Song of Solomon · chapter 8 · verse 12
Song of Solomon 8:12 in Hindi
मेरी निज दाख की बारी मेरे ही लिये है; हे सुलैमान, हजार तुझी को और फल के रखवालों को दो सौ मिलें॥
Meree nij daakh kee baaree mere hee liye hai; he sulaimaan, hajaar tujhee ko aur phal ke rakhavaalom ko do sau milen
Song of Solomon 8:12 in English
- King James Version (KJV)
- My vineyard, which [is] mine, [is] before me: thou, O Solomon, [must have] a thousand, and those that keep the fruit thereof two hundred.
- World English Bible (WEB)
- My own vineyard is before me. The thousand are for you, Solomon, two hundred for those who tend its fruit.
- American Standard Version (ASV)
- My vineyard, which is mine, is before me: Thou, O Solomon, shalt have the thousand, And those that keep the fruit thereof two hundred.
- Bible in Basic English (BBE)
- My vine-garden, which is mine, is before me: you, O Solomon, will have the thousand, and those who keep the fruit of them two hundred.
- Darby Translation (DBY)
- My vineyard, which is mine, is before me: The thousand [silver-pieces] be to thee, Solomon; And to the keepers of its fruit, two hundred.
- Webster's Bible (WBS)
- My vineyard which [is] mine, [is] before me: thou, O Solomon, [must have] a thousand, and those that keep the fruit of it two hundred.
- Young's Literal Translation (YLT)
- My vineyard — my own — is before me, The thousand [is] for thee, O Solomon. And the two hundred for those keeping its fruit. O dweller in gardens!
Read in context
- 10मैं शहरपनाह थी और मेरी छातियां उसके गुम्मट; तब मैं अपने प्रेमी की दृष्टि में शान्ति लाने वाले के नाईं थी॥
- 11बाल्हामोन में सुलैमान की एक दाख की बारी थी; उसने वह दाख की बारी रखवालों को सौंप दी; हर एक रखवाले को उसके फलों के लिये चान्दी के हजार हजार टुकड़े देने थे।
- 12मेरी निज दाख की बारी मेरे ही लिये है; हे सुलैमान, हजार तुझी को और फल के रखवालों को दो सौ मिलें॥
- 13तू जो बारियों में रहती है, मेरे मित्र तेरा बोल सुनना चाहते हैं; उसे मुझे भी सुनने दे॥
- 14हे मेरे प्रेमी, शीघ्रता कर, और सुगन्ध द्रव्यों के पहाड़ों पर चिकारे वा जवान हरिण के नाईं बन जा॥
Cross references
- Song of Solomon 1:6 श्रेष्ठगीत 1:6मुझे इसलिये न घूर कि मैं साँवली हूं, क्योंकि मैं धूप से झुलस गई। मेरी माता के पुत्रा मुझ से अप्रसन्न थे, उन्हों ने मुझ को दाख की बारियों की रखवालिन बनाया; परन्तु मैं ने अपनी निज दाख की बारी की रखवाली नहीं की!
- Acts 20:28 प्रेरितों के काम 20:28इसलिये अपनी और पूरे झुंड की चौकसी करो; जिस से पवित्रा आत्मा ने तुम्हें अध्यक्ष ठहराया है; कि तुम परमेश्वर की कलीसिया की रखवाली करो, जिसे उस ने अपने लोहू से मोल लिया है।
- 1 Thessalonians 2:19 1 थिस्सलुनीकियों 2:19भला हमारी आशा, या आनन्द या बड़ाई का मुकुट क्या है? क्या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे?
- 1 Corinthians 6:20 1 कुरिन्थियों 6:20कयोंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।।
- Proverbs 4:23 नीतिवचन 4:23सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल द्दॊत वही है।
- 2 Corinthians 5:15 2 कुरिन्थियों 5:15और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
- Psalm 72:17–19 भजन संहिता 72:17–19उसका नाम सदा सर्वदा बना रहेगा; जब तक सूर्य बना रहेगा, तब तक उसका नाम नित्य नया होता रहेगा, और लोग अपने को उसके कारण धन्य गिनेंगे, सारी जातियां उसको भाग्यवान कहेंगी।। धन्य है, यहोवा परमेश्वर जो इस्राएल का परमेश्वर है; आश्चर्य कर्म केवल वही करता है। उसका महिमायुक्त नाम सर्वदा धन्य रहेगा; और सारी पृथ्वी उसकी महिमा से परिपूर्ण होगी। आमीन फिर आमीन।।
- Romans 14:7–9 रोमियों 14:7–9क्योंकि हम में से न तो कोई पअने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है। क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएं या मरें, हम प्रभु ही के हैं। क्योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो।
- 1 Timothy 4:15–16 1 तीमुथियुस 4:15–16उन बातों को सोचता रह, ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो। अपनी और अपने उपदेश की चौकसी रख। इन बातों पर स्थिर रह, क्योंकि यदि ऐसा करता रहेगा, तो तू अपने, और अपने सुननेवालों के लिये भी उद्धार का कारण होगा।।
- 1 Timothy 5:17–18 1 तीमुथियुस 5:17–18जो प्राचीन अच्छा प्रबन्ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएं। क्योंकि पवित्रा शास्त्रा कहता है, कि दांवनेवाले बैल का मुंह न बान्धना, क्योंकि मजदूर अपनी मजदूरी का हक्कदार है।