Job · chapter 15 · verse 3
Job 15:3 in Hindi
क्या वह निष्फल वचनों से, वा व्यर्थ बातों से वादविवाद करे?
Kyaa vah nishphal vachanom se, vaa vyarth baatom se vaadavivaad kare?
Job 15:3 in English
- King James Version (KJV)
- Should he reason with unprofitable talk? or with speeches wherewith he can do no good?
- World English Bible (WEB)
- Should he reason with unprofitable talk, or with speeches with which he can do no good?
- American Standard Version (ASV)
- Should he reason with unprofitable talk, Or with speeches wherewith he can do no good?
- Bible in Basic English (BBE)
- Will he make arguments with words in which is no profit, and with sayings which have no value?
- Darby Translation (DBY)
- Reasoning with unprofitable talk, and with speeches which do no good?
- Webster's Bible (WBS)
- Should he reason with unprofitable talk? or with speeches with which he can do no good?
- Young's Literal Translation (YLT)
- To reason with a word not useful? And speeches — no profit in them?
Read in context
- 1तब तेमानी एलीपज ने कहा,
- 2क्या बुध्दिमान को उचित है कि अज्ञानता के साथ उत्तर दे, वा उपने अन्तेकरण को पूरबी पवन से भरे?
- 3क्या वह निष्फल वचनों से, वा व्यर्थ बातों से वादविवाद करे?
- 4वरन तू भय मानना छोड़ देता, और ईश्वर का ध्यान करना औरों से छुड़ाता है।
- 5तू अपने मुंह से अपना अधर्म प्रगट करता है, और धूर्त्त लोगों के बोलने की रीति पर बोलता है।
Cross references
- Colossians 4:6 कुलुस्सियों 4:6तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए।
- Matthew 12:36–37 मत्ती 12:36–37और मै तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा।।
- Job 13:4–5 अय्यूब 13:4–5परन्तु तुम लोग झूठी बात के गढ़नेवाले हो; तुम सबके सब निकम्मे वैद्य हो। भला होता, कि तुम बिलकुल चुप रहते, और इस से तुम बुध्दिमान ठहरते।
- Malachi 3:13–15 मलाकी 3:13–15यहोवा यह कहता है, तुम ने मेरे विरूद्ध ढिठाई की बातें कही हैं। परन्तु तुम पूछते हो, हम ने तेरे विरूद्ध में क्या कहा है? तुम ने कहा है कि परमेश्वर की सेवा करनी व्यर्थ है। हम ने जो उसके बताए हुए कामों को पूरा किया और सेनाओं के यहोवा के डर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए चले हैं, इस से क्या लाभ हुआ? अब से हम अभिमानी लोगों को धन्य कहते हैं; क्योंकि दुराचारी तो सफल बन गए हैं, वरन वे परमेश्वर की परीक्षा करने पर भी बच गए हैं।।
- Job 16:2–3 अय्यूब 16:2–3ऐसी बहुत सी बातें मैं सुन चुका हूँ, तुम सब के सब निकम्मे शान्तिदाता हो। क्या व्यर्थ बातों का अन्त कभी होगा? तू कौन सी बात से झिड़ककर उत्तर देता।
- Job 26:1–3 अय्यूब 26:1–3तब अरयूब ने कहा, निर्बल जन की तू ने क्या ही बड़ी सहायता की, और जिसकी बांह में सामर्थ्य नहीं, उसको तू ने कैसे सम्भाला है? निर्बुध्दि मनुष्य को तू ने क्या ही अच्छी सम्मति दी, और अपनी खरी बुध्दि कैसी भली भांति प्रगट की है?
- 1 Timothy 6:4–5 1 तीमुथियुस 6:4–5तो वह अभिमानी हो गया, और कुछ नहीं जानता, बरन उसे विवाद और शब्दों पर तर्क करने का रोग है, जिन से डाह, और झगड़े, और निन्दा की बातें, और बुरे बुरे सन्देह। और उन मनुष्यों में व्यर्थ रगड़े झगड़े उत्पन्न होते हैं, जिन की बुद्धि बिगड़ गई है और वे सत्य से विहीन हो गए हैं, जो समझते हैं कि भक्ति कमाई का द्वार है।