Isaiah · chapter 6 · verse 11
Isaiah 6:11 in Hindi
तब मैं ने पूछा, हे प्रभु कब तक? उस ने कहा, जब तक नगर न उजड़े और उन में कोई रह न जाए, और घरों में कोई मनुष्य न रह जाए, और देश उजाड़ और सुनसान हो जाए,
Tab maim ne poochhaa, he prabhu kab tak? Us ne kahaa, jab tak nagar na ujade aur un mem koee rah na jaae, aur gharom mem koee manushy na rah jaae, aur desh ujaad aur sunasaan ho jaae,
Isaiah 6:11 in English
- King James Version (KJV)
- Then said I, Lord, how long? And he answered, Until the cities be wasted without inhabitant, and the houses without man, and the land be utterly desolate,
- World English Bible (WEB)
- Then I said, “Lord, how long?” He answered, “Until cities are waste without inhabitant, houses without man, the land becomes utterly waste,
- American Standard Version (ASV)
- Then said I, Lord, how long? And he answered, Until cities be waste without inhabitant, and houses without man, and the land become utterly waste,
- Bible in Basic English (BBE)
- Then I said, Lord, how long? And he said in answer, Till the towns are waste and unpeopled, and the houses have no men, and the land becomes completely waste,
- Darby Translation (DBY)
- And I said, Lord, how long? And he said, Until the cities be wasted, without inhabitant, and the houses without man, and the land become an utter desolation,
- Webster's Bible (WBS)
- Then said I, Lord, how long? And he answered, Until the cities shall be wasted without inhabitant, and the houses without man, and the land be utterly desolate;
- Young's Literal Translation (YLT)
- And I say, 'Till when, O Lord?' And He saith, 'Surely till cities have been wasted without inhabitant, And houses without man, And the ground be wasted — a desolation,
Read in context
- 9उस ने कहा, जा, और इन लोगों से कह, सुनते ही रहो, परन्तु न समझो; देखते ही रहो, परन्तु न बूझो।
- 10तू इन लोगों के मन को मोटे और उनके कानों को भारी कर, और उनकी आंखों को बन्द कर; ऐसा न हो कि वे आंखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से बूझें, और मन फिरावें और चंगे हो जाएं।
- 11तब मैं ने पूछा, हे प्रभु कब तक? उस ने कहा, जब तक नगर न उजड़े और उन में कोई रह न जाए, और घरों में कोई मनुष्य न रह जाए, और देश उजाड़ और सुनसान हो जाए,
- 12और यहोवा मनुष्यों को उस में से दूर कर दे, और देश के बहुत से स्थान निर्जन हो जाएं।
- 13चाहे उसके निवासियों का दसवां अंश भी रह जाए, तौभी वह नाश किया जाएगा, परनतु जैसे छोटे वा बड़े बांजवृक्ष को काट डालने पर भी उसका ठूंठ बना रहता है, वैसे ही पवित्रा वंश उसका ठूंठ ठहरेगा।।
Cross references
- Psalm 90:13 भजन संहिता 90:13हे यहोवा लौट आ! कब तक? और अपने दासों पर तरस खा!
- Psalm 94:3 भजन संहिता 94:3हे यहोवा, दुष्ट लोग कब तक, दुष्ट लोग कब तक डींग मारते रहेंगे?
- Isaiah 3:26 यशायाह 3:26और उसके फाटकों में सांस भरना और विलाप करना होगा; और भूमि पर अकेली बैठी रहेगी।
- Isaiah 1:7 यशायाह 1:7तुम्हारा देश उजड़ा पड़ा है, तुम्हारे नगर भस्म हो गए हैं; तुम्हारे खेतों को परदेशी लोग तुम्हारे देखते ही निगल रहे हैं; वह परदेश्यिों से नाश किए हुए देश के समान उजाड़ है।
- Leviticus 26:31 लैव्यव्यवस्था 26:31और मैं तुम्हारे नगरों को उजाड़ दूंगा, और तुम्हारे पवित्रा स्थानों को उजाड़ दूंगा, और तुम्हारा सुखदायक सुगन्ध ग्रहण न करूंगा।
- Isaiah 24:1–12 यशायाह 24:1–12सुनों, यहोवा पृथ्वी को निर्जन और सुनसान करने पर है, वह उसको उलटकर उसके रहनेवालों को तितर बितर करेग। और जैसी यजमान की वैसी याजक की; जैसी दास की वैसी स्वमी की; जैसी दासी की वैसी स्वामिनी की; जैसी लेनेवाले की वैसी बेचनेवाले की; जैसी उधार देनेवाले की वैसी उधार लेनेवाले की; जैसी ब्याज लेनेवाले की वैसी ब्याज देनेवाले की; सभों की एक ही दशा होगी। पृथ्वी शून्य और सत्यानाश हो जाएगी; क्योंकि यहोवा ही ने यह कहा है।। पृथ्वी विलाप करेगी और मुर्झाएगी, जगत कुम्हलाएगा और मुर्झा जाएगा; पृथ्वी के महान लोग भी कुम्हला जाएंगे। पृथ्वी अपने रहनेवालों के कारण अशुद्ध हो गई है, क्योंकि उन्हों ने व्यवस्था का उल्लंघन किया और विधि को पलट डाला, और सनातन वाचा को तोड़ दिया है। इस कारण पृथ्वी को शाप ग्रसेगा और उस में रहनेवाले दोषी ठहरेंगे; और इसी कारण पृथ्वी के निवासी भस्म होंगे और थोड़े ही मनुष्य रह जाएंगे। नया दाखमधु जाता रहेगा, दाखलता मुर्झा जाएगी, और जितने मन में आनन्द करते हैं सब लम्बी लम्बी सांस लेंगे। डफ का सुखदाई शब्द बन्द हो जाएगा, वीणा का सुखदाई शब्द शान्त हो जाएगा। वे गाकर फिर दाखमधु न पीएंगे; पीनेवाले को मदिरा कड़ुकी लगेगी। गड़बड़ी मचानेवाली नगरी नाश होगी, उसका हर एक घर ऐसा बन्द किया जाएगा कि कोई पैठ न सकेगा। सड़कों में लोग दाखमधु के लिये चिल्लाएंगे; आनन्द मिट जाएगा: देश का सारा हर्ष जाता रहेगा। नगर उजाड़ ही उजाड़ रहेगा, और उसके फाटक तोड़कर नाश किए जाएंगे।
- Psalm 79:5 भजन संहिता 79:5हे यहोवा, तू कब तक लगातार क्रोध करता रहेगा? तुझ में आग की सी जलन कब तक भड़कती रहेगी?
- Psalm 74:10 भजन संहिता 74:10हे परमेश्वर द्रोही कब तक नामधराई करता रहेगा? क्या शत्रु, तेरे नाम की निन्दा सदा करता रहेगा?