Matthew · chapter 12 · verse 35
Matthew 12:35 in Hindi
भला, मनुष्य मन के भले भण्डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य बुरे भण्डार से बुरी बातें निकालता है।
Bhalaa, manushy man ke bhale bhandaar se bhalee baatem nikaalataa hai; aur buraa manushy bure bhandaar se buree baatem nikaalataa hai.
Matthew 12:35 in English
- King James Version (KJV)
- A good man out of the good treasure of the heart bringeth forth good things: and an evil man out of the evil treasure bringeth forth evil things.
- World English Bible (WEB)
- The good man out of his good treasure brings out good things, and the evil man out of his evil treasure brings out evil things.
- American Standard Version (ASV)
- The good man out of his good treasure bringeth forth good things: and the evil man out of his evil treasure bringeth forth evil things.
- Bible in Basic English (BBE)
- The good man out of his good store gives good things; and the evil man out of his evil store gives evil things.
- Darby Translation (DBY)
- The good man out of the good treasure brings forth good things; and the wicked man out of the wicked treasure brings forth wicked things.
- Webster's Bible (WBS)
- A good man, out of the good treasure of the heart, bringeth forth good things: and an evil man, out of the evil treasure, bringeth forth evil things.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The good man out of the good treasure of the heart doth put forth the good things, and the evil man out of the evil treasure doth put forth evil things.
Read in context
- 33यदि पेड़ को अच्छा कहो, तो उसके फल को भी अच्छा कहो; या पेड़ को निकम्मा कहो; क्योंकि पेड़ फल ही से पहचाना जाता है।
- 34हे सांप के बच्चों, तुम बुरे होकर क्योंकर अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है।
- 35भला, मनुष्य मन के भले भण्डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य बुरे भण्डार से बुरी बातें निकालता है।
- 36और मै तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे।
- 37क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा।।
Cross references
- Colossians 4:6 कुलुस्सियों 4:6तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए।
- Proverbs 15:4 नीतिवचन 15:4शान्ति देनेवाली बात जीवन- वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है।
- Proverbs 15:28 नीतिवचन 15:28धर्मी मन में सोचता है कि क्या उत्तर दूं, परन्तु दुष्टों के मुंह से बुरी बातें उबल आती हैं।
- Colossians 3:16 कुलुस्सियों 3:16मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
- Proverbs 25:11–12 नीतिवचन 25:11–12जैसे चान्दी की टोकरियों में सोनहले सेब हों वैसे ही ठीक समय पर कहा हुआ वचन होता है। जैसे सोने का नत्थ और कुन्दन का जेवन अच्छा लगता है, वैसे ही माननेवाले के कान में बुद्धिमान की डांट भी अच्छी लगती है।
- Ephesians 4:29 इफिसियों 4:29कोई गन्दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुननेवालों पर अनुग्रह हो।
- Matthew 12:34 मत्ती 12:34हे सांप के बच्चों, तुम बुरे होकर क्योंकर अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है।
- Proverbs 10:20–21 नीतिवचन 10:20–21धर्मी के वचन तो उत्तम चान्दी हैं; परन्तु दुष्टों का मन बहुत हलका होता है। धर्मी के वचनों से बहुतों का पालनपोषण होता है, परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने केस्रारण मर जाते हैं।
- Proverbs 16:21–23 नीतिवचन 16:21–23जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझवाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है। जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।
- Proverbs 12:6 नीतिवचन 12:6दुष्टों की बातचीत हत्या करने के लिये घात लगाने के विषय में होती है, परन्तु सीधे लोग अपने मुंह की बात के द्वारा छुड़ानेवाले होते हैं।
- Proverbs 15:23 नीतिवचन 15:23सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है, और अवसर पर कहा हुआ वचन क्या ही भला होता है!
- Psalm 37:30–31 भजन संहिता 37:30–31धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।।