Luke · chapter 16 · verse 13
Luke 16:13 in Hindi
कोई दास दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता: क्योंकि वह तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा; या एक से मिल रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा: तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते॥
Koee daas do svaamiyom kee sevaa naheem kar sakataa: kyonki vah to ek se bair aur doosare se prem rakhegaa; yaa ek se mil rahegaa aur doosare ko tuchchh jaanegaa: tum parameshvar aur dhan donom kee sevaa naheem kar sakate
Luke 16:13 in English
- King James Version (KJV)
- No servant can serve two masters: for either he will hate the one, and love the other; or else he will hold to the one, and despise the other. Ye cannot serve God and mammon.
- World English Bible (WEB)
- No servant can serve two masters, for either he will hate the one and love the other; or else he will hold to one and despise the other. You aren’t able to serve God and Mammon.”
- American Standard Version (ASV)
- No servant can serve two masters: for either he will hate the one, and love the other; or else he will hold to one, and despise the other. Ye cannot serve God and mammon.
- Bible in Basic English (BBE)
- No man may be a servant to two masters: for he will have hate for the one and love for the other; or he will keep to the one and have no respect for the other. You may not be servants of God and of wealth.
- Darby Translation (DBY)
- No servant can serve two masters, for either he will hate the one and will love the other, or he will cleave to the one and despise the other. Ye cannot serve God and mammon.
- Webster's Bible (WBS)
- No servant can serve two masters: for either he will hate the one, and love the other; or else he will hold to the one, and despise the other. Ye cannot serve God and mammon.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'No domestic is able to serve two lords, for either the one he will hate, and the other he will love; or one he will hold to, and of the other he will be heedless; ye are not able to serve God and mammon.'
Read in context
- 11इसलिये जब तुम अधर्म के धन में सच्चे न ठहरे, तो सच्चा तुम्हें कौन सौंपेगा।
- 12और यदि तुम पराये धन में सच्चे न ठहरे, तो जो तुम्हारा है, उसे तुम्हें कौन देगा?
- 13कोई दास दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता: क्योंकि वह तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा; या एक से मिल रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा: तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते॥
- 14फरीसी जो लोभी थे, ये सब बातें सुन कर उसे ठट्ठों में उड़ाने लगे।
- 15उस ने उन से कहा; तुम तो मनुष्यों के साम्हने अपने आप को धर्मी ठहराते हो: परन्तु परमेश्वर तुम्हारे मन को जानता है, क्योंकि जो वस्तु मनुष्यों की दृष्टि में महान है, वह परमेश्वर के निकट घृणित है।
Cross references
- 1 John 2:15–16 1 यूहन्ना 2:15–16तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है।
- Matthew 6:24 मत्ती 6:24कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा; "तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते"।
- James 4:4 याकूब 4:4हे व्यभिचारिणियों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्राता करनी परमेश्वर से बैर करना है? सो जो कोई संसार का मित्रा होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है।
- Romans 8:5–8 रोमियों 8:5–8क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है, और न हो सकता है। और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।
- Joshua 24:15 यहोशू 24:15और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा।
- Luke 14:26 लूका 14:26यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्नी और लड़केबालों और भाइयों और बहिनों बरन अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता।
- Luke 11:23 लूका 11:23जो मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिथराता है।
- Matthew 4:10 मत्ती 4:10तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।
- Luke 16:9 लूका 16:9और मैं तुम से कहता हूं, कि अधर्म के धन से अपने लिये मित्र बना लो; ताकि जब वह जाता रहे, तो वे तुम्हें अनन्त निवासों में ले लें।
- Romans 6:16–22 रोमियों 6:16–22क्या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धार्मिकता है? परन्तु परमशॆवर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के माननेवाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्राता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्रा थे। सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे? क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्रा होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्राता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।