Jeremiah · chapter 14 · verse 10
Jeremiah 14:10 in Hindi
यहोवा ने इन लोगों के विषय यों कहा: इनको ऐसा भटकना अच्छा लगता है; ये कुकर्म में चलने से नहीं रूके; इसलिये यहोवा इन से प्रसन्न नहीं है, वह इनका अधर्म स्मरण करेगा और उनके पाप का दण्ड देगा।
Yahovaa ne in logom ke vishay yom kahaa: inako aisaa bhatakanaa achchhaa lagataa hai; ye kukarm mem chalane se naheem rooke; isaliye yahovaa in se prasann naheem hai, vah inakaa adharm smaran karegaa aur unake paap kaa dand degaa.
Jeremiah 14:10 in English
- King James Version (KJV)
- Thus saith the LORD unto this people, Thus have they loved to wander, they have not refrained their feet, therefore the LORD doth not accept them; he will now remember their iniquity, and visit their sins.
- World English Bible (WEB)
- The LORD says to this people: “Even so they have loved to wander. They have not restrained their feet. Therefore the LORD does not accept them. Now he will remember their iniquity, and punish them for their sins.”
- American Standard Version (ASV)
- Thus saith Jehovah unto this people, Even so have they loved to wander; they have not refrained their feet: therefore Jehovah doth not accept them; now will he remember their iniquity, and visit their sins.
- Bible in Basic English (BBE)
- This is what the Lord has said about this people: Even so they have been glad to go from the right way; they have not kept their feet from wandering, so the Lord has no pleasure in them; now he will keep their wrongdoing in mind and send punishment for their sins.
- Darby Translation (DBY)
- Thus saith Jehovah to this people: Even so have they loved to wander, they have not refrained their feet; and Jehovah hath no delight in them: now will he remember their iniquity, and visit their sins.
- Webster's Bible (WBS)
- Thus saith the LORD to this people, Thus have they loved to wander, they have not restrained their feet, therefore the LORD doth not accept them; he will now remember their iniquity, and visit their sins.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Thus said Jehovah concerning this people: Well they have loved to wander, Their feet they have not restrained, And Jehovah hath not accepted them, Now doth He remember their iniquity, And inspect their sin.
Read in context
- 8हे इस्राएल के आधार, संकट के समय उसका बचानेवाला तू ही है, तू क्यों इस देश में परदेशी की नाई है? तू क्यों उस बटोही के समान है जो रात भर रहने के लिये कहीं टिकता हो?
- 9तू क्यों एक विस्मित पुरूष या ऐसे वीर के समान है जो बचा न सके? तौभी हे यहोवा तू हमारे बीच में है, और हम तेरे कहलाते हैं; इसलिये हमको न तज।
- 10यहोवा ने इन लोगों के विषय यों कहा: इनको ऐसा भटकना अच्छा लगता है; ये कुकर्म में चलने से नहीं रूके; इसलिये यहोवा इन से प्रसन्न नहीं है, वह इनका अधर्म स्मरण करेगा और उनके पाप का दण्ड देगा।
- 11फिर यहोवा ने मुझ से कहा, इस प्रजा की भलाई के लिये प्रार्थना मत कर।
- 12चाहे वे उपवास भी करें, तौभी मैं इनकी दुहाई न सुनूंगा, और चाहे वे होमबलि और अन्नबलि चढ़ाएं, तौभी मैं उन से प्रसन्न न होऊंगा; मैं तलवार, महंगी और मरी के द्वारा इनका अन्त कर डालूंगा।
Cross references
- Hosea 9:9 होशे 9:9वे गिबा के दिनों की भांति अत्यन्त बिगड़े हैं; सो वह उनके अधर्म की सुधि लेकर उनके पाप का दण्ड देगा।।
- Psalm 119:101 भजन संहिता 119:101मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।
- Hosea 8:13 होशे 8:13वे मेरे लिये बलिदान तो करते हैं, और पशु बलि भी करते हैं, परन्तु उसका फल मांस ही है; वे आप ही उसे खाते हैं; परन्तु यहोवा उन से प्रसन्न नहीं होता। अब वह उनके अधर्म की सुधि लेकर उनके पाप का दण्ड देगा; वे मि में लौट जाएंगे।
- Amos 5:22 आमोस 5:22चाहे तुम मेरे लिये होमबलि और अन्नबलि चढ़ाओ, तौभी मैं प्रसन्न न हूंगा, और तुम्हारे पाले हुए पशुओं के मेलबलियों की ओर न ताकूंगा।
- Jeremiah 6:20 यिर्मयाह 6:20मेरे लिये जो लोबान शबा से, और सुगन्धित नरकट जो दूर देश से आता है, इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारे होमबलियों से मैं प्रसन्न नहीं हूँ, और न तुम्हारे मेलबलि मुझे मीठे लगते हैं।
- Hebrews 8:12 इब्रानियों 8:12क्योंकि मैं उन के अधर्म के विषय मे दयावन्त हूंगा, और उन के पापों को फिर स्मरण न करूंगा।
- Jeremiah 31:34 यिर्मयाह 31:34और तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है कि छोटे से ले कर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा।
- Psalm 109:14–15 भजन संहिता 109:14–15उसके पितरों का अधर्म यहोवा को स्मरण रहे, और उसकी माता का पाप न मिटे! वह निरन्तर यहोवा के सम्मुख रहे, कि वह उनका नाम पृथ्वी पर से मिटा डाले!
- Malachi 1:8–13 मलाकी 1:8–13जब तुम अन्धे पशु को बलि करने के लिये समीप ले आते हो तो क्या यह बुरा नहीं? और जब तुम लंगड़े वा रोगी पशु को ले आते हो, तो क्या यह बुरा नहीं? अपने हाकिम के पास ऐसी भेंट ले आओ; क्या वह तुम से प्रसन्न होगा वा तुम पर अनुग्रह करेगा? सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।। और अब मैं तुम से कहता हूं, ईश्वर से प्रार्थना करो कि वह हम लोगों पर अनुग्रह करे। यह तुम्हारे हाथ से हुआ है; तब कया तुम समझते हो कि परमेश्वर तुम में से किसी का पक्ष करेगा? सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। भला होता कि तुम में से कोई मन्दिर के किवाड़ों को बन्द करता कि तुम मेरी वेदी पर व्यर्थ आग जलाने न पाते! सेनाओं के यहोवा का यह वचन है, मैं तुम से कदापि प्रसन्न नहीं हूं, और न तुम्हारे हाथ से भेंट ग्रहण करूंगा। क्योंकि उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक अन्यजातियों में मेरा नाम महान है, और हर कहीं मेरे नाम पर धूप और शुद्ध भेंट चढ़ाई जाती है; क्योंकि अन्यजातियों में मेरा नाम महान है, सेनाओं का यही वचन है। परन्तु तुम लोग उसको यह कहकर अपवित्रा ठहराते हो कि यहोवा की मेज अशुद्ध है, और जो भोजनवस्तु उस पर से मिलती है वह भी तुच्छ है। फिर तुम यह भी कहते हो, कि यह कैसा बड़ा उपद्रव है! सेनाओं के यहोवा का यह वचन है। तुम ने उस भोजनवस्तु के प्रति नाक भौं सिकोड़ी, और अत्याचार से प्राप्त किए हुए और लंगड़े और रोगी पशु की भेंट ले आते हो! क्या मैं ऐसी भेंट तुम्हारे हाथ से ग्रहण करूं? यहोवा का यही वचन है।
- Jeremiah 2:36 यिर्मयाह 2:36तू क्यों नया मार्ग पकड़ने के लिये इतनी डांवाडोल फिरती है? जैसे अश्शूरियों से तू लज्जित हुई वैसे ही मिस्रियों से भी होगी।
- Hosea 11:9 होशे 11:9मैं अपने क्रोध को भड़कने न दूंगा, और न मैं फिर एप्रैम को नाश करूंगा; क्योंकि मैं मनुष्य नहीं परमेश्वर हूं, मैं तेरे बीच में रहनेवाला पवित्रा हूं; मैं क्रोध करके न आऊंगा।।
- Hosea 11:7 होशे 11:7मेरी प्रजा मुझ से फिर जाने में लगी रहती है; यद्यपि वे उनको परमप्रधान की ओर बुलाते हैं, तौभी उन में से कोई भी मेरी महिमा नहीं करता।।