Genesis · chapter 33 · verse 8
Genesis 33:8 in Hindi
तब उस ने पूछा, तेरा यह बड़ा दल जो मुझ को मिला, उसका क्या प्रयोजन है? उस ने कहा, यह कि मेरे प्रभु की अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो।
Tab us ne poochhaa, teraa yah badaa dal jo mujh ko milaa, usakaa kyaa prayojan hai? Us ne kahaa, yah ki mere prabhu kee anugrah kee drushti mujh par ho.
Genesis 33:8 in English
- King James Version (KJV)
- And he said, What [meanest] thou by all this drove which I met? And he said, [These are] to find grace in the sight of my lord.
- World English Bible (WEB)
- Esau said, “What do you mean by all this company which I met?” Jacob said, “To find favor in the sight of my lord.”
- American Standard Version (ASV)
- And he said, What meanest thou by all this company which I met? And he said, To find favor in the sight of my lord.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he said, What were all those herds which I saw on the way? And Jacob said, They were an offering so that I might have grace in my lord's eyes.
- Darby Translation (DBY)
- And he said, What [meanest] thou by all the drove which I met? And he said, To find favour in the eyes of my lord.
- Webster's Bible (WBS)
- And he said, What [meanest] thou by all this drove which I met? And he said, [these are] to find grace in the sight of my lord.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he saith, 'What to thee [is] all this camp which I have met?' and he saith, 'To find grace in the eyes of my lord.'
Read in context
- 6तब लड़कों समेत लौंडियों ने निकट आकर दण्डवत् की।
- 7फिर लड़कों समेत लिआ: निकट आई, और उन्हों ने भी दण्डवत् की: पीछे यूसुफ और राहेल ने भी निकट आकर दण्डवत् की।
- 8तब उस ने पूछा, तेरा यह बड़ा दल जो मुझ को मिला, उसका क्या प्रयोजन है? उस ने कहा, यह कि मेरे प्रभु की अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो।
- 9एसाव ने कहा, हे मेरे भाई, मेरे पास तो बहुत है; जो कुछ तेरा है सो तेरा ही रहे।
- 10याकूब ने कहा, नहीं नहीं, यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो, तो मेरी भेंट ग्रहण कर: क्योंकि मैं ने तेरा दर्शन पाकर, मानो परमेश्वर का दर्शन पाया है, और तू मुझ से प्रसन्न हुआ है।
Cross references
- Genesis 32:5 उत्पत्ति 32:5तुम्हारे पिता के मुखडे से मुझे समझ पड़ता है, कि वह तो मुझे पहिले की नाई अब नहीं देखता; पर मेरे पिता का परमेश्वर मेरे संग है।
- Genesis 39:5 उत्पत्ति 39:5और जब से उस ने उसको अपने घर का और अपनी सारी सम्पत्ति का अधिकारी बनाया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिद्दी के घर पर आशीष देने लगा; और क्या घर में, क्या मैदान में, उसका जो कुछ था, सब पर यहोवा की आशीष होने लगी।
- Esther 2:17 एस्तेर 2:17और राजा ने एस्तेर को और सब स्त्रियों से अधिक प्यार किया, और और सब कुंवारियों से अधिक उसके अनुग्रह और कृपा की दृष्टि उसी पर हुई, इस कारण उस ने उसके सिर पर राजमुकुट रखा और उसको वशती के स्थान पर रानी बनाया।
- Genesis 32:13–20 उत्पत्ति 32:13–20मैं उस बेतेल का ईश्वर हूं, जहां तू ने एक खम्भे पर तेल डाल दिया, और मेरी मन्नत मानी थी: अब चल, इस देश से निकलकर अपनी जन्मभूमि को लौट जा। तब राहेल और लिआ: ने उस से कहा, क्या हमारे पिता के घर में अब भी हमारा कुछ भाग वा अंश बचा है? क्या हम उसकी दृष्टि में पराये न ठहरीं? देख, उस ने हम को तो बेच डाला, और हमारे रूपे को खा बैठा है। सो परमेश्वर ने हमारे पिता का जितना धन ले लिया है, सो हमारा, और हमारे लड़केबालों को है: अब जो कुछ परमेश्वर ने तुझ से कहा सो कर। तब याकूब ने अपने लड़केबालों और स्त्रियों को ऊंटों पर चढ़ाया; और जितने पशुओं को वह प नराम में इकट्ठा करके धनाढय हो गया था, सब को कनान में अपने पिता इसहाक के पास जाने की मनसा से, साथ ले गया। लाबान तो अपनी भेड़ों का ऊन कतरने के लिये चला गया था। और राहेल अपने पिता के गृहदेवताओं को चुरा ले गई। सो याकूब लाबान अरामी के पास से चोरी से चला गया, उसको न बताया कि मैं भागा जाता हूं।