Genesis · chapter 32 · verse 4
Genesis 32:4 in Hindi
तब याकूब ने राहेल और लिआ: को, मैदान में अपनी भेड़- बकरियों के पास, बुलवाकर कहा,
Tab yaakoob ne raahel aur liaa: ko, maidaan mem apanee bheda- bakariyom ke paas, bulavaakar kahaa,
Genesis 32:4 in English
- King James Version (KJV)
- And he commanded them, saying, Thus shall ye speak unto my lord Esau; Thy servant Jacob saith thus, I have sojourned with Laban, and stayed there until now:
- World English Bible (WEB)
- He commanded them, saying, “This is what you shall tell my lord, Esau: ‘This is what your servant, Jacob, says. I have lived as a foreigner with Laban, and stayed until now.
- American Standard Version (ASV)
- And he commanded them, saying, Thus shall ye say unto my lord Esau: Thus saith thy servant Jacob, I have sojourned with Laban, and stayed until now:
- Bible in Basic English (BBE)
- And he gave them orders to say these words to Esau: Your servant Jacob says, Till now I have been living with Laban:
- Darby Translation (DBY)
- And he commanded them, saying, Thus shall ye speak to my lord, to Esau: Thy servant Jacob speaks thus — With Laban have I sojourned and tarried until now;
- Webster's Bible (WBS)
- And he commanded them, saying, Thus shall ye speak to my lord Esau: Thy servant Jacob saith thus, I have sojourned with Laban, and stayed there till now:
- Young's Literal Translation (YLT)
- and commandeth them, saying, 'Thus do ye say to my lord, to Esau: Thus said thy servant Jacob, With Laban I have sojourned, and I tarry until now;
Read in context
- 2और याकूब ने लाबान के मुखड़े पर दृष्टि की और ताड़ लिया, कि वह उसके प्रति पहले के समान नहीं है।
- 3तब यहोवा ने याकूब से कहा, अपने पितरों के देश और अपनी जन्मभूमि को लौट जा, और मैं तेरे संग रहूंगा।
- 4तब याकूब ने राहेल और लिआ: को, मैदान में अपनी भेड़- बकरियों के पास, बुलवाकर कहा,
- 5तुम्हारे पिता के मुखडे से मुझे समझ पड़ता है, कि वह तो मुझे पहिले की नाई अब नहीं देखता; पर मेरे पिता का परमेश्वर मेरे संग है।
- 6और तुम भी जानती हो, कि मैं ने तुम्हारे पिता की सेवा शक्ति भर की है।
Cross references
- 1 Peter 3:6 1 पतरस 3:6जैसे सारा इब्राहीम की आज्ञा में रहती और उसे स्वामी कहती थी: सो तुम भी यदि भलाई करो, और किसी प्रकार के भय से भयभीत न हो तो उस की बेंटियां ठहरोगी।।
- Genesis 23:6 उत्पत्ति 23:6हे हमारे प्रभु, हमारी सुन: तू तो हमारे बीच में बड़ा प्रधान है: सो हमारी कब्रों में से जिसको तू चाहे उस में अपने मुर्दे को गाड़; हम में से कोई तुझे अपनी कब्र के लेने से न रोकेगा, कि तू अपने मुर्दे को उस में गाड़ने न पाए।
- Genesis 32:18 उत्पत्ति 32:18और जितने पशुओं को वह प नराम में इकट्ठा करके धनाढय हो गया था, सब को कनान में अपने पिता इसहाक के पास जाने की मनसा से, साथ ले गया।
- 1 Samuel 26:17 1 शमूएल 26:17तब शाऊल ने दाऊद का बोल पहिचानकर कहा, हे मेरे बेटे दाऊद, क्या यह तेरा बोल है, दाऊद ने कहा, हां, मेरे प्रभु राजा, मेरा ही बोल है।
- Proverbs 15:1 नीतिवचन 15:1कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है।
- 1 Kings 20:32 1 राजा 20:32तब वे कमर में टाट और सिर पर रस्सियां बान्ध कर इस्राएल के राजा के पास जा कर कहने लगे, तेरा दास बेन्हदद तुझ से कहता है, कृपा कर के मुझे जीवित रहने दे। राजा ने उत्तर दिया, क्या वह अब तक जीवित है? वह तो मेरा भाई है।
- Genesis 33:8 उत्पत्ति 33:8तब उस ने पूछा, तेरा यह बड़ा दल जो मुझ को मिला, उसका क्या प्रयोजन है? उस ने कहा, यह कि मेरे प्रभु की अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो।
- Luke 14:11 लूका 14:11और जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।।
- Genesis 27:37 उत्पत्ति 27:37इसहाक ने एसाव को उत्तर देकर कहा, सुन, मैं ने उसको तेरा स्वामी ठहराया, और उसके सब भाइयों को उसके अधीन कर दिया, और अनाज और नया दाखमधु देकर उसको पुष्ट किया है: सो अब, हे मेरे पुत्रा, मैं तेरे लिये क्या करूं?
- Genesis 27:29 उत्पत्ति 27:29राज्य राज्य के लोग तेरे अधीन हों, और देश देश के लोग तुझे दण्डवत् करें: तू अपने भाइयों का स्वामी हो, और तेरी माता के पुत्रा तुझे दण्डवत् करें: जो तुझे शाप दें सो आप ही स्रापित हों, और जो तुझे आशीर्वाद दें सो आशीष पाएं।।
- Genesis 32:5 उत्पत्ति 32:5तुम्हारे पिता के मुखडे से मुझे समझ पड़ता है, कि वह तो मुझे पहिले की नाई अब नहीं देखता; पर मेरे पिता का परमेश्वर मेरे संग है।
- Ecclesiastes 10:4 सभोपदेशक 10:4यदि हाकिम का क्रोध तुझ पर भड़के, तो अपना स्थान न छोड़ना, क्योंकि धीरज धरने से बड़े बड़े पाप रूकते हैं।।