Colossians · chapter 4 · verse 6
Colossians 4:6 in Hindi
तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए।
Tumhaaraa vachan sadaa anugrah sahit aur salonaa ho, ki tumhem har manushy ko uchit reeti se uttar denaa aa jaae.
Colossians 4:6 in English
- King James Version (KJV)
- Let your speech [be] alway with grace, seasoned with salt, that ye may know how ye ought to answer every man.
- World English Bible (WEB)
- Let your speech always be with grace, seasoned with salt, that you may know how you ought to answer each one.
- American Standard Version (ASV)
- Let your speech be always with grace, seasoned with salt, that ye may know how ye ought to answer each one.
- Bible in Basic English (BBE)
- Let your talk be with grace, mixed with salt, so that you may be able to give an answer to everyone.
- Darby Translation (DBY)
- [Let] your word [be] always with grace, seasoned with salt, [so as] to know how ye ought to answer each one.
- Webster's Bible (WBS)
- Let your speech [be] always with grace, seasoned with salt, that ye may know how ye ought to answer every man.
- Young's Literal Translation (YLT)
- your word always in grace — with salt being seasoned — to know how it behoveth you to answer each one.
Read in context
- 4और उसे ऐसा प्रगट करूं, जैसा मुझे करना उचित है।
- 5अवसर को बहुमूल्य समझकर बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो।
- 6तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए।
- 7प्रिय भाई और विश्वासयोग्य सेवक, तुखिकुस जो प्रभु में मेरा सहकर्मी है, मेरी सब बातें तुम्हें बता देगा।
- 8उसे मैं ने इसलिये तुम्हारे पास भेजा है, कि तुम्हें हमारी दशा मालूम हो जाए और वह तुम्हारे हृदयों को शान्ति दे।
Cross references
- Ephesians 4:29 इफिसियों 4:29कोई गन्दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुननेवालों पर अनुग्रह हो।
- 1 Peter 3:15 1 पतरस 3:15पर मसीह को प्रभु जानकर अपने अपने मन में पवित्रा समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ।
- Ecclesiastes 10:12 सभोपदेशक 10:12बुद्धिमान के वचनों के कारण अनुग्रह होता है, परन्तु मूर्ख अपने वचनों के द्वारा नाश होते हैं।
- Mark 9:50 मरकुस 9:50नमक अच्छा है, पर यदि नमक की नमकीनी जाती रहे, तो उसे किस से स्वादित करोगे? अपने में नमक रखो, और आपस में मेल मिलाप से रहो।।
- Proverbs 15:4 नीतिवचन 15:4शान्ति देनेवाली बात जीवन- वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है।
- Proverbs 15:7 नीतिवचन 15:7बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।
- Colossians 3:16 कुलुस्सियों 3:16मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
- Proverbs 22:17–18 नीतिवचन 22:17–18कान लगाकर बुद्धिमानों के वचन सुन, और मेरी ज्ञान की बातों की ओर मन लगा; यदि तू उसको अपने मन में रखे, और वे सब तेरे मुंह से निकला भी करें, तो यह मनभावनी बात होगी।
- Proverbs 16:21–24 नीतिवचन 16:21–24जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझवाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है। जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। मनभावने वचन मधुभरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हडि्डयों को हरी- भरी करते हैं।
- Matthew 5:13 मत्ती 5:13तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंआ जाए।
- Proverbs 26:4–5 नीतिवचन 26:4–5मूर्ख को उसको मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे। मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर न देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे बुद्धिमान ठहरे।
- Matthew 12:34–35 मत्ती 12:34–35हे सांप के बच्चों, तुम बुरे होकर क्योंकर अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है। भला, मनुष्य मन के भले भण्डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य बुरे भण्डार से बुरी बातें निकालता है।
Original words (Greek)
- Let · G741ἀρτύω artýō
- your · G5216ὑμῶν hymōn
- speech · G3056λόγος lógos
- alway · G3842πάντοτε pántote
- with · G1722ἐν en
- grace · G5485χάρις cháris
- seasoned · G741ἀρτύω artýō
- salt · G217ἅλας hálas
- know · G1492εἴδω eídō
- how · G4459πῶς pōs
- ye · G5209ὑμᾶς hymâs
- ought · G1163δεῖ deî
- answer · G611ἀποκρίνομαι apokrínomai
- every · G1538ἕκαστος hékastos
- man · G1520εἷς heîs