Hosea · chapter 12 · verse 12
Hosea 12:12 in Hindi
याकूब अराम के मैदान में भाग गया था; वहां इस्राएल ने एक पत्नी के लिये सेवा की, और पत्नी के लिये वह चरवाही करता था।
Yaakoob araam ke maidaan mem bhaag gayaa thaa; vahaam israael ne ek patnee ke liye sevaa kee, aur patnee ke liye vah charavaahee karataa thaa.
Hosea 12:12 in English
- King James Version (KJV)
- And Jacob fled into the country of Syria, and Israel served for a wife, and for a wife he kept [sheep].
- World English Bible (WEB)
- Jacob fled into the country of Aram. Israel served to get a wife. For a wife he tended flocks and herds.
- American Standard Version (ASV)
- And Jacob fled into the field of Aram, and Israel served for a wife, and for a wife he kept [sheep].
- Bible in Basic English (BBE)
- And Jacob went in flight into the field of Aram, and Israel became a servant for a wife, and for a wife he kept sheep.
- Darby Translation (DBY)
- And Jacob fled into the country of Syria, and Israel served for a wife, and for a wife he kept [sheep].
- Webster's Bible (WBS)
- And Jacob fled into the country of Syria, and Israel served for a wife, and for a wife he kept [sheep] .
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Jacob doth flee to the country of Aram, And Israel doth serve for a wife, Yea, for a wife he hath kept watch.
Read in context
- 10मैं ने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कीं, और बार बार दर्शन देता रहा; और भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा दृष्टान्त कहता आया हूं।
- 11क्या गिलाद कुकर्मी नहीं? वे पूरे छली हो गए हैं। गिल्गाल में बैल बलि किए जाते हैं, वरन उनकी वेदियां उन ढेरों के समान हैं जो खेत की रेघारियों के पास हों।
- 12याकूब अराम के मैदान में भाग गया था; वहां इस्राएल ने एक पत्नी के लिये सेवा की, और पत्नी के लिये वह चरवाही करता था।
- 13एक भविष्यद्वक्ता के द्वारा यहोवा इस्राएल को मि से निकाल ले आया, और भविष्यद्वक्ता ही के द्वारा उसकी रक्षा हुई।
- 14एप्रैम ने अत्यन्त रिस दिलाई है; इसलिये उसका किया हुआ खून उसी के ऊपर बना रहेगा, और उस ने अपने परमेश्वर के नाम में जो बट्टा लगाया है, वह उसकी को लौटाता जाएगा।।
Cross references
- Genesis 31:41 उत्पत्ति 31:41बीस वर्ष तक मैं तेरे घर में रहो; चौदह वर्ष तो मै ने तेरी दोनो बेटियों के लिये, और छ: वर्ष तेरी भेड़- बकरियों के लिये सेवा की: और तू ने मेरी मजदूरी को दस बार बदल डाला।
- Genesis 29:18–28 उत्पत्ति 29:18–28सो याकूब ने, जो राहेल से प्रीति रखता था, कहा, मैं तेरी छोटी बेटी राहेल के लिये सात बरस तेरी सेवा करूंगा। लाबान ने कहा, उसे पराए पुरूष को देने से तुझ को देना उत्तम होगा; सो मेरे पास रह। सो याकूब ने राहेल के लिये सात बरस सेवा की; और वे उसको राहेल की प्रीति के कारण थोड़े ही दिनों के बराबर जान पड़े। तब याकूब ने लाबान से कहा, मेरी पत्नी मुझे दे, और मैं उसके पास जाऊंगा, क्योंकि मेरा समय पूरा हो गया है। सो लाबान ने उस स्थान के सब मनुष्यों को बुलाकर इकट्ठा किया, और उनकी जेवनार की। सांझ के समय वह अपनी बेटी लिआ: को याकूब के पास ले गया, और वह उसके पास गया। और लाबान ने अपनी बेटी लिआ: को उसकी लौंडी होने के लिये अपनी लौंडी जिल्पा दी। भोर को मालूम हुआ कि यह तो लिआ है, सो उस ने लाबान से कहा यह तू ने मुझ से क्या किया है? मैं ने तेरे साथ रहकर जो तेरी सेवा की, सो क्या राहेल के लिये नहीं की? फिर तू ने मुझ से क्यों ऐसा छल किया है? लाबान ने कहा, हमारे यहां ऐसी रीति नहीं, कि जेठी से पहिले दूसरी का विवाह कर दें। इसका सप्ताह तो पूरा कर; फिर दूसरी भी तुझे उस सेवा के लिये मिलेगी जो तू मेरे साथ रहकर और सात वर्ष तक करेगा। सो याकूब ने ऐसा ही किया, और लिआ: के सप्ताह को पूरा किया; तब लाबान ने उसे अपनी बेटी राहेल को भी दिया, कि वह उसकी पत्नी हो।
- Genesis 28:1–22 उत्पत्ति 28:1–22तब इसहाक ने याकूब को बुलाकर आशीर्वाद दिया, और आज्ञा दी, कि तू किसी कनानी लड़की को न ब्याह लेना। प नराम में अपने नाना बतूएल के घर जाकर वहां अपने मामा लाबान की एक बेटी को ब्याह लेना। और सर्वशक्तिमान ईश्वर तुझे आशीष दे, और फुला- फलाकर बढ़ाए, और तू राज्य राज्य की मण्डली का मूल हो। और वह तुझे और तेरे वंश को भी इब्राहीम की सी आशीष दे, कि तू यह देश जिस में तू परदेशी होकर रहता है, और जिसे परमेश्वर ने इब्राहीम को दिया था, उसका अधिकारी हो जाए। और इसहाक ने याकूब को विदा किया, और वह प नराम को अरामी बतूएल के उस पुत्रा लाबान के पास चला, जो याकूब और एसाव की माता रिबका का भाई था। जब इसहाक ने याकूब को आशीर्वाद देकर प नराम भेज दिया, कि वह वहीं से पत्नी ब्याह लाए, और उसको आशीर्वाद देने के समय यह आज्ञा भी दी, कि तू किसी कनानी लड़की को ब्याह न लेना; और याकूब माता पिता की मानकर प नराम को चल दिया; तब एसाव यह सब देख के और यह भी सोचकर, कि कनानी लड़कियां मेरे पिता इसहाक को बुरी लगती हैं, इब्राहीम के पुत्रा इश्माएल के पास गया, और इश्माएल की बेटी महलत को, जो नबायोत की बहिन भी, ब्याहकर अपनी पत्नियों मे मिला लिया।। सो याकूब बेर्शेबा से निकलकर हारान की ओर चला। और उस ने किसी स्थान में पहुंचकर रात वहीं बिताने का विचार किया, क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था; सो उस ने उस स्थान के पत्थरों में से एक पत्थर ले अपना तकिया बनाकर रखा, और उसी स्थान में सो गया। तब उस ने स्वप्न में क्या देखा, कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुंचा है: और परमेश्वर के दूत उस पर से चढ़ते उतरते हैं। और यहोवा उसके ऊपर खड़ा होकर कहता है, कि मैं यहोवा, तेरे दादा इब्राहीम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूं: जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूंगा। और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएंगे। और सुन, मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊंगा: मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा न कर लूं तब तक तुझ को न छोडूंगा। तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था। और भय खाकर उस ने कहा, यह स्थान क्या ही भयानक है! यह तो परमेश्वर के भवन को छोड़ और कुछ नहीं हो सकता; वरन यह स्वर्ग का फाटक ही होगा। भोर को याकूब तड़के उठा, और अपने तकिए का पत्थर लेकर उसका खम्भा खड़ा किया, और उसके सिरे पर तेल डाल दिया। और उस ने उस स्थान का नाम बेतेल रखा; पर उस नगर का नाम पहिले लूज था। और याकूब ने यह मन्नत मानी, कि यदि परमेश्वर मेरे संग रहकर इस यात्रा में मेरी रक्षा करे, और मुझे खाने के लिये रोटी, और पहिनने के लिये कपड़ा दे, और मैं अपने पिता के घर में कुशल क्षेम से लौट आऊं: तो यहोवा मेरा परमेश्वर ठहरेगा। और यह पत्थर, जिसका मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा: और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूंगा।।
- Genesis 27:43 उत्पत्ति 27:43सो अब, हे मेरे पुत्रा, मेरी सुन, और हारान को मेरे भाई लाबान के पास भाग जा;
- Deuteronomy 26:5 व्यवस्थाविवरण 26:5तब तू अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार कहना, कि मेरा मूलपुरूष एक अरामी मनुष्य था जो मरने पर था; और वह अपने छोटे से परिवार समेत मि को गया, और वहां परदेशी होकर रहा; और वहंा उस से एक बड़ी, और सामर्थी, और बहुत मनुष्यों से भरी हुई जाति उत्पन्न हुई।
- Genesis 32:27–28 उत्पत्ति 32:27–28तू क्यों चुपके से भाग आया, और मुझ से बिना कुछ कहे मेरे पास से चोरी से चला आया; नहीं तो मैं तुझे आनन्द के साथ मृदंग और वीणा बजवाते, और गीत गवाते विदा करता? तू ने तो मुझे अपने बेटे बेटियों को चूमने तक न दिया? तू ने मूर्खता की है।