John · chapter 7 · verse 51
John 7:51 in Hindi
क्या हमारी व्यवस्था किसी व्यक्ति को जब तक पहिले उस की सुनकर जान न ले, कि वह क्या करता है; दोषी ठहराती है?
Kyaa hamaaree vyavasthaa kisee vyakti ko jab tak pahile us kee sunakar jaan na le, ki vah kyaa karataa hai; doshee thaharaatee hai?
John 7:51 in English
- King James Version (KJV)
- Doth our law judge [any] man, before it hear him, and know what he doeth?
- World English Bible (WEB)
- “Does our law judge a man unless it first hears from him personally and knows what he does?”
- American Standard Version (ASV)
- Doth our law judge a man, except it first hear from himself and know what he doeth?
- Bible in Basic English (BBE)
- Is a man judged by our law before it has given him a hearing and has knowledge of what he has done?
- Darby Translation (DBY)
- Does our law judge a man before it have first heard from himself, and know what he does?
- Webster's Bible (WBS)
- Doth our law judge [any] man before it heareth him, and knoweth what he doeth?
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'Doth our law judge the man, if it may not hear from him first, and know what he doth?'
Read in context
- 49परन्तु ये लोग जो व्यवस्था नहीं जानते, स्त्रापित हैं।
- 50नीकुदेमुस ने, (जो पहिले उसके पास आया था और उन में से एक था), उन से कहा।
- 51क्या हमारी व्यवस्था किसी व्यक्ति को जब तक पहिले उस की सुनकर जान न ले, कि वह क्या करता है; दोषी ठहराती है?
- 52उन्हों ने उसे उत्तर दिया; क्या तू भी गलील का है ढूंढ़ और देख, कि गलील से कोई भविष्यद्वक्ता प्रगट नहीं होने का।
- 53तब सब कोई अपने अपने घर को गए।।
Cross references
- Proverbs 18:13 नीतिवचन 18:13जो बिना बात सुने उत्तर देता है, वह मूढ़ ठहरता है, और उसका अनादर होता है।
- Deuteronomy 1:17 व्यवस्थाविवरण 1:17न्याय करते समय किसी का पक्ष न करना; जैसे बड़े की वैसे ही छोटे मनुष्य की भी सुनना; किसी का मुॅह देखकर न डरना, क्योंकि न्याय परमेश्वर का काम है; और जो मुक मा तुम्हारे लिये कठिन हो, वह मेरे पास ले आना, और मैं उसे सुनूंगा।
- Deuteronomy 19:15–19 व्यवस्थाविवरण 19:15–19किसी मनुष्य के विरुद्ध किसी प्रकार के अधर्म वा पाप के विषय में, चाहे उसका पाप कैसा ही क्यों न हो, एक ही जन की साक्षी न सुनना, परन्तु दो वा तीन साक्षीयों के कहने से बात पक्की ठहरे। यदि कोई झूठी साक्षी देने वाला किसी के विरुद्ध यहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो, तो वे दोनों मनुष्य, जिनके बीच ऐसा मुकद्दमा उठा हो, यहोवा के सम्मुख, अर्थात उन दिनों के याजकों और न्यायियों के साम्हने खड़े किए जाएं; तब न्यायी भली भांति पूछपाछ करें, और यदि यह निर्णय पाए कि वह झूठा साक्षी है, और अपने भाई के विरुद्ध झूठी साक्षी दी है तो अपने भाई की जैसी भी हानि करवाने की युक्ति उसने की हो वैसी ही तुम भी उसकी करना; इसी रीति से अपने बीच में से ऐसी बुराई को दूर करना।
- Acts 23:3 प्रेरितों के काम 23:3तब पौलुस ने उस से कहा; हे चूना फिरी हुई भीत, परमेश्वर तुझे मारेगा: तू व्यवस्था के अनुसार मेरा न्याय करने को बैठा है, और फिर क्या व्यवस्था के विरूद्ध मुझे मारने की आज्ञा देता है?
- Deuteronomy 17:8–11 व्यवस्थाविवरण 17:8–11यदि तेरी बस्तियों के भीतर कोई झगड़े की बात हो, अर्थात् आपस के खून, वा विवाद, वा मारपीट का कोई मुक मा उठे, और उसका न्याय करना तेरे लिये कठिन जान पड़े, तो उस स्थान को जाकर जो तेरा परमेश्वर यहोवा चुन लेगा; लेवीय याजकों के पास और उन दिनो के न्यायियों के पास जाकर पूछताछ करना, कि वे तुम को न्याय की बातें बतलाएं। और न्याय की जैसी बात उस स्थान के लोग जो यहोवा चुन लेगा तुझे बता दें, उसी के अनुसार करना; और जो व्यवस्था वे तुझे दें उसी के अनुसार चलने में चौकसी करना; व्यवस्था की जो बात वे तुझे बताएं, और न्याय की जो बात वे तुझ से कहें, उसी के अनुसार करना; जो बात वे तुझ को बाताएं उस से दहिने वा बाएं न मुड़ना।
- Deuteronomy 17:6 व्यवस्थाविवरण 17:6जो प्राणदण्ड के योग्य ठहरे वह एक ही की साक्षी से न मार डाला जाए, किन्तु दो वा तीन मनुष्यों की साक्षी से मार डाला जाए।