Matthew · chapter 6 · verse 27
Matthew 6:27 in Hindi
तुम में कौन है, जो चिन्ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
Tum mem kaun hai, jo chintaa karake apanee avasthaa mem ek ghadee bhee badhaa sakataa hai?
Matthew 6:27 in English
- King James Version (KJV)
- Which of you by taking thought can add one cubit unto his stature?
- World English Bible (WEB)
- “Which of you by being anxious, can add one moment to his lifespan?
- American Standard Version (ASV)
- And which of you by being anxious can add one cubit unto the measure of his life?
- Bible in Basic English (BBE)
- And which of you by taking thought is able to make himself a cubit taller?
- Darby Translation (DBY)
- But which of you by carefulness can add to his growth one cubit?
- Webster's Bible (WBS)
- Which of you by anxious care can add one cubit to his stature?
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And who of you, being anxious, is able to add to his age one cubit?
Read in context
- 25इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्रा से बढ़कर नहीं?
- 26आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।
- 27तुम में कौन है, जो चिन्ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
- 28और वस्त्रा के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
- 29तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे विभव में उन में से किसी के समान वस्त्रा पहिने हुए न था।
Cross references
- Luke 12:25–26 लूका 12:25–26तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्ता करने से अपनी अवस्था में ऐक घड़ी भी बड़ा सकता है? इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्ता करते हो?
- Ecclesiastes 3:14 सभोपदेशक 3:14मैं जानता हूं कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा; न तो उस में कुछ बढ़ाया जा सकता है और न कुछ घटाया जा सकता है; परमेश्वर एसा इसलिये करता है कि लोग उसका भय मानें।
- Psalm 39:5–6 भजन संहिता 39:5–6देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा!
- Matthew 5:36 मत्ती 5:36अपने सिर की भी शपथ न खाना क्योंकि तू एक बाल को भी न उजला, न काला कर सकता है।
- 1 Corinthians 12:18 1 कुरिन्थियों 12:18परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है।