Exodus · chapter 32 · verse 11
Exodus 32:11 in Hindi
तब मूसा अपने परमेश्वर यहोवा को यह कहके मनाने लगा, कि हे यहोवा, तेरा कोप अपनी प्रजा पर क्यों भड़का है, जिसे तू बड़े सामर्थ्य और बलवन्त हाथ के द्वारा मि देश से निकाल लाया है?
Tab moosaa apane parameshvar yahovaa ko yah kahake manaane lagaa, ki he yahovaa, teraa kop apanee prajaa par kyom bhadakaa hai, jise too bade saamarthy aur balavant haath ke dvaaraa mi desh se nikaal laayaa hai?
Exodus 32:11 in English
- King James Version (KJV)
- And Moses besought the LORD his God, and said, LORD, why doth thy wrath wax hot against thy people, which thou hast brought forth out of the land of Egypt with great power, and with a mighty hand?
- World English Bible (WEB)
- Moses begged the LORD his God, and said, “LORD, why does your wrath burn hot against your people, that you have brought out of the land of Egypt with great power and with a mighty hand?
- American Standard Version (ASV)
- And Moses besought Jehovah his God, and said, Jehovah, why doth thy wrath wax hot against thy people, that thou hast brought forth out of the land of Egypt with great power and with a mighty hand?
- Bible in Basic English (BBE)
- But Moses made prayer to God, saying, Lord, why is your wrath burning against your people whom you took out of the land of Egypt, with great power and with the strength of your hand?
- Darby Translation (DBY)
- And Moses besought Jehovah his God, and said, Why, Jehovah, doth thy wrath burn against thy people, which thou hast brought forth out of the land of Egypt with great power and with a strong hand?
- Webster's Bible (WBS)
- And Moses besought the LORD his God, and said, why doth thy wrath wax hot against thy people, which thou hast brought forth from the land of Egypt, with great power, and with a mighty hand?
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Moses appeaseth the face of Jehovah his God, and saith, 'Why, O Jehovah, doth Thine anger burn against Thy people, whom Thou hast brought forth out of the land of Egypt with great power and with a strong hand?
Read in context
- 9फिर यहोवा ने मूसा से कहा, मैं ने इन लोगों को देखा, और सुन, वे हठीले हैं।
- 10अब मुझे मत रोक, मेरा कोप उन पर भड़क उठा है जिस से मैं उन्हें भस्म करूं; परन्तु तुझ से एक बड़ी जाति उपजाऊंगा।
- 11तब मूसा अपने परमेश्वर यहोवा को यह कहके मनाने लगा, कि हे यहोवा, तेरा कोप अपनी प्रजा पर क्यों भड़का है, जिसे तू बड़े सामर्थ्य और बलवन्त हाथ के द्वारा मि देश से निकाल लाया है?
- 12मिद्दी लोग यह क्यों कहने पाए, कि वह उनको बुरे अभिप्राय से, अर्थात् पहाड़ों में घात करके धरती पर से मिटा डालने की मनसा से निकाल ले गया? तू अपने भड़के हुए कोप को शांत कर, और अपनी प्रजा को ऐसी हानि पहुचाने से फिर जा।
- 13अपने दास इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को स्मरण कर, जिन से तू ने अपनी ही किरिया खाकर यह कहा था, कि मै तुम्हारे वंश को आकाश के तारों के तुल्य बहुत करूंगा, और यह सारा देश जिसकी मैं ने चर्चा की है तुम्हारे वंश को दूंगा, कि वह उसके अधिकारी सदैव बने रहें।
Cross references
- Deuteronomy 9:18–20 व्यवस्थाविवरण 9:18–20तब तुम्हारे उस महापाप के कारण जिसे करके तुम ने यहोवा की दृष्टि में बुराई की, और उसे रीस दिलाई थी, मैं यहोवा के साम्हने मुंह के बल गिर पड़ा, और पहिले की नाई, अर्थात् चालीस दिन और चालीस रात तक, न तो रोटी खाई और न पानी पिया। मैं तो यहोवा के उस कोप और जल- जलाहट से डर रहा था, क्योंकि वह तुम से अप्रसन्न होकर तुम्हें सत्यानाश करने को था। परन्तु यहोवा ने उस बार भी मेरी सुन ली। और यहोवा हारून से इतना क्रोधित हुआ कि उसे भी सत्यानाश करना चाहा; परन्तु उसी समय मैं ने हारून के लिये भी प्रार्थना की।
- Deuteronomy 9:26–29 व्यवस्थाविवरण 9:26–29और मैं ने यहोवा से यह प्रार्थना की, कि हे प्रभु यहोवा, अपना प्रजारूपी निज भाग, जिनको तू ने अपने महान् प्रताप से छुड़ा लिया है, और जिनको तू ने अपने बलवन्त हाथ से मि से निकाल लिया है, उन्हें नष्ट न कर। अपने दास इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को स्मरण कर; और इन लोगों की कठोरता, और दुष्टता, और पाप पर दृष्टि न कर, जिस से ऐसा न हो कि जिस देश से तू हम को निकालकर ले आया है, वहां से लोग कहने लगें, कि यहोवा उन्हें उस देश में जिसके देश का वचन उनको दिया था नहीं पहुंचा सका, और उन से बैर भी रखता था, इसी कारण उस ने उन्हें जंगल में निकालकर मार डाला है। ये लोग तेरी प्रजा और निज भाग हैं, जिनको तू ने अपने बड़े सामर्थ्य और बलवन्त भुजा के द्वारा निकाल ले आया है।।
- Psalm 106:23 भजन संहिता 106:23इसलिये उस ने कहा, कि मैं इन्हें सत्यानाश कर डालता यदि मेरा चुना हुआ मूसा जोखिम के स्थान में उनके लिये खड़ा न होता ताकि मेरी जलजलाहट को ठण्डा करे कहीं ऐसा न हो कि मैं उन्हें नाश कर डालूं।।
- Numbers 16:22 गिनती 16:22तब वे मुंह के बल गिरके कहने लगे, हे ईश्वर, हे सब प्राणियों के आत्माओं के परमेश्वर, क्या एक पुरूष के पाप के कारण तेरा क्रोध सारी मण्डली पर होगा?
- Numbers 11:11 गिनती 11:11तब मूसा ने यहोवा से कहा, तू अपने दास से यह बुरा व्यवहार क्यों करता है? और क्या कारण है कि मैं ने तेरी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया, कि तू ने इन सब लोगों का भार मुझ पर डाला है?
- Jeremiah 12:1–2 यिर्मयाह 12:1–2हे यहोवा, यदि मैं तुझ से मुक़ मा लड़ूं, तौभी तू धम है; मुझे अपने साथ इस विषय पर वादविवाद करने दे। दुष्टों की चाल क्यों सफंल होती है? क्या कारण है कि विश्वासघाती बहुत सुख से रहते हैं? तू उनको बोता और वे जड़ भी पकड़ते; वे बढ़ते और फलते भी हैं; तू उनके मुंह के निकट है परन्तु उनके मनों से दूर है।
- Isaiah 63:17 यशायाह 63:17हे यहोवा, तू क्यों हम को अपने मार्गों से भटका देता, और हमारे मन ऐसे कठोर करता है कि हम तेरा भय नहीं मानते? अपने दास, अपने निज भाग के गोत्रों के निमित्त लौट आ।
- Psalm 74:1–2 भजन संहिता 74:1–2हे परमेश्वर, तू ने हमें क्यों सदा के लिये छोड़ दिया है? तेरी कोपाग्नि का धुआं तेरी चराई की भेंड़ों के विरूद्ध क्यों उठ रहा है? अपनी मण्डली को जिसे तू ने प्राचीनकाल में मोल लिया था, और अपने निज भाग का गोत्रा होने के लिये छुड़ा लिया था, और इस सिरयोन पर्वत को भी, जिस पर तू ने वास किया था, स्मारण कर!
Original words (Hebrew)
- Moses · H4872מֹשֶׁה Môsheh
- besought · H2470חָלָה châlâh
- God · H430אֱלֹהִים ʼĕlôhîym
- said · H559אָמַר ʼâmar
- wrath · H639אַף ʼaph
- hot · H2734חָרָה chârâh
- people · H5971עַם ʻam
- forth · H3318יָצָא yâtsâʼ
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- Egypt · H4714מִצְרַיִם Mitsrayim
- great · H1419גָּדוֹל gâdôwl
- power · H3581כֹּחַ kôach
- mighty · H2389חָזָק châzâq
- hand · H3027יָד yâd