Matthew · chapter 12 · verse 9
Matthew 12:9 in Hindi
वहां से चलकर वह उन की सभा के घर में आया।
Vahaam se chalakar vah un kee sabhaa ke ghar mem aayaa.
Matthew 12:9 in English
- King James Version (KJV)
- And when he was departed thence, he went into their synagogue:
- World English Bible (WEB)
- He departed from there and went into their synagogue.
- American Standard Version (ASV)
- And he departed thence, and went into their synagogue:
- Bible in Basic English (BBE)
- And he went from there into their Synagogue:
- Darby Translation (DBY)
- And, going away from thence, he came into their synagogue.
- Webster's Bible (WBS)
- And when he had departed thence, he went into their synagogue.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And having departed thence, he went to their synagogue,
Read in context
- 7यदि तुम इस का अर्थ जानते कि मैं दया से प्रसन्न हूं, बलिदान से नहीं, तो तुम निर्दोष को दोषी न ठहराते।
- 8मनुष्य का पुत्रा तो सब्त के दिन का भी प्रभु है।।
- 9वहां से चलकर वह उन की सभा के घर में आया।
- 10और देखो, एक मनुष्य था, जिस का हाथ सूखा हुआ था; और उन्हों ने उस पर दोष लगाने के लिेय उस से पूछा, कि क्या सब्त के दिन चंगा करना उचित है?
- 11उस ने उन से कहा; तुम में ऐसा कौन है, जिस की एक भेड़ हो, और वह सब्त के दिन गड़हे में गिर जाए, तो वह उसे पकड़कर न निकाले?
Cross references
- Luke 6:6–11 लूका 6:6–11और ऐसा हुआ कि किसी और सब्त के दिन को वह आराधनालय में जाकर उपदेश करने लगा; और वहां एक मनुष्य था, जिस का दहिना हाथ सूखा था। शास्त्री और फरीसी उस पर दोष लगाने का अवसर पाने के लिये उस की ताक में थे, कि देखें कि वह सब्त के दिन चंगा करता है कि नहीं। परन्तु वह उन के विचार जानता था; इसलिये उसने सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा; उठ, बीच में खड़ा हो: वह उठ खड़ा हुआ। यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से यह पूछता हूं कि सब्त के दिन क्या उचित है, भला करन या बुरा करना; प्राण को बचाना या नाश करना? और उस ने चारों ओर उन सभों को देखकर उस मनुष्य से कहा; अपना हाथ बढ़ा: उस ने ऐसा ही किया, और उसका हाथ फिर चंगा हो गया। परन्तु वे आपे से बाहर होकर आपस में विवाद करने लगे कि हम यीशु के साथ क्या करें?
- Mark 3:1–6 मरकुस 3:1–6और वह आराधनालय में फिर गया; और वहां एक मनुष्य था, जस का हाथ सूख गया था। और वे उस पर दोष लगाने के लिये उस की घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं। उस ने सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा; बीच में खड़ा हो। और उन से कहा; क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करता, प्राण को बचाना या मारना? पर वे चुप रहे। और उस ने उन के मन की कठोरता से उदास होकर, उन को क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा उस ने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया। तब फरीसी बाहर जाकर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें।।