जिस पुरूष से परमेश्वर प्रसन्न है वही उस से बचेगा, परन्तु पापी उसका शिकाल होगा)
Cross references
- Romans 11:33 रोमियों 11:33आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
- Isaiah 55:8–9 यशायाह 55:8–9क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।।
- 1 Timothy 6:16 1 तीमुथियुस 6:16और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा, और न कभी देख सकता है: उस की प्रतिष्ठा और राज्य युगानुयुग रहेगा। आमीन।।
- Job 28:28 अय्यूब 28:28तब उस न मनुष्य से कहा, देख, प्रभु का भय मानना यही बुध्दि हैे और बुराई से दूर रहना यही समझ है।
- Psalm 139:6 भजन संहिता 139:6यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।।
- Psalm 36:6 भजन संहिता 36:6तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।।
- Job 11:7–8 अय्यूब 11:7–8क्या तू ईश्वर का गूढ़ भेद पा सकता है? और क्या तू सर्वशक्तिमान का मर्म पूरी रीति से चांच सकता है? वह आकाश सा ऊंचा है; तू क्या कर सकता है? वह अधोलोक से गहिरा है, तू कहां समझ सकता है?
- Job 28:12–23 अय्यूब 28:12–23परन्तु बुध्दि कहां मिल सकती है? और समझ का स्थान कहां है? उसका मोल मनुष्य को मालूम नहीं, जीवनलोक में वह कहीं नहीं मिलती! अथाह सागर कहता है, वह मुझ में नहीं है, और समुद्र भी कहता है, वह मेरे पास नहीं है। चोखे सोने से वह मोल लिया नहीं जाता। और न उसके दाम के लिये चान्दी तौली जाती है। न तो उसके साथ ओपीर के कुन्दन की बराबरी हो सकती है; और न अनमोल सुलैमानी पत्थर वा नीलमणि की। न सोना, न कांच उसके बराबर ठहर सकता है, कुन्दन के गहने के बदले भी वह नहीं मिलती। मूंगे और स्फटिकमणि की उसके आगे क्या चर्चा! बुध्दि का मोल माणिक से भी अधिक है। कूश देश के पद्मराग उसके तुल्य नहीं ठहर सकते; और न उस से चोखे कुन्दन की बराबरी हो सकती है। फिर बुध्दि कहां मिल सकती है? और समझ का स्थान कहां? वह सब प्राणियों की आंखों से छिपी है, और आकाश के पक्षियों के देखने में नहीं आती। विनाश ओर मृत्यु कहती हैं, कि हमने उसकी चर्चा सुनी है। परन्तु परमेश्वर उसका मार्ग समझता है, और उसका स्थान उसको मालूम है।
- Deuteronomy 30:11–14 व्यवस्थाविवरण 30:11–14देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। और न तो यह आकाश में है, कि तू कहे, कि कौन हमारे लिये आकाश में चढ़कर उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? और न यह समुद्र पार है, कि तू कहे, कौन हमारे लिये समुद्र पार जाए, और उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? परन्तु यह वचन तेरे बहुत निकट, वरन तेरे मुंह और मन ही में है ताकि तू इस पर चले।।