John · chapter 5 · verse 37
John 5:37 in Hindi
और पिता जिस ने मुझे भेजा है, उसी ने मेरी गवाही दी है: तुम ने न कभी उसका शब्द सुना, और न उसका रूप देखा है।
Aur pitaa jis ne mujhe bhejaa hai, usee ne meree gavaahee dee hai: tum ne na kabhee usakaa shabd sunaa, aur na usakaa roop dekhaa hai.
John 5:37 in English
- King James Version (KJV)
- And the Father himself, which hath sent me, hath borne witness of me. Ye have neither heard his voice at any time, nor seen his shape.
- World English Bible (WEB)
- The Father himself, who sent me, has testified about me. You have neither heard his voice at any time, nor seen his form.
- American Standard Version (ASV)
- And the Father that sent me, he hath borne witness of me. Ye have neither heard his voice at any time, nor seen his form.
- Bible in Basic English (BBE)
- And the Father himself who sent me has given witness about me. Not one of you has ever given ear to his voice; his form you have not seen.
- Darby Translation (DBY)
- And the Father who has sent me himself has borne witness concerning me. Ye have neither heard his voice at any time, nor have seen his shape,
- Webster's Bible (WBS)
- And the Father himself who hath sent me, hath borne testimony concerning me. Ye have neither heard his voice at any time, nor seen his shape.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And the Father who sent me Himself hath testified concerning me; ye have neither heard His voice at any time, nor His appearance have ye seen;
Read in context
- 35वह जो जलता और चमकता हुआ दीपक था; और तुम्हें कुछ देर तक उस की ज्योति में, मगन होना अच्छा लगा।
- 36परन्तु मेरे पास जो गवाही है वह यूहन्ना की गवाही से बड़ी है: क्योंकि जो काम पिता ने मुझे पूरा करने को सौंपा है अर्थात् यही काम जो मैं करता हूं, वे मेरे गवाह हैं, कि पिता ने मुझे भेजा है।
- 37और पिता जिस ने मुझे भेजा है, उसी ने मेरी गवाही दी है: तुम ने न कभी उसका शब्द सुना, और न उसका रूप देखा है।
- 38और उसके वचन को मन में स्थिर नहीं रखते क्योंकि जिसे उस ने भेजा उस की प्रतीति नहीं करते।
- 39तुम पवित्रा शास्त्रा में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है।
Cross references
- John 8:18 यूहन्ना 8:18एक तो मैं आप अपनी गवाही देता हूं, और दूसरा पिता मेरी गवाही देता है जिस ने मुझे भेजा।
- Matthew 3:17 मत्ती 3:17और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि यह मेरा प्रिय पुत्रा है, जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं।।
- John 1:18 यूहन्ना 1:18परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्रा जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।।
- 1 Timothy 1:17 1 तीमुथियुस 1:17अब सनातन राजा अर्थात् अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।।
- 1 John 4:20 1 यूहन्ना 4:20यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिस उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता।
- 1 John 4:12 1 यूहन्ना 4:12परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
- 1 Timothy 6:16 1 तीमुथियुस 6:16और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा, और न कभी देख सकता है: उस की प्रतिष्ठा और राज्य युगानुयुग रहेगा। आमीन।।
- Matthew 17:5 मत्ती 17:5वह बोल ही रहा था, कि देखो, एक उजले बादल ने उन्हें छा लिया, और देखो; उस बादल में से यह शब्द निकला, कि यह मेरा प्रिय पुत्रा है, जिस से मैं प्रसन्न हूं: इस की सुनो।
- John 6:27 यूहन्ना 6:27नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्रा तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात् परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है।
- 1 John 1:1–2 1 यूहन्ना 1:1–2उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)।
- Exodus 20:19 निर्गमन 20:19और वे मूसा से कहने लगे, तू ही हम से बातें कर, तब तो हम सुन सकेंगे; परन्तु परमेश्वर हम से बातें न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएं।
- Deuteronomy 4:12 व्यवस्थाविवरण 4:12तक यहोवा ने उस आग के बीच में से तुम से बातें की; बातों का शब्द तो तुम को सुनाई पड़ा, परन्तु कोई रूप न देखा; केवल शब्द ही शब्द सुन पड़ा।