Jeremiah · chapter 10 · verse 15
Jeremiah 10:15 in Hindi
वे व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य हैं; जब उनके दण्ड का समय आएगा तब वे नाश हो जाएंगीं।
Ve vyarth aur thatthe hee ke yogy haim; jab unake dand kaa samay aaegaa tab ve naash ho jaaengeen.
Jeremiah 10:15 in English
- King James Version (KJV)
- They [are] vanity, [and] the work of errors: in the time of their visitation they shall perish.
- World English Bible (WEB)
- They are vanity, a work of delusion. In the time of their visitation they will perish.
- American Standard Version (ASV)
- They are vanity, a work of delusion: in the time of their visitation they shall perish.
- Bible in Basic English (BBE)
- They are nothing, a work of error: in the time of their punishment, destruction will overtake them.
- Darby Translation (DBY)
- They are vanity, a work of delusion: in the time of their visitation they shall perish.
- Webster's Bible (WBS)
- They [are] vanity, [and] the work of errors: in the time of their visitation they shall perish.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Vanity [are] they, work of erring ones, In the time of their inspection they perish.
Read in context
- 13जब वह बोलता है तब आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, और पृथ्वी की छोर से वह कुहरे को उठाता है। वह वर्षा के लिये बिजली चमकाता, और अपने भणडार में से पवन चलाता है।
- 14सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित हैं; अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण सब सुनारों की आशा टूटती है; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें झूठी हैं, और उन में सांस ही नहीं है।
- 15वे व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य हैं; जब उनके दण्ड का समय आएगा तब वे नाश हो जाएंगीं।
- 16परन्तु याकूब का निज भाग उनके समान नहीं है, क्योंकि वह तो सब का सृजनहार है, और इस्राएल उसके निज भाग का गोत्रा है; सेनाओं का यहोवा उसका नाम है।
- 17हे घेरे हुए नगर की रहनेवाली, अपनी गठरी भूमि पर से उठा!
Cross references
- Isaiah 41:24 यशायाह 41:24देखो, तुम कुछ नहीं हो, तुम से कुछ नहीं बनता; जो कोई तुम्हें जानता है वह घृणित है।।
- Jeremiah 14:22 यिर्मयाह 14:22क्या अन्यजातियों की मूरतों में से कोई वर्षा कर सकता है? क्या आकाश झड़ियां लगा सकता है? हे हमारे परमेश्वर यहोवा, क्या तू ही इन सब बातों का करनेवाला नहीं है? हम तेरा ही आसरा देखते रहेंगे, क्योंकि इन सारी वस्तुओं का सृजनहार तू ही है।
- Jeremiah 51:18 यिर्मयाह 51:18वे तो व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य है; जब उनके नाश किए जाने का समय आएगा, तब वे नाश ही होंगी।
- Isaiah 2:18–21 यशायाह 2:18–21और मूरतें सब की सब नष्ट हो जाएंगी। और जब यहोवा पृथ्वी के कम्पित करने के लिये उठेगा, तब उसके भय के कारण और उसके प्रताप के मारे लोग चट्टानों की गुुफाओं और भूमि के बिलों में जा घुसेंगे।। उस दिन लोग अपनी चान्दी- सोने की मूरतों को जिन्हें उन्हों ने दण्डवत् करने के लिये बनाया था, छछून्दरों और चमगीदड़ों के आगे फेंकेंगे, और जब यहोवा पृथ्वी को कम्पित करने के लिये उठेगा तब वे उसके भय के कारण और उसके प्रताप के मारे चट्टानों की दरारों ओर पहाड़ियों के छेदों में घुसेंगे।
- Jonah 2:8 योना 2:8जो लोग धोखे की व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, वे अपने करूणानिधान को छोड़ देते हैं।
- Jeremiah 8:12 यिर्मयाह 8:12कया वे घृणित काम करके लज्जित हुए? नहीं, वे कुछ भी लज्जित नहीं हुए, वे लज्जित होना जानते ही नहीं। इस कारण जब और लेग नीचे गिरें, तब वे भी गिरेंगे; जब उनके दण्ड का समय आएगा, तब वे भी ठोकर खाकर गिरेंगे, यहोवा का यही वचन है।
- Jeremiah 8:19 यिर्मयाह 8:19मुझे अपने लोगों की चिल्लाहट दूर के देश से सुनाई देती है: क्या यहोवा सिरयोन में नहीं हैं? क्या उसका राजा उस में नहीं? उन्हों ने क्यों मुझ को अपनी खोदी हुई मूरतों और परदेश की व्यर्थ वस्तुओं के द्वारा क्यों क्रोध दिलाया है?
- Zechariah 13:2 जकर्याह 13:2और सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि उस समय मैं इस देश मे से मूर्तो के नाम मिटा डालूंगा, और वे फिर स्मरण में न रहेंगी; और मैं भविष्यद्वक्ताओं और अशुद्ध आत्मा को इस देश में से निकाल दूंगा।
- Jeremiah 10:11 यिर्मयाह 10:11तुम उन से यह कहना, ये देवता जिन्हों ने आकाश और पृथ्वी को नहीं बनाया वे पृथ्वी के ऊपर से और आकाश के नीचे से नष्ट हो जाएंगे।
- Isaiah 41:29 यशायाह 41:29सुनो, उन सभों के काम अनर्थ हैं; उनके काम तुच्छ हैं, और उनकी ढली हुई मूत्तियां वायु और मिथ्या हैं।।
- 1 Samuel 12:21 1 शमूएल 12:21और मत मुड़ना; नहीं तो ऐसी व्यर्थ वस्तुओं के पीछे चलने लगोगे जिन से न कुछ लाभ पहुंचेगा, और न कुछ छुटकारा हो सकता है, क्योंकि वे सब व्यर्थ ही हैं।
- Jeremiah 10:8 यिर्मयाह 10:8परन्तु वे पशु सरीखे निरे मूर्ख हैं; मूर्त्तियों से क्या शिक्षा? वे तो काठ ही हैं!