Romans · chapter 1 · verse 12
Romans 1:12 in Hindi
अर्थात् यह, कि मैं तुम्हारे बीच में होकर तुम्हारे साथ उस विश्वास के द्वारा जो मुझ में, और तुम में है, शान्ति पाऊं।
Arthaat yah, ki maim tumhaare beech mem hokar tumhaare saath us vishvaas ke dvaaraa jo mujh mem, aur tum mem hai, shaanti paaoon.
Romans 1:12 in English
- King James Version (KJV)
- That is, that I may be comforted together with you by the mutual faith both of you and me.
- World English Bible (WEB)
- that is, that I with you may be encouraged in you, each of us by the other’s faith, both yours and mine.
- American Standard Version (ASV)
- that is, that I with you may be comforted in you, each of us by the other’s faith, both yours and mine.
- Bible in Basic English (BBE)
- That is to say, that all of us may be comforted together by the faith which is in you and in me.
- Darby Translation (DBY)
- that is, to have mutual comfort among you, each by the faith [which is] in the other, both yours and mine.
- Webster's Bible (WBS)
- That is, that I may be comforted together with you, by the mutual faith both of you and me.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and that is, that I may be comforted together among you, through the faith in one another, both yours and mine.
Read in context
- 10और नित्य अपनी प्रार्थनाओं में बिनती करता हूं, कि किसी रीति से अब भी तुम्हारे पास आने को मेरी यात्रा परमेश्वर की इच्छा से सुफल हो।
- 11क्योंकि मै। तुम से मिलने की लालसा करता हूं, कि मैं तुम्हें कोई आत्मिक बरदान दूं जिस से तुम स्थिर हो जाओ।
- 12अर्थात् यह, कि मैं तुम्हारे बीच में होकर तुम्हारे साथ उस विश्वास के द्वारा जो मुझ में, और तुम में है, शान्ति पाऊं।
- 13और हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस से अनजान रहो, कि मैं ने बार बार तुम्हारे पास आना चाहा, कि जैसा मुझे और अन्यजातियों में फल मिला, वैसा ही तुम में भी मिले, परन्तु अब तक रूका रहा।
- 14मैं यूनानियों और अन्यभाषियों का और बुद्धिमानों और निर्बुद्धियों का कर्जदान हूं।
Cross references
- 1 Thessalonians 3:7–10 1 थिस्सलुनीकियों 3:7–10इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्लेश में तुम्हारे विश्वास से तुम्हारे विषय में शान्ति पाई। क्योंकि अब यदि तुम प्रभु में स्थिर रहो तो हम जीवित हैं। और जैसा आनन्द हमें तुम्हारे कारण अपने परमेश्वर के साम्हने है, उसके बदले तुम्हारे विषय में हम किस रीति से परमेश्वर का धन्यवाद करें? हम राज दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्हारा मुंह देखें, और तुम्हारे विश्वास की घटी पूरी करें।।
- 3 John 1:3–4 3 यूहन्ना 1:3–4क्योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्य की गवाही दी, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्दित हुआ। मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के- बाले सत्य पर चलते हैं।
- 2 Corinthians 7:13 2 कुरिन्थियों 7:13इसलिये हमें शान्ति हुई; और हमारी इस शान्ति के साथ तितुस के आनन्द के कारण और भी आनन्द हुआ कयोंकि उसका जी तुम सब के कारण हरा भरा हो गया है।
- 2 Peter 1:1 2 पतरस 1:1शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्हों ने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धार्मिकता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्त किया है।
- Titus 1:4 तीतुस 1:4तीतुस के नाम जो विश्वास की सहभागिता के विचार से मेरा सच्चा पुत्रा है: परमेश्वर पिता और हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु से अनुग्रह और शान्ति होती रहे।।
- 2 Corinthians 7:4–7 2 कुरिन्थियों 7:4–7मैं तुम से बहुत हियाव के साथ बोल रहा हूं, मुझे तुम पर बड़ा घमण्ड है: मैं शान्ति से भर गया हूं; अपने सारे क्लेश में मैं आनन्द से अति भरपूर रहता हूं।। क्योंकि जब हम मकिदुनिया में आए, तब भी हमारे शरीर को चैन नहीं मिला, परन्तु हम चारों ओर से क्लेश पाते थे; बाहर लड़ाइयां थीं, भीतर भयंकर बातें थी। तौभी दानों को शान्ति देनेवाले परमेश्वर ने तितुस के आने से हम को शान्ति दी। और न केवल उसके आने से परन्तु उस की उस शान्ति से भी, जो उस को तुम्हारी ओर से मिली थी; और उस ने तुम्हारी लालसा, और तुम्हारे दुख ओर मेरे लिये तुम्हारी धुन का समाचार हमें सुनाया, जिस से मुझे और भी आनन्द हुआ।
- Romans 15:32 रोमियों 15:32और मैं परमेश्वर की इच्छा से तुम्हारे पास आनन्द के साथ आकर तुम्हारे साथ विश्राम पाऊं।
- 1 Thessalonians 2:17–20 1 थिस्सलुनीकियों 2:17–20हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं बरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुंह देखने के लिये और भी अधिक यत्न किया। इसलिये हम ने (अर्थात् मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, बरन दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्तु शैतान हमें रोके रहा। भला हमारी आशा, या आनन्द या बड़ाई का मुकुट क्या है? क्या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे? हमारी बड़ाई और आनन्द तुम ही हो।।
- 2 Corinthians 2:1–3 2 कुरिन्थियों 2:1–3मैंने अपने मन में यही ठान लिया था कि फिर तुम्हारे पास उदास होकर न आऊं। क्योंकि यदि मैं तुम्हें उदास करूं, तो मुझे आनन्द देनेवाला कौन होगा, केवल वही जिस को मैं ने उदास किया? और मैं ने यही बात तुम्हें इसलिये लिखी, कि कहीं ऐसा न हो, कि मेरे आने पर जिन से आनन्द मिलना चाहिए, मैं उन से उदास होऊं; क्योंकि मुझे तुम सब पर इस बात का भरोसा है, कि जो मेरा आनन्द है, वही तुम सब का भी है।
- Acts 11:23 प्रेरितों के काम 11:23वह वहां पहुंचकर, और परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो।