Genesis · chapter 1 · verse 20
Genesis 1:20 in Hindi
फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें।
Phir parameshvar ne kahaa, jal jeevit praaniyom se bahut hee bhar jaae, aur pakshee pruthvee ke oopar aakaash kem antar mem uden.
Genesis 1:20 in English
- King James Version (KJV)
- And God said, Let the waters bring forth abundantly the moving creature that hath life, and fowl [that] may fly above the earth in the open firmament of heaven.
- World English Bible (WEB)
- God said, “Let the waters abound with living creatures, and let birds fly above the earth in the open expanse of the sky.”
- American Standard Version (ASV)
- And God said, Let the waters swarm with swarms of living creatures, and let birds fly above the earth in the open firmament of heaven.
- Bible in Basic English (BBE)
- And God said, Let the waters be full of living things, and let birds be in flight over the earth under the arch of heaven.
- Darby Translation (DBY)
- And God said, Let the waters swarm with swarms of living souls, and let fowl fly above the earth in the expanse of the heavens.
- Webster's Bible (WBS)
- And God said, Let the waters bring forth abundantly the moving creature that hath life, and fowl [that] may fly above the earth in the open firmament of heaven.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And God saith, 'Let the waters teem with the teeming living creature, and fowl let fly on the earth on the face of the expanse of the heavens.'
Read in context
- 18तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
- 19तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।।
- 20फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें।
- 21ठसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल- जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
- 22और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो- फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें।
Cross references
- Psalm 104:24–25 भजन संहिता 104:24–25हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है। इसी प्रकार समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, और उस में अनगिनित जलचरी जीव- जन्तु, क्या छोटे, क्या बड़े भरे पड़े हैं।
- Genesis 2:19 उत्पत्ति 2:19और यहोवा परमेश्वर भूमि में से सब जाति के बनैले पशुओं, और आकाश के सब भँाति के पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखे, कि वह उनका क्या क्या नाम रखता है; और जिस जिस जीवित प्राणी का जो जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया।
- 1 Kings 4:33 1 राजा 4:33फिर उसने लबानोन के देवदारुओं से ले कर भीत में से उगते हुए जूफा तक के सब पेड़ों की चर्चा और पशुओं पक्षियों और रेंगने वाले जन्तुओं और मछलियों की चर्चा की।
- Psalm 148:10 भजन संहिता 148:10हे वन- पशुओं और सब घरैलू पशुओं, हे रेंगनेवाले जन्तुओं और हे पक्षियों!
- Genesis 1:30 उत्पत्ति 1:30और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया।
- Genesis 1:7 उत्पत्ति 1:7तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।
- Genesis 1:22 उत्पत्ति 1:22और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो- फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें।
- Genesis 8:17 उत्पत्ति 8:17क्या पक्षी, क्या पशु, क्या सब भांति के रेंगनेवाले जन्तु जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, जितने शरीरधारी जीवजन्तु तेरे संग हैं, उस सब को अपने साथ निकाल ले आ, कि पृथ्वी पर उन से बहुत बच्चे उत्पन्न हों; और वे फूलें- फलें, और पृथ्वी पर फैल जाएं।
- Genesis 1:14 उत्पत्ति 1:14फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों।
- Acts 17:25 प्रेरितों के काम 17:25न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्वास और सब कुछ देता है।
Original words (Hebrew)
- God · H430אֱלֹהִים ʼĕlôhîym
- said · H559אָמַר ʼâmar
- waters · H4325מַיִם mayim
- abundantly · H8317שָׁרַץ shârats
- creature · H8318שֶׁרֶץ sherets
- hath · H5315נֶפֶשׁ nephesh
- life · H2416חַי chay
- fowl · H5775עוֹף ʻôwph
- fly · H5774עוּף ʻûwph
- above · H5921עַל ʻal
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- open · H6440פָּנִים pânîym
- firmament · H7549רָקִיעַ râqîyaʻ
- heaven · H8064שָׁמַיִם shâmayim