Romans · chapter 4 · verse 4
Romans 4:4 in Hindi
काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्क समझा जाता है।
Kaam karanevaale kee majadooree denaa daan naheem, parantu hakk samajhaa jaataa hai.
Romans 4:4 in English
- King James Version (KJV)
- Now to him that worketh is the reward not reckoned of grace, but of debt.
- World English Bible (WEB)
- Now to him who works, the reward is not counted as grace, but as something owed.
- American Standard Version (ASV)
- Now to him that worketh, the reward is not reckoned as of grace, but as of debt.
- Bible in Basic English (BBE)
- Now, the reward is credited to him who does works, not as of grace but as a debt.
- Darby Translation (DBY)
- Now to him that works the reward is not reckoned as of grace, but of debt:
- Webster's Bible (WBS)
- Now to him that worketh, is the reward not reckoned of grace, but of debt.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and to him who is working, the reward is not reckoned of grace, but of debt;
Read in context
- 2क्योंकि यदि इब्राहीम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्ड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्वर के निकट नहीं।
- 3पवित्रा शास्त्रा क्या कहता है? यह कि इब्राहीम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।
- 4काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्क समझा जाता है।
- 5परन्तु जो काम नहीं करता बरन भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।
- 6जिसे परमेश्वर बिना कमों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है।
Cross references
- Romans 11:6 रोमियों 11:6यदि यह अनुग्रह से हुआ है, तो फिर कर्मों से नहीं, नहीं तो अनुग्रह फिर अनुग्रह नहीं रहा।
- Romans 9:32 रोमियों 9:32किस लिये? इसलिये कि वे विश्वास से नहीं, परन्तु मानों कर्मों से उस की खोज करते थे: उन्हों ने उस ठोकर के पत्थर पर ठोकर खाई।
- Romans 11:35 रोमियों 11:35या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए।
- Matthew 20:1–16 मत्ती 20:1–16स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। और उस ने मजदूरों से एक दीनार राज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। फिर पहर एक दिन चढ़े, निकलकर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। फिर उस ने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तु क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। उस ने उन से कहा, तुम भी दा,ा की बारी में जाओ। सांझ को दाख बारी के स्वामी ने अपने भण्डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से लेकर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। जो पहिले आए, उन्हों ने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? उस ने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्रा, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। क्या उचित नहीं कि मं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहिले होंगे, और जो पहिले हैं, वे पिछले होंगे।।