Psalms · chapter 102 · verse 23
Psalm 102:23 in Hindi
उस ने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया।
Us ne mujhe jeevan yaatraa mem du:kh dekar, mere bal aur aayu ko ghataayaa.
Psalm 102:23 in English
- King James Version (KJV)
- He weakened my strength in the way; he shortened my days.
- World English Bible (WEB)
- He weakened my strength along the course. He shortened my days.
- American Standard Version (ASV)
- He weakened my strength in the way; He shortened my days.
- Bible in Basic English (BBE)
- He has taken my strength from me in the way; he has made short my days.
- Darby Translation (DBY)
- He weakened my strength in the way, he shortened my days.
- Webster's Bible (WBS)
- He weakened my strength in the way; he shortened my days.
- Young's Literal Translation (YLT)
- He hath humbled in the way my power, He hath shortened my days.
Read in context
- 21और सिरयोन में यहोवा के नाम का वर्णन किया जाए, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाए;
- 22यह उस समय होगा जब देश देश, और राज्य राज्य के लोग यहोवा की उपासना करने को इकट्ठे होंगे।।
- 23उस ने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया।
- 24मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे!
- 25आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है।
Cross references
- 1 Timothy 4:1–3 1 तीमुथियुस 4:1–3परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है, कि आनेवाले समयों में कितने लोग भरमानेवाली आत्माओं, और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्वास से बहक जाएंगे। यह उन झूठे मनुष्यों के कपट के कारण होगा, जिन का विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है। जो ब्याह करने से रोकेंगे, और भोजन की कुछ वस्तुओं से परे रहने की आज्ञा देंगे; जिन्हें परमेश्वर ने इसलिये सृजा कि विश्वासी, और सत्य के पहिचाननेवाले उन्हें धन्यवाद के साथ खाएं।
- Psalm 89:38–47 भजन संहिता 89:38–47तौभी तू ने अपने अभिषिक्त को छोड़ा और उसे तज दिया, और उस पर अति क्रोध किया है। तू अपने दास के साथ की वाचा से घिनाया, और उसके मुकुट को भूमि पर गिराकर अशुद्ध किया है। तू ने उसके सब बाड़ों को तेड़ डाला है, और उसके गढ़ों को उजाड़ दिया है। सब बटोही उसको लूट लेते हैं, और उसके पड़ोसियों से उसकी नामधराई होती है। तू ने उसके द्रोहियों को प्रबल किया; और उसके सब शत्रुओं को आनन्दित किया; और उसके सब शत्रुओं को आनन्दित किया है। फिर तू उसकी तलवार की धार को मोड़ देता है, और युद्ध में उसके पांव जमने नहीं देता। तू ने उसका तेज हर लिया है और उसके सिंहासन को भूमि पर पटक दिया है। तू ने उसकी जवानी को घटाया, और उसको लज्जा से ढांप दिया है।। हे यहोवा तू कब तक लगातार मूंह फेरे रहेगा, तेरी जलजलाहट कब तक आग की नाईं भड़की रहेगी।। मेरा स्मरण कर, कि मैं कैसा अनित्य हूं, तू ने सब मनुष्यों को क्यों व्यर्थ सिरजा है?
- 2 Thessalonians 2:3–12 2 थिस्सलुनीकियों 2:3–12किसी रीति से किसी के धोखे में न आना क्योंकि वह दिन न आएगा, जब तक धर्म का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरूष अर्थात् विनाश का पुत्रा प्रगट न हो। जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्वर, या पूज्य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहां तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर अपने आप को परमेश्वर प्रगट करता है। क्या तुम्हें स्मरण नहीं, कि जब मैं तुम्हारे यहां था, तो तुम से ये बातें कहा करता था? और अब तुम उस वस्तु को जानते हो, जो उसे रोक रही है, कि वह अपने ही समय में प्रगट हो। क्योंकि अधर्म का भेद अब भी कारर्य करता जाता है, पर अभी एक रोकनेवाला है, और जब तक वह दूर न हो जाए, वह रोके रहेगा। तब वह अधर्मी प्रगट होगा, जिसे प्रभु यीशु अपने मुंह को फंूक से मार डालेगा, और अपने आगमन के तेज से भस्म करेगा। उस अधर्मी का आना शैतान के कारर्य के अनुसार सब प्रकार की झूठी सामर्थ, और चिन्ह, और अद्भुत काम के साथ। और नाश होनेवालों के लिये अधर्म के सब प्रकार के धोखे के साथ होगा; क्योंकि उन्होंने सत्य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया जिस से उन का उद्धार होता। और इसी कारण परमेश्वर उन में एक भटका देनेवाली सामर्थ को भेजेगा ताकि वे झूठ की प्रतीति करें। और जितने लोग सत्य की प्रतीति नहीं करते, वरन अधर्म से प्रसन्न होते हैं, सब दण्ड पाएं।।
- Revelation 11:2–19 प्रकाशितवाक्य 11:2–19और मन्दिर के बारह का आंगन छोड़ दे; उस मत नाप, क्योंकि वह अन्यजातियों को दिया गया है, और वे पवित्रा नगर को बयालीस महीने तक रौंदेंगी। और मैं अपने दो गवाहों को यह अधिकार दूंगा, कि टाट ओढे हुए एक हजार दो सौ साठ दिन तक भविष्यद्ववाणी करें। ये वे ही जैतून के दो पेड़ और दो दीवट हैं जो पृथ्वी के प्रभु के साम्हने खड़े रहते हैं। और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहता है, तो उन के मुंह से आग निकलकर उन के बैरियों को भस्म करती है, और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहेगा, तो अवश्य इसी रीति से मार डाला जाएगा। इन्हें अधिकार है, कि आकाश को बन्द करें, कि उन की भविष्यद्ववाणी के दिनों में मेंह न बरसे, और उन्हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृथ्वी पर हर प्रकार की आपत्ति लाएं। और जब वे अपनी गवाही दे चुकेंगे, तो वह पशु जो अथाह कुण्ड में से निकलेगा, उन से लड़कर उन्हें जीतेगा और उन्हें मार डालेगा। और उन की लोथें उस बड़े नगर के चौक में पड़ी रहेंगी, जो आत्मिक रीति से सदोम और मिसर कहलाता है, जहां उन का प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था। और सब लोगों, और कुलों, और भाषाओं, और जातियों में से लोग उन की लोथें साढ़े तीन दिन तक देखते रहेंगे, और उन की लोथें कब्र में रखने ने देंगे। और पृथ्वी के रहनेवाले, उन के मरने से आनन्दित और मगन होंगे, और एक दूसरे के पास भेंट भेजेंगे, क्योंकि इन दोनों भविष्यद्वक्ताओं ने पृथ्वी के रहनेवालों को सताया था और साढ़े तीन दिन के बाद परमेश्वर की ओर से जीवन की आत्मा उन में पैठ गई; और वे अपने पांवों के बल खड़े हो गए, और उनके देखनेवालों पर बड़ा भय छा गया। और उन्हें स्वर्ग से एक बड़ा शब्द सुनाई दिया, कि यहां ऊपर आओ; यह सुन वे बादल पर सवार होकर अपने बैरियों के देखते देखते स्वर्ग पर चढ़ गए। फिर उसी घड़ी एक बड़ा भुइंडोल हुआ, और नगर का दसवां अंश गिर पड़ा; और उस भुइंडोल से सात हजार मनुष्य मर गए और शेष डर गए, और स्वर्ग के परमेश्वर की महिमा की।। दूसरी विपत्ति बीत चुकी, देखो, तीसरी विपत्ति शीघ्र आनेवाली है।। और जब सातवें दूत ने तुरही फूंकी, तो स्वर्ग में इस विषय के बड़े बड़े शब्द होने लगे कि जगत का राज्य हमारे प्रभु का, और उसके मसीह का हो गया। और वह युगानुयुग राज्य करेगा, और चौबीसों प्राचीन जो परमेश्वर के साम्हने अपने अपने सिंहासन पर बैठे थे, मुंह के बल गिरकर परमेश्वर को दण्डवत करके। यह कहने लगे, कि हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, जो है, और जो था, हम तेरा धन्यवाद करते हैं, कि तू ने अपनी बड़ी सार्म्थ काम में लाकर राज्य किया है। और अन्यजातियों ने क्रोध किया, और तेरा प्रकोप आ पड़ा और वह समय आ पहुंचा है, कि मरे हुओं का न्याय किया जाए, और तेरे दास भविष्यद्वक्ताओं और पवित्रा लोगों को और उन छोटे बड़ों को जो तेरे नाम से डरते हैं, बदला दिया जाए, और पृथ्वी के बिगाड़नेवाले नाश किए जाएं।। और परमेश्वर का जो मन्दिर स्वर्ग में है, वह खोला गया, और उसके मन्दिर में उस की वाचा का सन्दूक दिखाई दिया, और बिजलियां और शब्द और गर्जन और भुइंडोल हुए, और बड़े बड़े ओले पड़े।।
- Job 21:21 अय्यूब 21:21क्योंकि जब उसके महीनों की गिनती कट चुकी, तो अपने बादवाले घराने से उसका क्या काम रहा।
- 2 Timothy 3:1–17 2 तीमुथियुस 3:1–17पर यह जान रख, कि अन्तिम दिनों में कठिन समय आएंगे। क्योंकि मनुष्य अपस्वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता- पिता की आज्ञा टालनेवाले, कृतघ्न, अपवित्रा। मयारहित, क्षमारहित, दोष लगानेवाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी। विश्वासघाती, ढीठ, घमण्डी, और परमेश्वर के नहीं बरन सुखविलास ही के चाहनेवाले होंगे। वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उस की शक्ति को न मानेंगे; ऐसों से परे रहता। इन्हीं में से वे लोग हैं, जो घरों में दबे पांव घुस आते हैं और छिछौरी स्त्रियों को वश में कर लेते हैं, जो पापों से दबी और हर प्रकार की अभिलाषाओं के वश में हैं। और सदा सीखती तो रहती हैं पर सत्य की पहिचान तक कभी नहीं पहुंचतीं। और जैसे यन्नेस और यम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्य का विरोध करते हैं: ये तो ऐसे मनुष्य हैं, जिन की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है और वे विश्वास के विषय में निकम्मे हैं। पर वे इस से आगे नहीं बढ़ सकते, क्योंकि जैसे उन की अज्ञानता सब मनुष्यों पर प्रगट हो गई थी, वैसे ही इन की भी हो जाएगी। पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया। और ऐसे दुखों में भी जो अन्ताकिया और इकुनियुम और लुस्त्रा में मुझ पर पड़े थे और और दुखों में भी, जो मैं ने उठाए हैं; परन्तु प्रभु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया। पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। और दुष्ट, और बहकानेवाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे। पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था? और बालकपन से पवित्रा शास्त्रा तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। हर एक पवित्राशास्त्रा परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए।।