Judges · chapter 8 · verse 29
Judges 8:29 in Hindi
योआश का पुत्रा यरूब्बाल तो जाकर अपने घर में रहने लगा।
Yoaash kaa putraa yaroobbaal to jaakar apane ghar mem rahane lagaa.
Judges 8:29 in English
- King James Version (KJV)
- And Jerubbaal the son of Joash went and dwelt in his own house.
- World English Bible (WEB)
- Jerubbaal the son of Joash went and lived in his own house.
- American Standard Version (ASV)
- And Jerubbaal the son of Joash went and dwelt in his own house.
- Bible in Basic English (BBE)
- And Jerubbaal, the son of Joash, went back to his house and was living there.
- Darby Translation (DBY)
- And Jerubbaal the son of Joash went and dwelt in his house.
- Webster's Bible (WBS)
- And Jerubbaal the son of Joash went and dwelt in his own house.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Jerubbaal son of Joash goeth and dwelleth in his own house,
Read in context
- 27उनका गिदोन ने एक एपोद बनवाकर अपने ओप्रा नाम नगर में रखा; और सब इस्राएल वहां व्यभिचारिणी की नाईं उसके पीछे हो लिया, और वह गिदोन और उसके घराने के लिये फन्दा ठहरा।
- 28इस प्रकार मिद्यान इस्रालियों से दब गया, और फिर सिर न उठाया। और गिदोन के जीवन भर अर्थात् चालीस वर्ष तक देश चैन से रहा।
- 29योआश का पुत्रा यरूब्बाल तो जाकर अपने घर में रहने लगा।
- 30और गिदोन के सत्तर बेटे उत्पन्न हुए, क्योंकि उसके बहुत स्त्रियां थीं।
- 31और उसकी जो एक रखेली शकेम में रहती थी उसके एक पुत्रा उत्पन्न हुआ, और गिदोन ने उसका नाम अबीमेलेक रखा।
Cross references
- Judges 6:32 न्यायियों 6:32इसलिये उस दिन गिदोन का नाम यह कहकर यरूब्बाल रखा गया, कि इस ने जो बाल की वेदी गिराई है तो इस पर बाल आप वाद विवाद कर ले।।
- Judges 7:1 न्यायियों 7:1तब गिदोन जो यरूब्बाल भी कहलाता है और सब लोग जो उसके संग थे सवेरे उठे, और हरोद नाम सोते के पास अपने डेरे खड़े किए; और मिद्यानियों की छावनी उनकी उत्तरी ओर मोरे नाम पहाड़ी के पास तराई में पड़ी थी।।
- 1 Samuel 12:11 1 शमूएल 12:11इसलिये यहोवा ने यरूब्बाल, बदान, यिप्तह, और शमूएल को भेजकर तुम को तुम्हारे चारों ओर के शत्रुओं के हाथ से छुड़ाया; और तुम निडर रहने लगे।
- Nehemiah 5:14–15 नहेमायाह 5:14–15फिर जब से मैं यहूदा देश में उनका अधिपति ठहराया गया, अर्थात् राजा अर्तक्षत्रा के बीसवें वर्ष से ले उसके बत्तीसवें वर्ष तक, अर्थात् बारह वर्ष तक मैं और मेरे भाई अधिपति के हक का भोजन खाते रहे। परन्तु पहिले अधिपति जो मुझ से आगे थे, वह प्रजा पर भार डालते थे, और उन से रोटी, और दाखमधु, और इस से अधिक चालीस शेकेल चान्दी लेते थे, वरन उनके सेवक भी प्रजा के ऊपर अधिकार जताते थे; परन्तु मैं ऐसा नहीं करता था, क्योंकि मैं यहोवा का भय मानता था।