Judges · chapter 8 · verse 2
Judges 8:2 in Hindi
उस ने उन से कहा, मैं ने तुम्हारे समान भला अब किया ही क्या है? क्या एप्रैम की छोड़ी हुई दाख भी अबीएजेर की सब फसल से अच्छी नहीं है?
Us ne un se kahaa, maim ne tumhaare samaan bhalaa ab kiyaa hee kyaa hai? Kyaa epraim kee chhodee huee daakh bhee abeeejer kee sab phasal se achchhee naheem hai?
Judges 8:2 in English
- King James Version (KJV)
- And he said unto them, What have I done now in comparison of you? [Is] not the gleaning of the grapes of Ephraim better than the vintage of Abi-ezer?
- World English Bible (WEB)
- He said to them, “What have I now done in comparison with you? Isn’t the gleaning of the grapes of Ephraim better than the vintage of Abiezer?
- American Standard Version (ASV)
- And he said unto them, What have I now done in comparison with you? Is not the gleaning of the grapes of Ephraim better than the vintage of Abiezer?
- Bible in Basic English (BBE)
- And he said to them, What have I done in comparison with you? Is not that which Ephraim took up after the grape-cutting better than all the grapes which Abiezer got in from the grape-cutting?
- Darby Translation (DBY)
- And he said to them, What have I done now in comparison with you? Are not the gleanings of Ephraim better than the vintage of Abi-ezer?
- Webster's Bible (WBS)
- And he said to them, What have I done now in comparison of you? [Is] not the gleaning of the grapes of Ephraim better than the vintage of Abiezer?
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he saith unto them, 'What have I done now like you? are not the gleanings of Ephraim better than the harvest of Abi-Ezer?
Read in context
- 1तब एप्रैमी पुरूषों ने गिदाने से कहा, तू ने हमारे साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया है, कि जब तू मिद्यान से लड़ने को चला तब हम को नहीं बुलवाया? सो उन्हों ने उस से बड़ा झगड़ा किया।
- 2उस ने उन से कहा, मैं ने तुम्हारे समान भला अब किया ही क्या है? क्या एप्रैम की छोड़ी हुई दाख भी अबीएजेर की सब फसल से अच्छी नहीं है?
- 3तुम्हारे ही हाथों में परमेश्वर ने ओरब और जेब नाम मिद्यान के हाकिमों को कर दिया; तब तुम्हारे बराबर मैं कर ही क्या सका? जब उस ने यह बात कही, तब उनका जी उसकी ओर से ठंड़ा हो गया।।
- 4तब गिदोन और उसके संग तीनों सौ पुरूष, जो थके मान्दे थे तौभी खदेड़ते ही रहे थे, यरदन के तीर आकर पार हो गए।
Cross references
- James 1:19–20 याकूब 1:19–20हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
- 1 Corinthians 13:4–7 1 कुरिन्थियों 13:4–7प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम डाल नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सन्य से आनन्दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
- Judges 6:34 न्यायियों 6:34तब यहोवा का आत्मा गिदोन में समाया; और उस ने नरसिंगा फूंका, तब अबीएजेरी उसकी सुनने के लिये इकट्ठे हुए।
- Judges 6:11 न्यायियों 6:11फिर यहोवा का दूत आकर उस बांजवृक्ष के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्रा गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूं इसलिये झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे।
- Philippians 2:2–3 फिलिप्पियों 2:2–3तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
- James 3:13–18 याकूब 3:13–18तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है। पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्ड न करना, और न तो झूठ बोलना। यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है बरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्कर्म भी होता है। पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्रा होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। और मिलाप करानेवालों के लिये धार्मिकता का फल मेल- मिलाप के साथ बोया जाता है।।
- Galatians 5:14–15 गलातियों 5:14–15क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। पर यदि तुम एक दूसरे को दांत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।।