Proverbs · chapter 27 · verse 19
Proverbs 27:19 in Hindi
जैसे जल में मुख की परछाई सुख से मिलती है, वैसे ही एक मनुष्य का मन दूसरे मनुष्य के मन से मिलता है।
Jaise jal mem mukh kee parachhaaee sukh se milatee hai, vaise hee ek manushy kaa man doosare manushy ke man se milataa hai.
Proverbs 27:19 in English
- King James Version (KJV)
- As in water face [answereth] to face, so the heart of man to man.
- World English Bible (WEB)
- Like water reflects a face, so a man’s heart reflects the man.
- American Standard Version (ASV)
- As in water face [answereth] to face, So the heart of man to man.
- Bible in Basic English (BBE)
- Like face looking at face in water, so are the hearts of men to one another.
- Darby Translation (DBY)
- As [in] water face [answereth] to face, so the heart of man to man.
- Webster's Bible (WBS)
- As in water face [answereth] to face, so the heart of man to man.
- Young's Literal Translation (YLT)
- As [in] water the face [is] to face, So the heart of man to man.
Read in context
- 17जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसे ही मनुष्य का मुख अपने मित्रा की संगति से चमकदार हो जाता है।
- 18जो अंजीर के पेड़ की रक्षा करता है वह उसका फल खाता है, इसी रीति से जो अपने स्वामी की सेवा करता उसकी महिमा होती है।
- 19जैसे जल में मुख की परछाई सुख से मिलती है, वैसे ही एक मनुष्य का मन दूसरे मनुष्य के मन से मिलता है।
- 20जैसे अधोलोक और विनाशलोक, वैसे ही मनुष्य की आंखें भी तृप्त नहीं होती।
- 21जैसे चान्दी के लिये कुठाई और सोने के लिये भट्ठी हैं, वैसे ही मनुष्य के लिये उसकी प्रशंसा है।
Cross references
- James 1:22–25 याकूब 1:22–25परन्तु वचन पर चलनेवाले बनो, और केवल सुननेवाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। क्योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो, और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। पर जो व्यक्ति स्वतंत्राता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
- Psalm 33:15 भजन संहिता 33:15वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।
- Mark 7:21 मरकुस 7:21क्योंकि भीतर से अर्थात् मनुष्य मे मन से, बुरी बुरी चिन्ता व्यभिचार।
- Genesis 6:5 उत्पत्ति 6:5और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।