Luke · chapter 12 · verse 15
Luke 12:15 in Hindi
और उस ने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता।
Aur us ne un se kahaa, chaukas raho, aur har prakaar ke lobh se apane aap ko bachaae rakho: kyonki kisee kaa jeevan us kee sampatti kee bahutaayat se naheem hotaa.
Luke 12:15 in English
- King James Version (KJV)
- And he said unto them, Take heed, and beware of covetousness: for a man’s life consisteth not in the abundance of the things which he possesseth.
- World English Bible (WEB)
- He said to them, “Beware! Keep yourselves from covetousness, for a man’s life doesn’t consist of the abundance of the things which he possesses.”
- American Standard Version (ASV)
- And he said unto them, Take heed, and keep yourselves from all covetousness: for a man’s life consisteth not in the abundance of the things which he possesseth.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he said to them, Take care to keep yourselves free from the desire for property; for a man's life is not made up of the number of things which he has.
- Darby Translation (DBY)
- And he said to them, Take heed and keep yourselves from all covetousness, for [it is] not because a man is in abundance [that] his life is in his possessions.
- Webster's Bible (WBS)
- And he said to them, Take heed, and beware of covetousness: for a man's life consisteth not in the abundance of the things which he possesseth.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he said unto them, 'Observe, and beware of the covetousness, because not in the abundance of one's goods is his life.'
Read in context
- 13फिर भीड़ में से एक ने उस से कहा, हे गुरू, मेरे भाई से कह, कि पिता की संपत्ति मुझे बांट दे।
- 14उस ने उस से कहा; हे मनुष्य, किस ने मुझे तुम्हारा न्यायी या बांटनेवाला नियुक्त किया है?
- 15और उस ने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता।
- 16उस ने उन से एक दृष्टान्त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई।
- 17तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्या करूं, क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं।
Cross references
- Hebrews 13:5 इब्रानियों 13:5तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उस ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा।
- 1 Timothy 6:6–10 1 तीमुथियुस 6:6–10पर सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्हीं पर सन्तोष करना चाहिए। पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है।।
- Psalm 119:36–37 भजन संहिता 119:36–37मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
- Proverbs 15:16 नीतिवचन 15:16घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है,
- Proverbs 16:16 नीतिवचन 16:16बुद्धि की प्राप्ति चोखे सोने से क्या ही उत्तम है! और समझ की प्राप्ति चान्दी से अति योग्य है।
- Matthew 6:25–26 मत्ती 6:25–26इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्रा से बढ़कर नहीं? आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।
- Luke 16:14 लूका 16:14फरीसी जो लोभी थे, ये सब बातें सुन कर उसे ठट्ठों में उड़ाने लगे।
- Ecclesiastes 5:10–16 सभोपदेशक 5:10–16जो रूपये से प्रीति रखता है वह रूपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से: यह भी व्यर्थ है। जब सम्पत्ति बढ़ती है, तो उसके खानेवाले भी बढ़ते हैं, तब उसके स्वामी को इसे छोड़ और क्या लाभ होता है कि उस सम्पत्ति को अपनी आंखों से देखे? परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तौभी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन के बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती। मैं ने धरती पर एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात् वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो, और वह किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ मे कुछ नही रहता। जैसा वह मां के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके। यह भी एक बड़ी बला है कि जैसा वह आया, ठीक वैसा ही वह जाएगा; उसे उस व्यर्थ परिश्रम से और क्या लाभ है?
- 2 Timothy 3:2 2 तीमुथियुस 3:2क्योंकि मनुष्य अपस्वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता- पिता की आज्ञा टालनेवाले, कृतघ्न, अपवित्रा।
- Luke 8:14 लूका 8:14जो झाड़ियों में गिरा, सो वे हैं, जो सुनते हैं, पर होते होते चिन्ता और धन और जीवन के सुख विलास में फंस जाते हैं, और उन का फल नहीं पकता।
- Colossians 3:5 कुलुस्सियों 3:5इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात् व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
- Psalm 62:10 भजन संहिता 62:10अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।।